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बंगाल चुनाव से पहले सियासत गरम: भाजपा का टीएमसी पर घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 1 day ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

पटना। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और राज्य सरकार में मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा नेताओं ने कहा कि टीएमसी सरकार अवैध घुसपैठियों, बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं को संरक्षण दे रही है, जिससे राज्य के संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है।


संजय सरावगी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान का समर्थन करते हुए कहा कि बंगाल के रास्ते देश में घुसपैठ एक बड़ी समस्या बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार वोट बैंक की राजनीति के तहत घुसपैठियों और बाहरी नागरिकों को संरक्षण दे रही है। सरावगी ने कहा कि इसके चलते राज्य के मूल निवासियों को संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है और जनसंख्या संतुलन भी प्रभावित हो रहा है।


उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की आबादी में लगातार वृद्धि हो रही है और सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। सरावगी ने यह भी कहा कि आगामी चुनाव में जनता इसका जवाब देगी और इस बार राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी।


वहीं, मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से लगने वाली सीमा असम से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैली हुई है, जहां कई स्थानों पर अब भी फेंसिंग अधूरी है। भौगोलिक चुनौतियों—जैसे नदी और पहाड़ी क्षेत्र—के कारण बाड़ लगाने में कठिनाई आ रही है, जिसका फायदा घुसपैठिए उठा रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से जल्द से जल्द पूर्ण फेंसिंग की आवश्यकता पर जोर दिया।


गौरतलब है कि एक दिन पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा की ओर से पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 15 वर्षों के शासन पर आधारित 35 पन्नों का ‘श्वेत पत्र’ जारी किया था। इस रिपोर्ट में घुसपैठ, भ्रष्टाचार, संस्थागत कमजोरी, आर्थिक गिरावट, कानून-व्यवस्था और सामाजिक ढांचे के कमजोर होने जैसे पांच प्रमुख मुद्दों को उठाया गया है।


‘श्वेत पत्र’ के अनुसार, भारत-बांग्लादेश सीमा की कुल 2,216.7 किलोमीटर लंबाई में से लगभग 569 किलोमीटर क्षेत्र अब भी बिना फेंसिंग के है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण यह कार्य अधूरा है, जिससे घुसपैठ को बढ़ावा मिला। साथ ही टीएमसी पर कथित तौर पर फर्जी पहचान पत्र बनवाकर घुसपैठियों को बसाने के आरोप भी लगाए गए हैं।


हालांकि, इन आरोपों पर टीएमसी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बंगाल चुनाव के नजदीक आते ही इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान और तेज होने की संभावना है।

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