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पुडुचेरी चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका: सीनियर नेता एवी सुब्रमण्यन का इस्तीफा, बढ़ी सियासी हलचल

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 29
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

पुडुचेरी। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका तब लगा, जब उसके वरिष्ठ नेता एवी सुब्रमण्यन ने अचानक अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। चुनाव से कुछ ही दिन पहले आए इस फैसले ने पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुब्रमण्यन ने अपना त्यागपत्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष वी वैथिलिंगम को सौंपा। उनके इस्तीफे के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा तेज हो गई है, जिसे चुनावी माहौल में कांग्रेस के लिए नुकसानदेह माना जा रहा है।


टिकट वितरण बना विवाद की वजह

हालांकि अपने इस्तीफे में सुब्रमण्यन ने निजी कारणों और मजबूरियों का हवाला दिया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उम्मीदवारों के चयन को लेकर उनकी नाराजगी इस फैसले की प्रमुख वजह हो सकती है। खासतौर पर यह इस्तीफा उसी दिन आया, जब कांग्रेस ने 16 उम्मीदवारों की अपनी आधिकारिक सूची जारी की। सूची में मन्नाडीपट्टू से डीपीआर सेल्वम, ऊसूड़ू से पी कार्तिकेयन, थट्टांचावडी से स्वयं वी वैथिलिंगम, इंदिरानगर से एन राजा कुमार और लॉस्पेट से एम वैद्यनाथन को टिकट दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, कुछ प्रमुख सीटों पर टिकट वितरण को लेकर असहमति लंबे समय से चल रही थी, जो अब खुलकर सामने आ गई है।


मतदान से पहले बढ़ी चुनौती

भारतीय चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, पुडुचेरी की सभी 30 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में मतदान होना है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले वरिष्ठ नेता का इस्तीफा कांग्रेस के लिए रणनीतिक रूप से झटका माना जा रहा है।


कांग्रेस-डीएमके गठबंधन पर भी असर

इस बार कांग्रेस ने द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है। सीट बंटवारे के तहत कांग्रेस 16 और डीएमके 14 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। डीएमके अपनी कुछ सीटें सहयोगी दलों को भी दे रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तमिलनाडु की तर्ज पर यह गठबंधन मजबूत माना जा रहा था, लेकिन आंतरिक असंतोष और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी अब इसकी एकजुटता को प्रभावित कर सकती है।


क्या होंगे राजनीतिक मायने?

विशेषज्ञों के अनुसार, सुब्रमण्यन का इस्तीफा केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि संगठनात्मक असंतोष का संकेत भी हो सकता है। इससे न केवल पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो सकता है, बल्कि विरोधी दलों को भी कांग्रेस पर हमला करने का मौका मिल सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है और चुनावी मैदान में अपनी स्थिति को कितना मजबूत बनाए रख पाता है।

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