‘इंडियन स्टेट’ बयान पर घिरे राहुल, हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित
- धन्ना राम चौधरी

- 11 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
प्रयागराज। कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक बार फिर अपने बयान को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवादों में घिर गए हैं। ‘इंडियन स्टेट’ को लेकर दिए गए उनके एक भाषण ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है और मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय पहुंच चुका है, जहां सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
क्या है पूरा मामला
विवाद की शुरुआत पिछले वर्ष दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ के उद्घाटन समारोह से हुई। अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा था कि उनकी लड़ाई केवल बीजेपी और आरएसएस से नहीं, बल्कि ‘इंडियन स्टेट’ से भी है। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और इसे लेकर देशभर में बहस छिड़ गई।
कोर्ट तक कैसे पहुंचा विवाद
राहुल गांधी के इस बयान को राष्ट्रविरोधी बताते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सिमरन गुप्ता ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। सबसे पहले यह मामला संभल की निचली अदालत में पहुंचा, जहां 7 नवंबर को याचिका को कमजोर आधार बताते हुए खारिज कर दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने निचली अदालत के फैसले को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी, जिसके बाद यह मामला अब उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है।
अदालत में तीखी बहस
जस्टिस विक्रम डी. चौहान की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि राहुल गांधी का बयान केवल राजनीतिक आलोचना नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता को चुनौती देने वाला है, जिससे जनभावनाएं आहत हुई हैं। वहीं, राहुल गांधी की ओर से पेश वकीलों ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया जा रहा है और यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है।
कानूनी पेच और अहम सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल क्षेत्राधिकार (जूरिस्डिक्शन) का है। क्या संभल की अदालत को दिल्ली में दिए गए बयान पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने का अधिकार है? साथ ही, क्या प्रथम दृष्टया कोई संज्ञेय अपराध बनता है—यह भी अदालत को तय करना है। इन कानूनी बिंदुओं पर दोनों पक्षों के बीच लंबी बहस हुई, जिसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
यूपी सरकार का रुख
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में संतुलित रुख अपनाया है। सरकार ने सीधे तौर पर राहुल गांधी का बचाव नहीं किया, लेकिन याचिका में तकनीकी कमियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट को स्वतंत्र रूप से यह तय करने दिया जाना चाहिए कि मामला बनता है या नहीं।
अन्य मामलों में भी घिरे राहुल
गौरतलब है कि राहुल गांधी के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अन्य मामले भी लंबित हैं, जिनमें नागरिकता और सेना पर टिप्पणी से जुड़े विवाद शामिल हैं। इन मामलों में भी अदालत के फैसले का इंतजार किया जा रहा है।
क्या हो सकता है आगे
यदि हाईकोर्ट याचिका स्वीकार करता है, तो राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने का रास्ता साफ हो सकता है और जांच शुरू हो सकती है। वहीं, याचिका खारिज होने की स्थिति में उन्हें बड़ी कानूनी राहत मिलेगी। अब सबकी निगाहें अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि यह मामला महज राजनीतिक बयानबाजी है या कानूनी कार्रवाई के योग्य अपराध।
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