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असम में सियासी संग्राम तेज, बयानबाज़ी चरम पर

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 4
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

गुवाहाटी/कछार। असम में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। नेताओं के तीखे बयान अब सीधे टकराव का रूप लेते दिखाई दे रहे हैं। कछार में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोला और स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में “उनका ही शासन चलेगा” तथा कांग्रेस सरकार बनाने में सक्षम नहीं है।


मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने राज्य में सीमित उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें अपनी हार का अंदेशा पहले से ही है। सरमा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि चाहे ओवैसी कितने भी नारे लगाएं, चुनाव के बाद राज्य में केवल प्रधानमंत्री और उनकी ही आवाज़ गूंजेगी। इस बयान से भाजपा के आत्मविश्वास का संकेत मिलता है, जो चुनावी मैदान में अपनी स्थिति को मजबूत मान रही है।


चुनाव में बदला मुद्दों का स्वरूप

इस बार असम का चुनाव केवल विकास और स्थानीय समस्याओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पहचान, भूमि अधिकार और राजनीतिक वर्चस्व जैसे संवेदनशील मुद्दों ने चुनावी विमर्श को नई दिशा दी है। प्रवासन, अतिक्रमण और जमीन के स्वामित्व जैसे विषयों ने राजनीतिक बहस को और अधिक तीखा बना दिया है, जिसके चलते नेताओं की भाषा भी पहले से अधिक आक्रामक हो गई है।


ओवैसी का पलटवार, सरकार पर गंभीर आरोप

दूसरी ओर, बारपेटा में जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्यमंत्री के बयानों और राज्य सरकार की नीतियों पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने सरकार की कार्रवाई को “असंवैधानिक और दमनकारी” करार देते हुए आरोप लगाया कि एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। ओवैसी ने कहा कि यदि किसी भूमि को वन भूमि घोषित किया जाता है, तो प्रभावित लोगों को वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बड़ी संख्या में अल्पसंख्यकों को बेघर किया गया, और इस मुद्दे पर केवल एआईयूडीएफ ने ही मुखर भूमिका निभाई, जबकि कांग्रेस निष्क्रिय बनी रही।


कांग्रेस पर दोहरा हमला

ओवैसी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए उसे “अंधी और गूंगी” करार दिया। वहीं, सरमा ने कांग्रेस नेतृत्व की सक्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी के शीर्ष नेता राज्य की जमीनी हकीकत से कटे हुए हैं।


9 तारीख पर टिकी निगाहें

असम की सियासत में बढ़ती बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सबकी निगाहें मतदान की तारीख पर टिक गई हैं। एक ओर भाजपा अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है, तो वहीं विपक्ष सरकार की नीतियों को मुद्दा बनाकर जनता के बीच समर्थन जुटाने में जुटा है। चुनावी रण में शब्दों की यह जंग अब मतपेटियों में बंद जनादेश से ही तय होगी कि किसके दावों में कितना दम है।

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