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राघव–केजरीवाल रिश्तों में दरार, आप में बढ़ा टकराव

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 2 days ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद और पार्टी की नई पीढ़ी के चेहरे माने जाने वाले राघव चड्ढा आज अपनी ही पार्टी आम आदमी पार्टी के निशाने पर हैं। राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने के बाद उनके तीखे बयान ने अंदरूनी मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं—आतिशी, सौरभ भारद्वाज और संजय सिंह—ने खुलकर उन पर सवाल उठाए हैं।


राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से चल रही दूरी अब खुली खींचतान में बदल चुकी है। पेश है इस पूरे विवाद की कहानी, पांच अहम बिंदुओं में—


1.भरोसेमंद से विवादित तक का सफर

राघव चड्ढा को कभी पार्टी का उभरता सितारा माना जाता था। राज्यसभा भेजे जाने से लेकर बड़े मंचों पर प्रतिनिधित्व तक, नेतृत्व का उन पर पूरा भरोसा दिखता था। मई 2023 में अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा से उनकी शादी में भी पार्टी का पूरा शीर्ष नेतृत्व शामिल हुआ। हालांकि, इसी दौरान पंजाब के संसाधनों के कथित दुरुपयोग के आरोपों ने पहली बार विवाद की आहट दी।


2.अचानक सार्वजनिक जीवन से दूरी

समय के साथ राघव की सक्रियता कम होती गई। राज्यसभा से निलंबन और उसके बाद मीडिया से दूरी ने कई सवाल खड़े किए। इसी बीच जब 2024 में शराब नीति मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई, तब पार्टी के अन्य नेता आक्रामक मोर्चे पर दिखे, लेकिन राघव की अनुपस्थिति ने अटकलों को हवा दी।


3.चुनावी दौर में सीमित भूमिका

लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान पार्टी संकट में थी। केजरीवाल जेल में थे और नेतृत्व पर दबाव था। ऐसे समय में आतिशी, सौरभ भारद्वाज और संजय सिंह जैसे नेता लगातार सक्रिय रहे, जबकि राघव की भूमिका सीमित दिखाई दी। चुनावी प्रदर्शन कमजोर रहने के बाद उनकी भूमिका पर सवाल और गहराए।


4.पार्टी लाइन से अलग रुख

दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान भी राघव की दूरी चर्चा में रही। इसके बाद उन्होंने राज्यसभा में गिग वर्कर्स, मेंस्ट्रुअल हाइजीन और टैक्स जैसे मुद्दे उठाए, जो आम जनता से जुड़े थे, लेकिन पार्टी की रणनीतिक लाइन से अलग माने गए। सोशल मीडिया पर सराहना मिली, मगर पार्टी के भीतर असहजता बढ़ी।


5.पद से हटाए जाने पर खुला टकराव

स्थिति तब निर्णायक मोड़ पर पहुंची जब राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया गया। उन्होंने इसे “चुप कराने की कोशिश” बताया। इसके बाद सौरभ भारद्वाज ने उन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे बड़े राष्ट्रीय मुद्दों से बच रहे हैं। यहां तक कि कुछ नेताओं ने उन पर भाजपा से नजदीकी के संकेत भी दिए।

आप के भीतर यह टकराव केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि नेतृत्व शैली और राजनीतिक प्राथमिकताओं के टकराव के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि राघव चड्ढा पार्टी के भीतर अपनी भूमिका को पुनः स्थापित कर पाते हैं या यह दूरी स्थायी राजनीतिक अलगाव में बदल जाती है।

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