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पूर्व महापौर प्रभात साहू सहित 5 पर चार्जशीट, वर्दी फाड़ने का मामला

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 2 days ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

जबलपुर। हेलमेट चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मी से अभद्रता और वर्दी फाड़ने के बहुचर्चित मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विशेष जांच दल (एसटीएफ) ने पूर्व महापौर प्रभात साहू सहित पांच आरोपितों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में चार्जशीट न्यायालय में पेश कर दी है। इस कार्रवाई के साथ ही मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।


जांच रिपोर्ट के आधार पर एसटीएफ ने स्पष्ट किया है कि संबंधित पुलिसकर्मी पर लगाए गए सभी आरोप निराधार और तथ्यहीन पाए गए हैं। इसी के चलते पुलिसकर्मी के खिलाफ दर्ज प्रकरण में खात्मा रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिससे उसके खिलाफ कार्रवाई समाप्त मानी गई।


वहीं दूसरी ओर, एसटीएफ जांच में पूर्व महापौर प्रभात साहू, शुभम अवस्थी, महेंद्र रैकवार, विजय सोनी और अभिनंदन जायसवाल की भूमिका स्पष्ट रूप से प्रमाणित पाई गई है। जांच एजेंसी ने इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 121(1), 132, 351(2), 3(5) तथा मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धाराओं 3/181, 129/194-डी और 180 के तहत प्रकरण दर्ज कर चालान पेश किया है।


गौरतलब है कि यह मामला 18 सितंबर 2025 को लार्डगंज थाना क्षेत्र के बल्देवबाग में हेलमेट चेकिंग के दौरान सामने आया था। पुलिसकर्मी द्वारा बिना हेलमेट वाहन चला रहे पूर्व महापौर को रोके जाने पर विवाद उत्पन्न हुआ। आरोप है कि इस दौरान न केवल पुलिसकर्मी से अभद्रता की गई, बल्कि मौके पर जुटी भीड़ ने उसकी वर्दी तक फाड़ दी थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया था।


प्रारंभिक कार्रवाई में पुलिस द्वारा उलट पुलिसकर्मी के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर उसे निलंबित कर दिया गया था, जबकि अन्य आरोपितों के खिलाफ अज्ञात के रूप में मामला कायम किया गया। इस पर जबलपुर निवासी अधिवक्ता मोहित वर्मा ने जनहित याचिका दायर की, जिसके बाद मामले ने न्यायालय का ध्यान खींचा।


मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। न्यायालय के निर्देश पर मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई, जिसने पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की।


एसटीएफ रिपोर्ट के आधार पर अब आरोपितों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने सहित अन्य गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। संबंधित धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर पांच वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। हाई कोर्ट द्वारा एसटीएफ की सीलबंद रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए जनहित याचिका का निराकरण कर दिया गया है। मामले में अब न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत आगे की सुनवाई होगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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