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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • सरसों तेल की कीमत का सच: लागत, बाजार और उपभोक्ता के भरोसे का सवाल

    भारतार्थ खबर अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.comसरसों तेल भारतीय भोजन संस्कृति का केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की रसोई का अभिन्न हिस्सा है। उत्तर भारत से लेकर राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और देश के अनेक हिस्सों में सरसों के तेल का उपयोग पारंपरिक रूप से खाना पकाने के साथ-साथ विभिन्न घरेलू आवश्यकताओं में भी होता रहा है। इसलिए जब सरसों तेल की कीमत में अंतर दिखाई देता है, तो उसका सीधा संबंध उपभोक्ता की जेब, खाद्य गुणवत्ता और बाजार में भरोसे से जुड़ जाता है। आज उपभोक्ता के सामने एक स्वाभाविक प्रश्न है—यदि सरसों खरीदकर उससे तेल तैयार करने में बीज, पेराई, श्रम, पैकिंग, परिवहन और अन्य खर्च जुड़ते हैं, तो बाजार में अलग-अलग कीमतों पर सरसों तेल कैसे उपलब्ध हो जाता है? इस प्रश्न का उत्तर केवल एक लागत गणना से नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए पूरी आपूर्ति श्रृंखला और बाजार की वास्तविक परिस्थितियों को समझना आवश्यक है। एक लीटर तेल की लागत का अनुमान कितना सही? एक सामान्य उदाहरण में यदि यह मान लिया जाए कि करीब तीन किलोग्राम सरसों से लगभग एक लीटर तेल प्राप्त होता है और सरसों का भाव 73 रुपये प्रति किलोग्राम है, तो तीन किलोग्राम सरसों की लागत लगभग 219 रुपये बैठती है। इसके बाद पेराई, मशीन संचालन, श्रम तथा अन्य प्रक्रिया संबंधी खर्च जोड़ने पर लागत बढ़ती है। बोतल, ढक्कन, सील, लेबल और पैकिंग भी अंतिम कीमत का हिस्सा बनते हैं। इस प्रकार एक उदाहरणात्मक गणना में कुल खर्च 262 से 306 रुपये तक पहुंच सकता है। लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि इसे हर उत्पादक की वास्तविक लागत नहीं माना जा सकता। तेल की प्राप्ति सरसों की किस्म, उसमें मौजूद तेल की मात्रा, नमी, गुणवत्ता, मशीन की दक्षता और पेराई की तकनीक पर निर्भर करती है। अर्थात तीन किलोग्राम सरसों से हर स्थिति में ठीक एक लीटर तेल ही निकलेगा, यह मान लेना व्यावहारिक रूप से उचित नहीं होगा। इसी तरह पेराई की लागत भी हर स्थान और हर उत्पादन इकाई में समान नहीं होती। खली भी उत्पादन अर्थशास्त्र का महत्वपूर्ण हिस्सा सरसों से तेल निकालने के बाद बचने वाली खली को अक्सर केवल उप-उत्पाद मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि इसका भी बाजार मूल्य होता है। पशु आहार और कृषि संबंधी उपयोग के कारण सरसों की खली बिकती है और इससे तेल उत्पादन की प्रभावी लागत कम हो सकती है। यदि उदाहरण के तौर पर तीन किलोग्राम सरसों से लगभग दो किलोग्राम खली मिलने और उसका मूल्य 30 से 35 रुपये प्रति किलोग्राम मान लिया जाए, तो इससे 60 से 70 रुपये तक की राशि प्राप्त हो सकती है। इस आय को उत्पादन लागत से घटाने पर प्रभावी लागत का अनुमान लगभग 220 रुपये के आसपास आ सकता है। लेकिन यह भी केवल उदाहरणात्मक गणना है। वास्तविक परिणाम उत्पादन तकनीक, खली की गुणवत्ता, स्थानीय बाजार और उसके मूल्य पर निर्भर करेगा। बाजार मूल्य को केवल कच्चे माल से नहीं समझा जा सकता यहीं से सरसों तेल की कीमत को लेकर बहस अधिक जटिल हो जाती है। किसी छोटे तेल उत्पादक और बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाली कंपनी की लागत संरचना एक जैसी नहीं होती। बड़ा उत्पादक बड़ी मात्रा में कच्चा माल खरीद सकता है। उसे थोक खरीद में अलग दर मिल सकती है। आधुनिक मशीनरी से उत्पादन लागत कम हो सकती है। बड़े पैमाने पर उत्पादन से प्रति लीटर कई खर्चों का भार घट सकता है। दूसरी ओर छोटे उत्पादक के सामने मशीन, श्रम, पैकिंग और वितरण की लागत अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। इसके अलावा परिवहन, भंडारण, ब्रांडिंग, वितरण मार्जिन, खुदरा विक्रेता का मार्जिन, कर और बाजार की प्रतिस्पर्धा भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। इसलिए किसी छोटे स्तर की लागत गणना की सीधे तुलना किसी बड़े ब्रांड के खुदरा मूल्य से करना हमेशा उचित निष्कर्ष तक नहीं पहुंचाता। कम कीमत का अर्थ मिलावट नहीं खाद्य तेल के मामले में सबसे संवेदनशील मुद्दा मिलावट का है। बाजार में किसी उत्पाद की कीमत कम देखकर तत्काल उसे मिलावटी या नकली घोषित करना उचित नहीं है। कम कीमत के पीछे कई वैध कारोबारी कारण हो सकते हैं। इसी तरह केवल ब्रांड की प्रतिष्ठा या अधिक कीमत को शुद्धता की गारंटी मान लेना भी सही दृष्टिकोण नहीं है। खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता का मूल्यांकन निर्धारित मानकों, लेबल संबंधी जानकारी और नियामकीय व्यवस्था के आधार पर किया जाना चाहिए। यही वह बिंदु है जहां जिम्मेदार पत्रकारिता और जागरूक उपभोक्ता दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। बिना प्रमाण किसी कंपनी या उत्पाद पर मिलावट का आरोप लगाना न तो निष्पक्ष पत्रकारिता है और न ही उपभोक्ता हित में। उपभोक्ता की सतर्कता सबसे जरूरी सरसों तेल खरीदते समय उपभोक्ता को केवल कीमत देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। पैकेज पर निर्माता की जानकारी, मात्रा, बैच विवरण, निर्माण एवं समाप्ति तिथि तथा अनिवार्य लेबल संबंधी जानकारी देखना आवश्यक है। पैकिंग क्षतिग्रस्त हो या उत्पाद की जानकारी अस्पष्ट हो तो सावधानी बरतना उचित है। खुले और संदिग्ध स्रोत से खाद्य तेल खरीदने के बजाय विश्वसनीय विक्रेता से स्पष्ट लेबल वाला उत्पाद लेना उपभोक्ता के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है। यदि किसी उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर वास्तविक संदेह हो, तो अनुमान या अफवाह के बजाय संबंधित खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण के माध्यम से शिकायत और परीक्षण की व्यवस्था का सहारा लिया जाना चाहिए। कीमत और गुणवत्ता के बीच संतुलन जरूरी सरसों तेल के मूल्य पर चर्चा करते समय एक और तथ्य समझना जरूरी है—किसी वस्तु की उत्पादन लागत और उसका बाजार मूल्य हमेशा समान नहीं होता। बाजार मूल्य मांग और आपूर्ति, कच्चे माल की कीमत, मौसम, फसल उत्पादन, भंडारण, परिवहन और प्रतिस्पर्धा जैसे अनेक कारकों से प्रभावित होता है। सरसों की फसल अच्छी होने पर कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों पर उसका प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर उत्पादन कम होने, परिवहन महंगा होने या मांग बढ़ने की स्थिति में कीमत बढ़ सकती है। इसलिए एक दिन या एक समय की कीमत के आधार पर पूरे बाजार की लागत संरचना का निष्कर्ष निकालना भी उचित नहीं होगा। सरकार और नियामक संस्थाओं की भूमिका खाद्य तेल जैसे आवश्यक उत्पादों के मामले में पारदर्शी बाजार व्यवस्था बनाए रखना सरकार और नियामक संस्थाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उपभोक्ता को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिले, इसके लिए बाजार निगरानी, खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन और नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है। साथ ही उपभोक्ताओं को भी अपनी भूमिका समझनी होगी। केवल सस्ता उत्पाद तलाशना ही पर्याप्त नहीं है। गुणवत्ता, पैकेजिंग, स्रोत और विश्वसनीयता को भी खरीद के निर्णय का हिस्सा बनाना होगा। संपादकीय दृष्टिकोण सरसों तेल की कीमत को लेकर उठ रहा सवाल वास्तव में केवल एक लीटर तेल की लागत का सवाल नहीं है। यह बाजार की पारदर्शिता, उपभोक्ता अधिकार और खाद्य सुरक्षा के व्यापक प्रश्न से जुड़ा है। यदि तीन किलोग्राम सरसों की कीमत 219 रुपये हो और उसके बाद पेराई, पैकिंग, श्रम, परिवहन तथा अन्य खर्च जुड़ते जाएं, तो उपभोक्ता के मन में कीमत को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। लेकिन इस गणना से यह निष्कर्ष निकालना भी उचित नहीं कि इससे कम कीमत पर बिकने वाला प्रत्येक तेल संदिग्ध है। बड़े उत्पादकों की खरीद क्षमता, आधुनिक तकनीक, उत्पादन का पैमाना और वितरण व्यवस्था उनकी लागत को अलग बना सकती है। इसी प्रकार खली जैसे उप-उत्पाद से मिलने वाली आय भी वास्तविक लागत को प्रभावित करती है। इसलिए जरूरत किसी एक ब्रांड या व्यापारी पर संदेह करने की नहीं, बल्कि पूरे बाजार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की है। उपभोक्ता को यह जानने का अधिकार है कि वह जो खाद्य तेल खरीद रहा है, वह निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। बाजार को यह भरोसा देना होगा कि कीमतों में अंतर के पीछे उचित आर्थिक कारण हैं और गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा रहा। संपादकीय निष्कर्ष यही है कि सस्ता हमेशा मिलावटी नहीं होता और महंगा हमेशा शुद्ध होने की गारंटी नहीं देता। असली कसौटी गुणवत्ता, प्रमाणित मानक, पारदर्शी जानकारी और उपभोक्ता का भरोसा है। सरसों तेल की कीमत पर बहस को आरोप-प्रत्यारोप से निकालकर तथ्य, लागत और गुणवत्ता की पारदर्शी चर्चा तक ले जाना ही उपभोक्ता और बाजार—दोनों के हित में होगा। आखिरकार सवाल केवल यह नहीं कि एक लीटर तेल कितने रुपये में बिक रहा है; बड़ा सवाल यह है कि उस कीमत के बदले उपभोक्ता को गुणवत्ता और सुरक्षा का कितना भरोसा मिल रहा है।

  • मोदी ने दी ₹35 हजार करोड़ की विकास सौगात

    भारतार्थ खबर अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com वडोदरा/मुंबई, 8 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात और महाराष्ट्र के दौरे के दौरान ₹35,000 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पण किया। परियोजनाओं में रेलवे, समर्पित माल ढुलाई गलियारा, राष्ट्रीय राजमार्ग, ऊर्जा, आवास और जलापूर्ति से जुड़े कार्य शामिल हैं। दौरे का प्रमुख आकर्षण पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे (WDFC) के तीन महत्वपूर्ण खंडों का राष्ट्र को समर्पण रहा। WDFC के 326 किलोमीटर के तीन खंड राष्ट्र को समर्पित वडोदरा में प्रधानमंत्री ने पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे के तीन प्रमुख खंडों का लोकार्पण किया। इनकी कुल लंबाई 326 रूट किलोमीटर है और इनके निर्माण पर ₹20,700 करोड़ से अधिक खर्च हुआ है। इनमें साणंद (उत्तर)-मकरपुरा, न्यू उंबरगांव-न्यू सफाले और न्यू सफाले-जेएनपीए के खंड शामिल हैं। इन खंडों के चालू होने से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (जेएनपीए) के साथ सीधी रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। इससे आयात-निर्यात माल की आवाजाही तेज करने, औद्योगिक केंद्रों और बंदरगाहों के बीच संपर्क बेहतर करने तथा लॉजिस्टिक्स लागत और परिवहन समय कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही मुंबई के रेल नेटवर्क पर माल ढुलाई का दबाव कम हो सकता है। रेलवे परियोजनाओं पर भी फोकस प्रधानमंत्री ने गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में रेल क्षमता बढ़ाने से जुड़ी करीब ₹9,700 करोड़ से अधिक की तीन परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इसके अलावा मालगाड़ी सेवाओं को हरी झंडी दिखाई गई। कार्यक्रम के दौरान जॉबट-टांडा रोड नई रेल लाइन को भी राष्ट्र को समर्पित किया गया। यह रेल संपर्क अलीराजपुर के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे क्षेत्र के लोगों को आवागमन के साथ व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहतर संपर्क मिलने की उम्मीद है। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को गति प्रधानमंत्री ने करीब ₹1,780 करोड़ की तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सड़क संपर्क मजबूत करना, यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना और महत्वपूर्ण मार्गों पर आवागमन की क्षमता बढ़ाना है। सड़क और रेल दोनों क्षेत्रों में निवेश का व्यापक उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ माल और यात्रियों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाना है। बेहतर परिवहन नेटवर्क से औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की संभावना है। 110 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना गुजरात में करीब ₹2,600 करोड़ की विभिन्न विकास परियोजनाओं का भी शिलान्यास और उद्घाटन किया गया। इनमें कड़ाना बांध पर 110 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना, वडोदरा रिंग रोड फेज-2 और अन्य शहरी विकास कार्य शामिल हैं। इसके अलावा आवास तथा जलापूर्ति से जुड़ी परियोजनाएं भी कार्यक्रम का हिस्सा रहीं। जलाशय आधारित फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं का महत्व इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि इनके माध्यम से उपलब्ध जल क्षेत्र का उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकता है। हालांकि किसी भी ऊर्जा परियोजना की वास्तविक उपयोगिता उसके उत्पादन, रखरखाव, पर्यावरणीय प्रभाव और दीर्घकालीन संचालन पर निर्भर करेगी। मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का उद्घाटन गुजरात के कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री मुंबई पहुंचे, जहां उन्होंने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 का उद्घाटन किया। यह आयोजन 8 से 11 सितंबर तक मुंबई में आयोजित हो रहा है। इस वर्ष इसका विषय “पोटेंशियल टू इम्पैक्ट: एजेंटिक एआई, टोकनाइजेशन, क्वांटम—ट्रस्टेड, कनेक्टेड, ग्लोबल सिस्टम्स फॉर इन्क्लूसिव फाइनेंस” है। फिनटेक फेस्ट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, टोकनाइजेशन, क्वांटम तकनीक, डिजिटल भुगतान और समावेशी वित्त जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है। आयोजन का उद्देश्य वित्तीय क्षेत्र, तकनीकी कंपनियों, नियामकों, निवेशकों और अन्य वैश्विक भागीदारों को एक मंच पर लाकर भविष्य की वित्तीय व्यवस्था पर विचार-विमर्श करना है। विकास परियोजनाओं की असली कसौटी क्रियान्वयन ₹35,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं निश्चित रूप से बड़े बुनियादी ढांचे के निवेश का संकेत देती हैं, लेकिन किसी भी परियोजना की वास्तविक सफलता केवल उसके उद्घाटन या शिलान्यास से निर्धारित नहीं होती। इसका मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि निर्धारित समय में काम पूरा होता है या नहीं, लागत और गुणवत्ता का संतुलन कितना बना रहता है तथा आम नागरिकों और अर्थव्यवस्था को उसका वास्तविक लाभ कब तक मिलता है। विशेष रूप से माल ढुलाई गलियारे से उद्योगों और बंदरगाहों के बीच संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है। यदि माल परिवहन का समय और लागत घटती है तो इसका लाभ निर्यातकों, आयातकों, विनिर्माण क्षेत्र और व्यापक आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंच सकता है। कनेक्टिविटी से विकास की उम्मीद रेल, सड़क और ऊर्जा क्षेत्र में एक साथ निवेश किसी भी क्षेत्र की आर्थिक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बेहतर रेल संपर्क से दूरदराज के क्षेत्रों को बाजार से जोड़ने में मदद मिल सकती है, जबकि मजबूत राजमार्ग नेटवर्क व्यापारिक गतिविधियों और यातायात को गति दे सकता है। फिर भी इन परियोजनाओं के साथ भूमि, पर्यावरण, पुनर्वास, स्थानीय यातायात और रखरखाव जैसे मुद्दों का संतुलित समाधान भी जरूरी है। विकास तभी व्यापक माना जाएगा जब उसका लाभ बड़े उद्योगों के साथ छोटे व्यापारियों, किसानों, श्रमिकों और सामान्य यात्रियों तक भी पहुंचे। प्रधानमंत्री के गुजरात-महाराष्ट्र दौरे में घोषित और समर्पित परियोजनाओं ने बुनियादी ढांचे तथा डिजिटल वित्त—दोनों क्षेत्रों को एक साथ रेखांकित किया है। अब इन परियोजनाओं की प्रभावशीलता उनके जमीनी क्रियान्वयन और नागरिकों तक पहुंचने वाले वास्तविक लाभ से तय होगी।

  • PG सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 10 सितंबर को सुनवाई

    भारतार्थ खबर अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 8 सितंबर 2026। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG इमारत ढहने से सात लोगों की मौत के बाद छात्रों के लिए संचालित पेइंग गेस्ट (PG), निजी हॉस्टल और छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद भवन सुरक्षा मानकों और उनके अनुपालन को लेकर व्यापक स्तर पर जांच की संभावना बनी है। PG और निजी हॉस्टलों के सुरक्षा ऑडिट की मांग सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त एमिकस क्यूरी ने दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास संचालित PG, निजी हॉस्टल और छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था का समयबद्ध ऑडिट कराने की सिफारिश की है। प्रस्तावित जांच में भवन के स्वीकृत नक्शे और वास्तविक निर्माण के बीच समानता, मंजिलों की संख्या, बेसमेंट का उपयोग, संरचनात्मक मजबूती, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था तथा आपातकालीन निकास जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच की जा सकती है। 10 सितंबर को अहम सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने सत्य निकेतन हादसे से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए संकेत दिया है कि इनका संबंध देशभर में भवन सुरक्षा से जुड़े व्यापक मामले से है। अदालत इस विषय पर 10 सितंबर को आगे सुनवाई करेगी। दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही को अपने समक्ष लेने के विकल्प पर भी विचार किए जाने की संभावना है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मांगी रिपोर्ट हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से इमारत के निर्माण और उसके उपयोग के लिए आवश्यक अनुमतियों की जांच करने को कहा है। यदि जांच में भवन नियमों का उल्लंघन अथवा किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। छात्रों की सुरक्षा पर उठे सवाल सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के आसपास का प्रमुख छात्र क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी PG और निजी हॉस्टलों में रहते हैं। हादसे के बाद यह सवाल प्रमुखता से सामने आया है कि छात्रों को आवास उपलब्ध कराने वाली इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा और अन्य आवश्यक मानकों की नियमित जांच कितनी प्रभावी ढंग से की जा रही है। भवन सुरक्षा से जुड़े प्रस्तावित परीक्षण में केवल इमारत की संरचनात्मक मजबूती ही नहीं, बल्कि अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास, बेसमेंट के उपयोग और स्वीकृत भवन योजना के अनुरूप निर्माण जैसे पहलुओं को भी शामिल किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। हादसे ने निगरानी व्यवस्था पर उठाया सवाल सत्य निकेतन की घटना ने भवन सुरक्षा नियमों के पालन और उनकी निगरानी की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। PG और निजी हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में संचालकों के साथ-साथ संबंधित स्थानीय निकायों और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अब 10 सितंबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर रहेगी। अदालत की आगे की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि भवन सुरक्षा के मुद्दे पर केवल दिल्ली तक सीमित कदम उठाए जाते हैं या देशभर में PG, निजी हॉस्टल और छात्र आवासों के लिए व्यापक सुरक्षा दिशा-निर्देशों पर भी विचार किया जाता है।

  • भारत ने पाकिस्तान को 7 विकेट से रौंदा, महिला एशिया कप में जीत की हैट्रिक

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) दुबई | 5 सितंबर 2026 महिला एशिया कप 2026 के बहुप्रतीक्षित भारत-पाकिस्तान मुकाबले में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को 7 विकेट से करारी शिकस्त दी। दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए ग्रुप-ए के मुकाबले में भारत की गेंदबाजों ने पाकिस्तान की पूरी टीम को महज 55 रन पर समेट दिया। इसके बाद भारतीय टीम ने 56 रन के लक्ष्य को केवल 8.4 ओवर में 3 विकेट खोकर हासिल कर लिया। इस जीत के साथ भारत ने टूर्नामेंट में लगातार तीसरी जीत दर्ज की और ग्रुप-ए में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। भारतीय स्पिनरों ने पाकिस्तान की बल्लेबाजी की कमर तोड़ी टॉस जीतकर पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया, लेकिन भारतीय गेंदबाजों के सामने उसकी बल्लेबाजी पूरी तरह दबाव में नजर आई। पाकिस्तान की पूरी टीम 18.1 ओवर में 55 रन पर ऑलआउट हो गई। यह पाकिस्तान महिला टीम का टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक का सबसे कम स्कोर भी बताया गया है। भारत की ओर से श्री चरणी और प्रेमा रावत ने तीन-तीन विकेट लेकर पाकिस्तान के बल्लेबाजी क्रम को बड़ा झटका दिया, जबकि दीप्ति शर्मा ने दो विकेट हासिल किए। भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत से ही रन बनाने के मौके सीमित रखे और लगातार विकेट निकालकर पाकिस्तान को बड़ा स्कोर बनाने से रोक दिया। पाकिस्तान की ओर से फातिमा सना ने किया संघर्ष पाकिस्तान की कप्तान फातिमा सना ने गेंदबाजी में अपनी टीम को वापसी दिलाने की कोशिश की। उन्होंने भारत की पारी में तीन विकेट हासिल किए, लेकिन 56 रन के छोटे लक्ष्य का बचाव करना पाकिस्तान के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ। भारत ने शुरुआती दौर में तीन विकेट गंवाए, लेकिन इसके बावजूद लक्ष्य बहुत छोटा होने के कारण टीम पर दबाव नहीं बढ़ा। भारतीय टीम ने 8.4 ओवर में लक्ष्य हासिल कर मुकाबला अपने नाम कर लिया। भारत की लगातार तीसरी जीत पाकिस्तान के खिलाफ जीत भारत की महिला एशिया कप 2026 में लगातार तीसरी जीत है। इससे पहले भारत ने थाईलैंड और हांगकांग के खिलाफ भी शानदार जीत दर्ज की थी। पाकिस्तान के खिलाफ मिली जीत के साथ भारतीय टीम ने ग्रुप-ए में अपनी मजबूत स्थिति कायम रखी और टूर्नामेंट में अपना विजय अभियान जारी रखा। मैच का परिणाम पाकिस्तान महिला टीम: 55 रन, 18.1 ओवर में ऑलआउटभारत महिला टीम: 56/3, 8.4 ओवरनतीजा: भारत ने पाकिस्तान को 7 विकेट से हरायाभारत की स्थिति: ग्रुप-ए में लगातार तीसरी जीत और शीर्ष स्थान पर मजबूत पकड़। भारतार्थ दृष्टिकोण भारत-पाकिस्तान का मुकाबला हमेशा क्रिकेट प्रशंसकों के लिए खास माना जाता है, लेकिन इस बार भारतीय महिला टीम ने मुकाबले को एकतरफा बना दिया। भारतीय गेंदबाजों ने पाकिस्तान को सिर्फ 55 रन पर रोककर अपनी गेंदबाजी की ताकत दिखाई और बल्लेबाजों ने छोटे लक्ष्य को आसानी से हासिल कर टीम को शानदार जीत दिलाई। इस जीत की खास बात यह रही कि भारतीय टीम ने दबाव वाले मुकाबले में भी अपने खेल पर नियंत्रण बनाए रखा। श्री चरणी, प्रेमा रावत और दीप्ति शर्मा की गेंदबाजी ने पाकिस्तान के बल्लेबाजी क्रम को लगातार परेशानी में रखा। भारत के लिए अब नजर टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण पर होगी। लगातार तीन जीत से टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है और एशिया कप में खिताब की दावेदारी भी मजबूत हुई है।

  • ‘हनुमान अंश’ की वैश्विक उड़ान

    भारतार्थ खबर अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026। भारतीय सिनेमा में इन दिनों फिल्म ‘हनुमान अंश’ अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रही है। सीमित बजट और बिना बड़े सितारों के बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर उल्लेखनीय प्रदर्शन के बाद अब अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचने की तैयारी शुरू कर दी है। फिल्म को 11 सितंबर 2026 से विदेशी सिनेमाघरों में प्रदर्शित किए जाने की योजना है। आध्यात्मिक संत नीम करोली बाबा, जिन्हें उनके अनुयायी महाराज जी के नाम से भी जानते हैं, के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरित इस फिल्म का लेखन और निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है। आस्था और आत्मिक परिवर्तन की कहानी ‘हनुमान अंश’ केवल एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व से प्रेरित कथा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आस्था, प्रेम, सेवा, करुणा और जीवन में आंतरिक परिवर्तन जैसे विषयों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म की कहानी डॉ. राम भोसले नामक पात्र के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है, जिसका जीवन संघर्षों और बदलावों से गुजरता है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में भूमिगत जीवन से जुड़ा यह पात्र आगे चलकर आध्यात्मिक मार्ग की ओर अग्रसर होता है। कथा में नीम करोली बाबा के मार्गदर्शन को उसके जीवन में परिवर्तन का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। धीमी शुरुआत, फिर तेज हुई कमाई 7 अगस्त को रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ की शुरुआत बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षाकृत धीमी रही। शुरुआती दिनों में फिल्म को सीमित दर्शक मिले और सिनेमाघरों में इसके शो भी कम संख्या में उपलब्ध थे। हालांकि, समय के साथ दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और मौखिक प्रचार ने फिल्म को नई गति दी। फिल्म की कहानी और आध्यात्मिक विषय से प्रभावित दर्शकों ने इसे व्यापक स्तर पर चर्चा में पहुंचाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चौथे सप्ताह तक फिल्म का भारतीय नेट बॉक्स ऑफिस कलेक्शन लगभग 73 करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया। करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म के लिए यह प्रदर्शन उल्लेखनीय माना जा रहा है। बड़ी फिल्मों के बीच बनाई अलग पहचान फिल्म की सफलता ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि दर्शक केवल बड़े सितारों और भारी प्रचार अभियान के आधार पर ही फिल्मों का चयन नहीं करते। प्रभावशाली विषय, भावनात्मक जुड़ाव और सशक्त कहानी भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिल्म की बढ़ती लोकप्रियता के साथ इसके प्रदर्शनों और दर्शकों की संख्या में भी वृद्धि देखने को मिली। 11 सितंबर से विदेशों में प्रदर्शन भारत में मिली सफलता के बाद अब ‘हनुमान अंश’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने की तैयारी की जा रही है। फिल्म 11 सितंबर 2026 से विदेशी सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। अंतरराष्ट्रीय वितरण के माध्यम से फिल्म को विदेशों में रहने वाले भारतीय दर्शकों के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विषयों में रुचि रखने वाले अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। नीम करोली बाबा का प्रभाव भारत तक सीमित नहीं रहा है और उनके अनुयायी विभिन्न देशों में मौजूद हैं। ऐसे में फिल्म की विदेशी रिलीज को निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। कहानी की सफलता का संदेश ‘हनुमान अंश’ की यात्रा भारतीय फिल्म उद्योग के लिए यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों में बनी फिल्म भी दर्शकों से मजबूत जुड़ाव स्थापित कर सकती है। फिल्म ने आध्यात्मिकता, सेवा और मानवीय मूल्यों जैसे विषयों को व्यावसायिक सिनेमा की चर्चा में स्थान दिलाने का प्रयास किया है। अब सबकी निगाहें फिल्म की अंतरराष्ट्रीय रिलीज पर टिकी हैं। भारत में मिली सफलता को यदि फिल्म विदेशी दर्शकों के बीच भी दोहरा पाती है, तो यह भारतीय आध्यात्मिक कथाओं को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम साबित हो सकती है।

  • बुमराह की फिटनेस पर बड़ा टेस्ट

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की फिटनेस आगामी अफगानिस्तान टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज से पहले चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। टीम प्रबंधन उनकी मैच फिटनेस को लेकर पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही अंतिम फैसला करना चाहता है। बुमराह के अलावा नितीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर और हर्षित राणा की फिटनेस का भी आकलन किया जा रहा है। चारों खिलाड़ियों को चिकित्सकीय रूप से फिट बताया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की चुनौती और मैच के दबाव को देखते हुए उन्हें अभ्यास सत्रों में मैच-सिमुलेशन परीक्षण से गुजरना होगा। जानकारी के अनुसार, खिलाड़ियों की फिटनेस और मैच-तैयारी का यह अहम परीक्षण 4 से 9 सितंबर के बीच किया जाएगा। इस दौरान उनकी शारीरिक क्षमता, कार्यभार सहने की स्थिति और प्रतिस्पर्धी परिस्थितियों में प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। अफगानिस्तान के खिलाफ भारत की तीन मैचों की टी20 सीरीज 13, 15 और 17 सितंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित है। टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर करेंगे। जसप्रीत बुमराह को टीम में शामिल किया गया है, हालांकि उनकी अंतिम उपलब्धता फिटनेस संबंधी मंजूरी पर निर्भर करेगी। बुमराह की फिटनेस भारतीय टीम के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि आने वाले समय में टीम को एशियाई खेलों सहित कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में हिस्सा लेना है। ऐसे में टीम प्रबंधन उनके कार्यभार और दीर्घकालिक फिटनेस को ध्यान में रखते हुए कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता। इस बीच प्रिंस यादव को संभावित बैकअप विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में बुमराह की फिटनेस रिपोर्ट भारतीय टीम की गेंदबाजी रणनीति और अफगानिस्तान सीरीज के लिए अंतिम तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अब क्रिकेट जगत की नजर बुमराह के फिटनेस परीक्षण पर टिकी है। टीम प्रबंधन के सामने चुनौती स्पष्ट है—स्टार तेज गेंदबाज की वापसी सुनिश्चित करने के साथ उनकी फिटनेस और भविष्य के महत्वपूर्ण मुकाबलों के बीच संतुलन बनाए रखना।

  • स्मृति मंधाना ने रचा इतिहास

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com दुबई, 5 सितंबर 2026। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक नया इतिहास रचते हुए अपने नाम बड़ी उपलब्धि दर्ज कराई है। महिला एशिया कप 2026 में हांगकांग चीन के खिलाफ मुकाबले के दौरान मंधाना ने पूर्व भारतीय कप्तान मिताली राज के सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। स्मृति मंधाना ने सभी प्रारूपों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 10,868 अंतरराष्ट्रीय रनों के आंकड़े को पार कर महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाली बल्लेबाज के रूप में नया कीर्तिमान स्थापित किया। भारतीय महिला क्रिकेट के लिए यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। मंधाना ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान निरंतर शानदार बल्लेबाजी करते हुए अनेक यादगार पारियां खेली हैं और विश्व क्रिकेट में भारतीय महिला टीम की मजबूत पहचान बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पूर्व कप्तान मिताली राज के लंबे समय से कायम रिकॉर्ड को पीछे छोड़ना स्मृति मंधाना के करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के निरंतर विकास और बढ़ती ताकत का भी प्रतीक है। स्मृति मंधाना की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद क्रिकेट जगत और प्रशंसकों में उत्साह का माहौल है। सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं। महिला क्रिकेट में लगातार नए मानदंड स्थापित कर रहीं स्मृति मंधाना की यह सफलता आने वाली पीढ़ी की युवा महिला क्रिकेटरों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े सपने देखने का उत्साह प्रदान करेगी।

  • अहिल्या उद्धार से धनुषभंग तक, मिथिला में गूंजा श्रीराम का पराक्रम

    छाया चित्र-किशोर दफ्तरी भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 5 सितंबर 2026। पैलेस ग्राउंड, गेट नंबर-9 पर 1 से 7 सितंबर तक आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास परम पूज्य श्री राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के बक्सर से मिथिला प्रस्थान, अहिल्या उद्धार, जनकपुर आगमन, श्रीराम-सीता के प्रथम दर्शन, सीता जी की माता पार्वती से प्रार्थना, शिवधनुष यज्ञ, धनुषभंग और सीता-राम विवाह की तैयारियों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान अहिल्या उद्धार का प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा। श्री राजन जी महाराज ने बताया कि महर्षि विश्वामित्र के साथ मिथिला जाते समय भगवान श्रीराम एक उजड़े स्थान पर पहुंचे। वहां शिला के रूप में पड़ी माता अहिल्या की कथा विश्वामित्र जी ने उन्हें सुनाई। भगवान श्रीराम की चरण-रज के स्पर्श से अहिल्या का उद्धार हुआ। महाराज जी ने इस प्रसंग से संदेश दिया कि मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में दोषारोपण करने के बजाय ईश्वर की इच्छा, अपने कर्म और धैर्य पर विश्वास रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रभु की भक्ति के लिए गृहस्थ जीवन का त्याग आवश्यक नहीं है। गृहस्थ आश्रम में रहते हुए भी व्यक्ति भगवान का स्मरण, सेवा और भजन कर सकता है। छाया चित्र-किशोर दफ्तरी मिथिला में हुआ श्रीराम-लक्ष्मण का भव्य स्वागत अहिल्या उद्धार के बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ मिथिला पहुंचे। भगवान के आगमन का समाचार मिलने पर राजा जनक स्वयं उनका स्वागत करने पहुंचे। श्रीराम और लक्ष्मण के दिव्य स्वरूप को देखकर राजा जनक भाव-विभोर हो उठे। विश्वामित्र जी ने उन्हें दोनों राजकुमारों का परिचय देते हुए बताया कि वे अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र हैं। गुरु की आज्ञा लेकर श्रीराम और लक्ष्मण जनकपुर भ्रमण के लिए निकले। दोनों राजकुमारों के नगर में आने का समाचार फैलते ही उन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में नर-नारी उमड़ पड़े। कथा पंडाल में इस प्रसंग के दौरान भक्तिमय भजन “श्री दशरथ राजकुमार, नजर तोहे लग जाएगी” की प्रस्तुति ने वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। श्रीराम के प्रथम दर्शन से भाव-विभोर हुईं सीता जनकपुर में भगवान श्रीराम के दर्शन से माता सीता भी भाव-विभोर हो उठीं। उन्होंने माता पार्वती से अपने मन की मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की। इस प्रसंग पर भक्तिमय स्तुति-गान से कथा पंडाल भक्तिरस में डूब गया। महाराज जी ने श्रीराम और सीता के प्रथम मिलन के प्रसंग के माध्यम से श्रद्धा, विश्वास और ईश्वर के प्रति समर्पण का महत्व बताया। शिवधनुष के सामने विफल हुए अनेक राजा छाया चित्र-किशोर दफ्तरी इसके बाद कथा शिवधनुष यज्ञ के प्रसंग पर पहुंची। राजा जनक ने घोषणा की कि जो भगवान शिव के पिनाक धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर उसका भंग करेगा, वही माता सीता का वरण करेगा। सभा में मौजूद अनेक राजा-महाराजाओं ने धनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन कोई उसे हिला तक नहीं सका। सभी राजाओं की असफलता के बाद राजा जनक ने भावुक होकर कहा कि क्या धरती वीरों से खाली हो गई है। यह सुनकर लक्ष्मण जी क्रोधित हो उठे। उन्होंने रघुवंश की वीरता का स्मरण कराते हुए राजा जनक के कथन पर आपत्ति जताई। भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण जी को शांत करते हुए कहा कि वे यहां धनुष देखने आए हैं, उसे तोड़ने नहीं। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र ने श्रीराम को धनुष उठाने और उसका भंग करने की आज्ञा दी। गुरु की आज्ञा पर श्रीराम ने किया शिवधनुष भंग महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा मिलते ही भगवान श्रीराम धनुष की ओर बढ़े। सभा में उपस्थित सभी लोगों की निगाहें श्रीराम पर टिक गईं। माता सीता मन ही मन प्रभु से प्रार्थना कर रही थीं, जबकि माता सुनयना भी इस क्षण को लेकर चिंतित थीं। भगवान श्रीराम ने गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए शिवधनुष का भंग कर दिया। धनुष टूटते ही पूरी सभा जयघोष से गूंज उठी। इस प्रसंग ने कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। धनुषभंग के बाद मिथिला में छाया विवाह का उत्सव शिवधनुष भंग के साथ माता सीता और भगवान श्रीराम के विवाह का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसके बाद अयोध्या से राजा दशरथ अपने पुत्रों भरत और शत्रुघ्न सहित मिथिला पहुंचे। दोनों राजपरिवारों में विवाह की तैयारियां शुरू हुईं और मिथिला नगरी उत्सव के रंग में रंग गई। विवाह प्रसंग के दौरान राजा जनक द्वारा भगवान श्रीराम के चरण पखारने का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा पंडाल “सियावर रामचंद्र की जय” और “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंजता रहा। छाया चित्र-किशोर दफ्तरी कथा से मिला मर्यादा और समर्पण का संदेश श्री राजन जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र केवल कथा सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन में अपनाने की प्रेरणा है। अहिल्या प्रसंग क्षमा और स्वीकार्यता का संदेश देता है, श्रीराम-लक्ष्मण का आचरण गुरु आज्ञा के पालन की प्रेरणा देता है, सीता जी की प्रार्थना श्रद्धा का प्रतीक है और शिवधनुष भंग पुरुषार्थ तथा मर्यादा का संदेश देता है। पैलेस ग्राउंड के गेट नंबर-9 पर चल रही श्रीराम कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। 1 सितंबर से शुरू हुई यह कथा 7 सितंबर 2026 तक चलेगी। आयोजन व्यवस्था में इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका कार्यक्रम के सफल आयोजन की व्यवस्था में शैलेश मिश्रा, रोहित उपाध्याय, धीरज राज, आदेश, गौरी मिश्रा, प्रवीण पांडेय, अंजनी ओझा, आशुतोष ओझा, गोपाल ओझा, अंकित उपाध्याय और नीतीश मिश्रा सहित आयोजन समिति के सदस्यों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। पांचवें दिन आयोजित रामकथा में माननीय श्री सिरीसानंद, माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री आशीष राय, समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव श्री अखिलेश चौबे तथा कर्नाटक के एनडीआरएफ प्रमुख मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

  • पुस्तक समीक्षा -"मुक्त परिंदे" मुक्तक संग्रह

    रचनाकार - श्री रामदरश पांडेय 'विश्वासी' समीक्षक- लालबहादुर चौरसिया 'लाल' "मुक्त परिंदे" पुस्तक जनपद अंबेडकरनगर के ख्यातिलब्ध रचनाकार, हास्य के पुरोधा कवि श्री रामदरस पांडेय 'विश्वासी' जी की सद्य:प्रकाशित कृति है। यह एक पुस्तक ही नहीं, वरन एक ऐसी पुष्प वाटिका है जिसमें विविध रंग व विविध गंध के पुष्प अपनी आभा से साहित्य उपवन को आह्लादित कर रहे हैं। पुस्तक "मुक्त परिंदे" मुक्तकों का एक पिटारा है। एक सौ बारह पृष्ठों में फैली,पूरे के पूरे पांच सौ सात उत्कृष्ट मुक्तकों से लबरेज यह पुस्तक विशिष्ट है। पुस्तक का नाम करण ही पुस्तक की प्रासंगिकता को व्याख्यायित करने में सक्षम है। मुक्तक मूल रूप से चार पंक्तियों की एक सूक्ष्म कविता होती है। इन्हीं चार पंक्तियों में कवि अपनी पूरी बात कहने का सफल प्रयास करता है। श्री विश्वासी जी ने भी वही किया है। वो भी पूरा सलीके के साथ। विश्वासी जी मूलतः हास्य कवि हैं। किंतु इनकी "मुक्त परिंदे" पुस्तक में हास्य का बिल्कुल समावेश नहीं है। जीवन के विभिन्न आयामों को छूने का भरपूर सार्थक प्रयास किया गया है। श्री विश्वासी जी ने समाज में जो कुछ देखा उसी को अपने मुक्तकों में उतारा वो भी बिल्कुल साफगोई के साथ। एक बानगी के तौर पर यह मुक्तक बिल्कुल गणित के सूत्र की तरह शत-प्रतिशत सत्यता के साथ आज के स्वार्थी रिश्तो को परिभाषित करता हुआ है- मुसीबत में अपने लोग नाता तोड़ लेते हैं, जो दिल के पास होते हैं वहीं मुख मोड़ लेते हैं, गजब इंसान की फितरत उन्हें गैरों से क्या लेना, परिंदे पालतू आंगन में आना छोड़ देते हैं।। वास्तव में जब एक कलमकार समाज की पीड़ा को अपनी कलम से कागज पर उकेरता है तो अपने साहित्यकार होने का पूरा का पूरा फर्ज अदा कर देता है। जब कविता में समाज को एक दिशा देने की बात कही गई हो। एक ऐसे दीप को प्रज्वलित करने की बात कही गई हो जिसके प्रकाश में संपूर्ण मानवता प्रकाशमान होती हो। तब समझिए कि कवि ने कवि धर्म का पालन निश्चित रूप से ईमानदारी के साथ किया है। वही बात विश्वासी जी के इस मुक्तक में देखें- मस्जिद की बात कर न शिवालों की बात कर, कब क्या कहां हुआ न घोटालों की बात कर, जीवन थमा है रोशनी.......लाने की सोच ले, सब भूल करके सिर्फ निवालों की बात कर।। आज के इस भौतिक युग में कवि की निगाहें मानवीय संबंधों पर टिकी हैं। कवि उस समय अत्यंत निराश होता है जब एक बूढ़ी मां के चार चार बेटे उसे संभालने से इंकार कर देते हैं तो विश्वास ही जी की कलम बोल पड़ती हैं- जीवन में दुआ मां की खाली नहीं जाती, यह बात भी भगवान से टाली नहीं जाती, अकेले एक मां ही चार बेटों को पाल लेती है, उन्हीं चारों से एक मां कभी पाली नहीं जाती।। श्री विश्वासी जी के मुक्तक शब्द संधान, भाव, बिंब, अभिव्यंजना से परिपूर्ण है। कहीं प्रेम की पराकाष्ठा है तो कहीं विरह का महासैलाब भी है। एक विरहिणी के व्यथा का चित्रण प्रस्तुत करता हुआ यह मुक्तक देखें- चांद ढलता रहा....... रात रोती रही, चंद्रिका मोतियों को कि पिरोती रही, मेरे अरमां मचलते .......रहे रात भर, आंसुओं से विरह को मैं धोती रही।। रचनाकार श्री विश्वासी जी ने हमेशा सदाचार का पाठपढ़ा व पढ़ाया है। समाज को एक दिशा देने का प्रयास किया है,जो कि एक कवि का मूल धर्म होता है। कविता हमेशा समाज की रक्षा करती है। विश्वासी जी ने विभिन्न तरीकों से मानव को महामानव बनाने का भरपूर प्रयास किया है। प्रतीकों के माध्यम से एक सशक्त समाज का खाका खींचने का जो प्रयास है उसका एक उदाहरण देखें- अवगुणों में भी गुणों की लहर डोलती, काली कोयल है कितना मधुर बोलती, बन सको तो मधुर बांसुरी तुम बनो, छिद्र रहकर भी सबका हृदय खोलती।। जीवन के हर पहलुओं को स्पष्ट करते हुए- चांद, तारे, नदी ,पर्वत, झरना, बाग, बन,फूल, कोयल ,दीपक ,उजाला, संबंध, मर्यादा, प्रेम ,विरह, बेटी,जैसे विभिन्न बिंदुओं को स्पर्श करने के साथ साथ कवि श्री विश्वासी जी ने अपना ध्यान गांव की तरफ भी आकृष्ट किया है। जिस गांव में अभाव में भी भाव है , बदहाली में भी खुशहाली है, प्रेम है ,भाईचारे एवं त्याग की पराकाष्ठा है। गांव की स्मृतियों की तरफ पाठकों का ध्यान आकर्षित करती हुए श्री विश्वासी जी की यह पंक्तियां देखें- "कभी खेती, कभी खलिहान, गलियां याद आती हैं।" रचनाकार श्री विश्वासी जी के मुक्तकों में कहीं-कहीं अध्यात्म का भी दर्शन हो जाता है। उनका पूरा का पूरा मानना है कि एक ऐसी परमसत्ता विद्यमान है जो पूरी सृष्टि का संचालन करती है। मानव माया, मोह, द्वेष, राग में भटक रहा है। विश्वासी जी ने आज के इस अंतर्जाल के युग में नौनिहालों के बिगड़ती आदतों से क्षुब्द होकर इस मुक्तक में कहते हैं- लैपटॉप टेबलेट ने.........नंगा बना दिया, बिगड़ा समाज जबसे... धंधा बना दिया, मेहनत चरित्र संस्कार .....सब दफा हुए, बच्चों को मोबाइल ने लफंगा बना दिया।। "मुक्त परिंदे" रूपी एक बृहद माला में पांच सौ सात मणियों के समान मुक्तकों को पिरो कर कवि श्री रामदरस पांडेय विश्वासी जी ने जो बेहतरीन लेखन शैली का परिचय दिया है वह प्रशंसनीय है। यदा-कदा टंकण त्रुटियां जरूर हैं। किंतु मैं आश्वस्त हूं कि आज का पाठक टंकण त्रुटियों को सुधार कर पढ़ने में दक्ष है। श्री रामदरस पांडे विश्वासी जी की यह पुस्तक "मुक्त परिंदे" काल के साथ लंबी यात्रा करने में सक्षम हो। यही मेरी शुभकामना हैं। -लालबहादुर चौरसिया 'लाल' मो. 9452088890 (महामंत्री- विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई)

  • राम जन्मोत्सव से राममय हुआ कथा पंडाल

    भारतार्थ खबर अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 4 सितंबर 2026। पैलेस ग्राउंड के गेट नंबर 9 पर 1 से 7 सितंबर तक आयोजित भव्य श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा पंडाल भक्ति और उल्लास के रंग में सराबोर नजर आया। परम पूज्य श्री राजन जी महाराज ने श्रीरामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव, नामकरण संस्कार, बाल लीलाओं और महर्षि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान महाराज जी ने भगवान श्रीराम के अवतरण का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि राजा दशरथ को जब पुत्र जन्म का शुभ समाचार मिला तो उनका हृदय परमानंद से भर उठा। दासी ने महाराज को बधाई देते हुए पुत्र जन्म की सूचना दी और यह समाचार सुनते ही राजा दशरथ आनंद में डूब गए। उन्होंने बताया कि मनु महाराज और माता शतरूपा ने भगवान की प्राप्ति के लिए 21 हजार वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने वरदान दिया था कि त्रेता युग में वे स्वयं उनके घर पुत्र रूप में अवतरित होंगे। इसी भाव से राजा दशरथ आनंद-विभोर होकर कहते हैं कि जिन भगवान का नाम लेने मात्र से समस्त मंगल हो जाता है, आज उन्हीं भगवान ने मेरे घर पुत्र रूप में जन्म लिया है। इसी बीच राजा दशरथ को यह शुभ समाचार भी मिला कि माता कैकेयी को एक तथा माता सुमित्रा को दो पुत्रों की प्राप्ति हुई है। चारों राजकुमारों के जन्म का समाचार मिलते ही पूरी अयोध्या नगरी उत्सव में डूब गई। नर-नारी हर्षित हो उठे और चारों ओर आनंद का वातावरण छा गया। सोहर गीत पर झूम उठा कथा पंडाल भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का वर्णन करते हुए श्री राजन जी महाराज ने अपना परिचित सोहर गीत प्रस्तुत किया। बधाई गीत की मधुर धुन गूंजते ही पूरा कथा पंडाल भक्तिरस में झूम उठा। श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के गगनभेदी जयघोष के साथ जन्मोत्सव का उल्लास मनाया। महाराज जी ने कहा कि प्रभु श्रीराम के जन्म के बाद एक महीने तक अयोध्या में मानो दिन ही दिन रहा और लोगों को रात होने का भान तक नहीं हुआ। इसका भावार्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्यावासी भगवान के जन्मोत्सव के आनंद में इतने डूब गए थे कि उन्हें समय का ध्यान ही नहीं रहा। उन्होंने बताया कि इस दिव्य आनंद का अनुभव करने के लिए भगवान शिव भी काकभुशुंडी जी के साथ वहां पहुंचे थे। राजा दशरथ अपने आनंद को सभी के बीच बांट रहे थे और जिसने जो इच्छा व्यक्त की, उसे हाथी, घोड़े, सोना, चांदी और अन्य वस्तुएं दान स्वरूप प्रदान की जा रही थीं। चारों राजकुमारों को आशीर्वाद देते हुए लोगों ने उनके चिरंजीवी होने की कामना की। इस प्रसंग पर महाराज जी ने जीवन का संदेश देते हुए कहा कि जीवन का वास्तविक आनंद केवल पाने में नहीं, बल्कि दूसरों को देने और खुशियां बांटने में है। राजा दशरथ ने अपने जीवन से इसका आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया। चारों भाइयों के नामों का आध्यात्मिक महत्व इसके बाद कथा में नामकरण संस्कार का प्रसंग आया। राजा दशरथ ने गुरु महाराज से चारों राजकुमारों का नामकरण करने का आग्रह किया। कथा के माध्यम से चारों भाइयों के नामों का आध्यात्मिक महत्व समझाया गया। महाराज जी ने कहा कि जो पूरे जगत को विश्राम प्रदान करे, वही राम है। भरत नाम का भाव बताते हुए कहा गया कि जो सभी के हृदय को राम प्रेम से भर दें, वे भरत हैं। लक्ष्मण नाम के भावार्थ पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि मनुष्य के भीतर काम, क्रोध, मोह, माया और लोभ जैसे अनेक शत्रु होते हैं। जिनके स्मरण से इन विकारों का नाश हो और जिनमें दिव्य एवं सुंदर लक्षण विद्यमान हों, वे लक्ष्मण हैं। महाराज जी ने कहा कि चारों राजकुमार चारों वेदों के समान हैं और उनका जीवन मानव समाज को धर्म, प्रेम, त्याग और मर्यादा का संदेश देता है। माता कौशल्या को हुए विराट स्वरूप के दर्शन कथा के दौरान माता कौशल्या और भगवान श्रीराम के दिव्य प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। प्रसंग के अनुसार माता कौशल्या ने अपने कुलदेव श्री रंगनाथ जी को भोग लगाया था। बाद में उन्होंने देखा कि जिस प्रभु को उन्होंने पुत्र रूप में जन्म दिया है, वही भगवान भोग ग्रहण कर रहे हैं। माता कौशल्या को भगवान के शरीर में चंद्रमा, सूर्य, ब्रह्मा सहित समस्त देवताओं और संपूर्ण सृष्टि के दर्शन हुए। यह अद्भुत दृश्य देखकर वे विस्मित और भयभीत हो गईं। माता की भावना को समझकर भगवान ने अपना विराट स्वरूप समेट लिया और पुनः छोटे बालक के रूप में प्रकट हुए। माता कौशल्या ने भगवान से कहा कि आप तो स्वयं जगदीश्वर हैं। इस पर बाल रूप में भगवान ने माता के प्रति अपना वात्सल्य भाव प्रकट करते हुए स्वयं को उनका पुत्र बताया। महाराज जी ने कहा कि भगवान ने यह दिव्य स्वरूप केवल माता कौशल्या को दिखाकर उन्हें अपनी माया से मुक्त किया। बाल लीलाओं में झलका मातृ वात्सल्य महाराज जी ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए माता कौशल्या के वात्सल्य भाव को भी जीवंत किया। माता कौशल्या बालक राम को बाहर खेलने जाने से रोकते हुए उनकी सुरक्षा और नजर लगने की चिंता करती हैं तथा उन्हें भाइयों के साथ आंगन में खेलने के लिए कहती हैं। इस प्रसंग के माध्यम से महाराज जी ने कहा कि भगवान स्वयं परमात्मा होते हुए भी माता के लिए एक सामान्य बालक बनकर उनके वात्सल्य प्रेम का आनंद लेते हैं। विश्वामित्र के आगमन से कथा में नया प्रसंग कथा आगे बढ़ते हुए महर्षि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन के प्रसंग पर पहुंची। राजा दशरथ ने उनका अत्यंत सम्मान किया और विधि-विधान से उनका स्वागत किया। इसके बाद राजा दशरथ ने अपने चारों पुत्रों को महर्षि विश्वामित्र से मिलवाया। कथा के अनुसार जैसे ही महर्षि विश्वामित्र की दृष्टि बालक श्रीराम पर पड़ी, वे उनके दिव्य स्वरूप को देखकर भाव-विभोर हो उठे। इसी भावपूर्ण प्रसंग पर कथा पंडाल में भजन गूंज उठा— “तेरी मंद-मंद मुसकनिया पे बलिहार राघव जी...” भजन और कथा के अद्भुत संगम ने पूरे वातावरण को राममय बना दिया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में श्री शैलेश मिश्रा, श्री रोहित उपाध्याय, श्री धीरज राज, श्री आदेश, श्रीमती गौरी मिश्रा, श्री प्रवीण पांडेय, श्री लाल बाबू पांडेय, जे.बी. सिंह और राजेश सिकरवार सहित आयोजन समिति के सदस्यों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री शैलेश मिश्रा ने श्रीराम कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम का चरित्र सत्य, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और त्याग का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को इन महान आदर्शों से जोड़कर उन्हें दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से परिवार सहित कथा में पहुंचकर पुण्य लाभ लेने की अपील की। ट्रस्ट के सचिव श्री रोहित उपाध्याय ने बताया कि कथा में श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी लगातार बनी हुई है। उन्होंने कहा कि दूसरे दिन लगभग 2,000 श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया था, जिसे आयोजन की सफलता और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक बताया गया। आयोजन समिति के अनुसार आगामी कथा सत्रों में धनुष भंग और श्रीसीताराम विवाह सहित श्रीरामचरितमानस के अन्य प्रमुख प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।

  • पोस्टर लगाकर श्रीमद्भागवत कथा का प्रचार

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 04 सितंबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत कथा के प्रचार-प्रसार की तैयारियां शुरू हो गई हैं। विश्व शांति सेवा समिति, बेंगलुरु के कार्यकर्ताओं ने शहर में कथा के पोस्टर लगाकर श्रद्धालुओं तक आगामी धार्मिक आयोजन की जानकारी पहुंचाने का अभियान चलाया। आयोजकों द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, परम पूज्य शांतिदूत ‘धर्मरत्न’ श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 02 से 08 जनवरी 2027 तक किया जाएगा। कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित होने की जानकारी दी गई है। यह धार्मिक आयोजन प्रिंसेस श्राइन, गेट नंबर-9, पैलेस ग्राउंड, बेंगलुरु में प्रस्तावित है। आयोजन का संयोजन विश्व शांति सेवा समिति, बेंगलुरु द्वारा किया जा रहा है। कथा के प्रचार अभियान में विश्व शांति सेवा समिति, बेंगलुरु एवं उनके सहयोगी साथी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों पर पोस्टर लगाकर श्रद्धालुओं से कथा आयोजन में शामिल होने का आह्वान किया। आयोजकों के अनुसार, श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से भक्ति, आध्यात्मिक ज्ञान, संस्कार और भारतीय संस्कृति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। आगामी कथा आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है। समाचार प्रेषक रूपसिंह बेंगलुरु।

  • कन्हैया जन्मे, भक्ति में डूबा देश

    भारतार्थ खबर अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 4 सितंबर 2026। “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की…” के जयघोष के साथ शुक्रवार को देशभर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिरों से लेकर घरों तक धार्मिक वातावरण देखने को मिला और श्रद्धालु अपने आराध्य श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन नजर आए। देश के विभिन्न राज्यों में मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया। विशेष पूजा-अर्चना, आरती, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की और मंदिरों में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे। मथुरा-वृंदावन में विशेष उत्साह भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा और उनकी लीलास्थली वृंदावन में जन्माष्टमी का उत्साह विशेष रूप से देखने को मिला। मंदिरों में भगवान के बाल स्वरूप का विशेष श्रृंगार किया गया और जन्मोत्सव को लेकर धार्मिक आयोजन किए गए। श्रद्धालु मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के पावन क्षण की प्रतीक्षा करते रहे। घरों और मंदिरों में आकर्षक झांकियां सजाई गईं तथा बाल गोपाल के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की गई। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में‌ कृष्णा बना प्रभात हर्ष चौधरी, ( सुपुत्र - रीना कुमारी सागर चौधरी),(भतीजा पुत्र - उर्मिला कुमारी गणेश चौधरी), (सुपौत्र - भंवरी देवी धन्नाराम चौधरी) एवं समस्त गैया परिवार। भक्ति में डूबा देश जन्माष्टमी के अवसर पर देश के अनेक हिस्सों में भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी लीलाओं का स्मरण करते हुए धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। जैसे-जैसे मध्यरात्रि का समय नजदीक आया, मंदिरों में श्रद्धालुओं की उत्सुकता बढ़ती गई। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय मंदिरों में घंटियों की ध्वनि, शंखनाद और जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। धर्म और कर्म का संदेश देता है पर्व जन्माष्टमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर भी है। श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, सत्य, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भगवद्गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने मानव जीवन में कर्म और कर्तव्य के महत्व का संदेश दिया। कठिन परिस्थितियों में धैर्य और विवेक बनाए रखने की उनकी शिक्षा आज भी समाज के लिए प्रासंगिक मानी जाती है। जन्माष्टमी के पावन पर्व पर देशभर में श्रद्धालुओं ने सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। हर ओर गूंजता रहा—“जय श्रीकृष्ण… जय कन्हैया लाल की!”

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