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कन्हैया जन्मे, भक्ति में डूबा देश

  • लेखक की तस्वीर: Ashok kumar Singh
    Ashok kumar Singh
  • 3 घंटे पहले
  • 2 मिनट पठन
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का रंगीन पोस्टर: बाल कृष्ण बांसुरी संग, गाय, मंदिर उत्सव, मथुरा-मुंबई-वृंदावन और हिंदी नारे

भारतार्थ खबर अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 4 सितंबर 2026। “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की…” के जयघोष के साथ शुक्रवार को देशभर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिरों से लेकर घरों तक धार्मिक वातावरण देखने को मिला और श्रद्धालु अपने आराध्य श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन नजर आए।


देश के विभिन्न राज्यों में मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया। विशेष पूजा-अर्चना, आरती, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की और मंदिरों में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे।


मथुरा-वृंदावन में विशेष उत्साह


भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा और उनकी लीलास्थली वृंदावन में जन्माष्टमी का उत्साह विशेष रूप से देखने को मिला। मंदिरों में भगवान के बाल स्वरूप का विशेष श्रृंगार किया गया और जन्मोत्सव को लेकर धार्मिक आयोजन किए गए।

श्रद्धालु मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के पावन क्षण की प्रतीक्षा करते रहे। घरों और मंदिरों में आकर्षक झांकियां सजाई गईं तथा बाल गोपाल के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की गई।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में‌ कृष्णा बना प्रभात हर्ष चौधरी, ( सुपुत्र - रीना कुमारी सागर चौधरी),(भतीजा पुत्र - उर्मिला कुमारी गणेश चौधरी), (सुपौत्र - भंवरी देवी धन्नाराम चौधरी) एवं समस्त गैया परिवार।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में‌ कृष्णा बना प्रभात हर्ष चौधरी, ( सुपुत्र - रीना कुमारी सागर चौधरी),(भतीजा पुत्र - उर्मिला कुमारी गणेश चौधरी), (सुपौत्र - भंवरी देवी धन्नाराम चौधरी) एवं समस्त गैया परिवार।

भक्ति में डूबा देश


जन्माष्टमी के अवसर पर देश के अनेक हिस्सों में भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी लीलाओं का स्मरण करते हुए धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।

जैसे-जैसे मध्यरात्रि का समय नजदीक आया, मंदिरों में श्रद्धालुओं की उत्सुकता बढ़ती गई। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय मंदिरों में घंटियों की ध्वनि, शंखनाद और जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।


धर्म और कर्म का संदेश देता है पर्व


जन्माष्टमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर भी है। श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, सत्य, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

भगवद्गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने मानव जीवन में कर्म और कर्तव्य के महत्व का संदेश दिया। कठिन परिस्थितियों में धैर्य और विवेक बनाए रखने की उनकी शिक्षा आज भी समाज के लिए प्रासंगिक मानी जाती है।


जन्माष्टमी के पावन पर्व पर देशभर में श्रद्धालुओं ने सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।


हर ओर गूंजता रहा—“जय श्रीकृष्ण… जय कन्हैया लाल की!”

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