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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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  • SIR विवाद पर डीके शिवकुमार का हमला, CEC के इस्तीफे और नए सिरे से पुनरीक्षण की मांग

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 26 सितंबर 2026। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) की ओर से आयोजित विरोध प्रदर्शन में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए SIR प्रक्रिया को रद्द कर नए सिरे से पुनरीक्षण कराने की मांग रखी। उनकी ये मांगें जारी राजनीतिक विवाद के बीच सामने आई हैं। निर्वाचन आयोग पर लगाए गंभीर आरोप सभा को संबोधित करते हुए शिवकुमार ने निर्वाचन आयोग पर पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने के आरोप लगाए। उन्होंने आयोग को भाजपा के प्रति पक्षपाती बताते हुए दावा किया कि गरीबों और सरकार की आलोचना करने वाले मतदाताओं के नाम प्रभावित किए जा रहे हैं। ये आरोप मुख्यमंत्री ने राजनीतिक मंच से लगाए हैं और इन्हें उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपति से निर्वाचन आयोग के संबंध में हस्तक्षेप करने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई करने तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मामलों की समीक्षा की मांग की। शिवकुमार ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर संसद में चर्चा करानी चाहिए। SIR को रद्द कर नए सिरे से प्रक्रिया की मांग मुख्यमंत्री ने कर्नाटक में चल रही SIR प्रक्रिया को रद्द कर नए सिरे से पुनरीक्षण कराने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए चुनावी आंकड़ों की व्यापक समीक्षा और पारदर्शी प्रक्रिया जरूरी है। इसी तरह की मांग उन्होंने इससे पहले भी उठाई थी। कर्नाटक में SIR के तहत 30 जून 2026 से घर-घर मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। उस समय राज्य में करीब 5.54 करोड़ मतदाता दर्ज थे। मसौदा मतदाता सूची में 4.46 करोड़ मतदाता 24 अगस्त को जारी मसौदा मतदाता सूची में कर्नाटक में 4,46,80,151 मतदाता दर्ज किए गए। इससे पहले 16 जून को मतदाता सूची में 5,54,32,314 मतदाता थे। निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान 1.07 करोड़ से अधिक मतदाताओं को Absent, Shifted, Dead, Duplicate और Others (ASDDO) श्रेणी में रखा गया था। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार ASDDO श्रेणी में शामिल किया जाना अपने आप में मतदाता का स्थायी रूप से नाम हटना नहीं है। संबंधित मतदाताओं के सत्यापन और दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया के प्रावधान मौजूद हैं। बेंगलुरु के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल शिवकुमार ने बेंगलुरु और राज्य के विभिन्न हिस्सों में मतदाता संख्या में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बेंगलुरु के कुछ क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम SIR प्रक्रिया के दौरान प्रभावित हुए हैं और इस संबंध में स्पष्ट जवाबदेही तय होनी चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार बेंगलुरु में करीब 46.88 लाख मतदाता ASDDO श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने इसी आधार पर विस्तृत पुनर्सत्यापन की मांग की है। गांव स्तर तक आंदोलन ले जाने की घोषणा शिवकुमार ने कहा कि SIR को लेकर कांग्रेस की राजनीतिक मुहिम को गांव स्तर तक ले जाया जाएगा। उन्होंने पार्टी के नेताओं और बूथ स्तर के पदाधिकारियों से मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी तैयारियां कर रही है और कांग्रेस एक पारदर्शी चुनाव प्रणाली की मांग को आगे बढ़ाएगी। चुनावी प्रक्रिया पर बढ़ी राजनीतिक बहस SIR को लेकर कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और निर्वाचन आयोग के बीच राजनीतिक एवं सार्वजनिक बहस तेज हुई है। कांग्रेस नेताओं की ओर से प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि निर्वाचन अधिकारियों की ओर से SIR को मतदाता सूची के सत्यापन और शुद्धिकरण की प्रक्रिया बताया गया है। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक मतदाता सेवाओं में SIR-2026 से संबंधित मतदाता सूची और नाम की जांच की सुविधा भी उपलब्ध है। फ्रीडम पार्क में आयोजित प्रदर्शन में मुख्यमंत्री शिवकुमार के साथ कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में SIR के खिलाफ राजनीतिक अभियान को आगे बढ़ाने तथा मतदाता सूची में पारदर्शिता की मांग को प्रमुखता से उठाया गया।

  • बेंगलुरु में किदवई अस्पताल के पास मालवाहक वाहन दुर्घटनाग्रस्त, यातायात प्रभावित

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 26 सितंबर 2026। बेंगलुरु में किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी के सामने लक्कासंद्रा के पास शनिवार को एक मालवाहक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद सड़क पर यातायात प्रभावित हुआ और कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही बाधित रही। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मालवाहक वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण सड़क पर यातायात का दबाव बढ़ गया। दुर्घटना की सूचना के बाद संबंधित अधिकारियों और यातायात पुलिस की ओर से स्थिति को सामान्य करने के प्रयास किए गए। घटना के कारण अस्पताल की ओर आने-जाने वाले मार्ग पर भी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। व्यस्त क्षेत्र होने के कारण दुर्घटनाग्रस्त वाहन को हटाने और यातायात को सुचारु करने की कार्रवाई महत्वपूर्ण रही। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में दुर्घटना के कारण और किसी व्यक्ति के घायल होने अथवा अन्य नुकसान की विस्तृत पुष्टि नहीं हुई है। घटना से जुड़े आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। वाहन चालकों से अपील की गई कि वे दुर्घटना प्रभावित मार्ग पर सावधानी से वाहन चलाएं और यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

  • यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 का आगाज, 85 देशों के खरीदारों से जुड़ेंगे उत्तर प्रदेश के कारोबारी

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) ग्रेटर नोएडा | 25 सितंबर 2026 उत्तर प्रदेश के उद्योग, व्यापार और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 का चौथा संस्करण आज ग्रेटर नोएडा में शुरू हुआ। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित इस पांच दिवसीय आयोजन का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। कार्यक्रम 25 से 29 सितंबर तक चलेगा। इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के उद्योगों, एमएसएमई, निर्यातकों, कारीगरों, स्टार्टअप और उद्यमियों को देश-विदेश के खरीदारों और कारोबारी प्रतिनिधियों के सामने अपने उत्पाद एवं सेवाएं प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है। आयोजन में 2,400 से अधिक प्रदर्शकों और 550 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के शामिल होने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय खरीदार करीब 85 देशों से पहुंच रहे हैं। कई क्षेत्रों के उत्पादों की प्रदर्शनी ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों के साथ आधुनिक उद्योगों से जुड़े उत्पादों को भी प्रमुखता दी जा रही है। कृषि, वस्त्र, हस्तशिल्प, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, आईटी, स्वास्थ्य, पर्यटन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों से जुड़े उत्पाद और सेवाएं यहां प्रदर्शित की जा रही हैं। इस बार ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ के साथ ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन कुजीन’ को भी प्रमुखता दी जा रही है। इसके माध्यम से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों की विशेष पहचान वाले उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों को बड़े बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। कारोबार और निवेश पर जोर ट्रेड शो का उद्देश्य स्थानीय कारोबारियों को बड़े बाजारों से जोड़ना और निर्यात तथा निवेश के अवसर बढ़ाना है। आयोजन में कारोबारियों और खरीदारों के बीच बी2बी बैठकें कराने की व्यवस्था भी की गई है, ताकि उत्पादों के लिए सीधे कारोबारी संपर्क विकसित किए जा सकें।आयोजन में करीब 1.5 लाख बी2बी खरीदार एवं कारोबारी आगंतुक और लगभग 4.5 लाख सामान्य दर्शकों के पहुंचने का अनुमान है। इसके अलावा ज्ञान सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 उत्तर प्रदेश के छोटे-बड़े कारोबारियों के लिए अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का एक बड़ा मंच बनकर सामने आया है। आने वाले पांच दिनों में यहां होने वाली कारोबारी मुलाकातों और संभावित समझौतों पर उद्योग जगत की नजर रहेगी।

  • एशियन गेम्स 2026: सुरुचि सिंह और कमलजीत ने निशानेबाजी में भारत को दिलाया स्वर्ण

    भारतार्थ खबर संवाददाता (Bhaarataarth.com) नागोया | 25 सितंबर 2026 एशियन गेम्स 2026 में भारत ने निशानेबाजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। सुरुचि सिंह और कमलजीत की भारतीय जोड़ी ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता। भारतीय जोड़ी ने फाइनल मुकाबले में कुल 484.6 अंक हासिल किए। इस प्रदर्शन के साथ दोनों ने नया एशियन गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। दक्षिण कोरिया की जोड़ी 478.0 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रही और उसे रजत पदक मिला, जबकि ईरान ने 415.8 अंक के साथ कांस्य पदक हासिल किया। क्वालिफिकेशन में भी भारत सबसे आगे सुरुचि सिंह और कमलजीत ने फाइनल से पहले क्वालिफिकेशन दौर में भी शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय जोड़ी ने 587 अंक हासिल कर शीर्ष स्थान के साथ फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल में भी दोनों ने शुरुआत से अपना दबदबा बनाए रखा और निर्णायक दौर में शानदार तालमेल के साथ निशाना साधा। व्यक्तिगत मुकाबले के बाद शानदार वापसी दोनों खिलाड़ियों के लिए यह स्वर्ण पदक विशेष महत्व रखता है। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी, लेकिन मिक्स्ड टीम स्पर्धा में दोनों ने शानदार वापसी की। फाइनल में भारतीय जोड़ी ने लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए बढ़त बनाए रखी। मुकाबले के अंतिम चरण में भी दोनों ने दबाव के बीच अपना संयम कायम रखा और 484.6 अंक के साथ स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया। भारत का दूसरा स्वर्ण सुरुचि सिंह और कमलजीत की जीत के साथ एशियन गेम्स 2026 में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या दो हो गई। यह प्रतियोगिता में भारत का निशानेबाजी में पहला स्वर्ण पदक है। भारतीय खिलाड़ियों के लगातार बेहतर प्रदर्शन से देश के पदक अभियान को भी मजबूती मिली है। निशानेबाजी में मिली यह सफलता एशियन गेम्स में भारत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बन गई है। भारतार्थ खबर — खबर नहीं, उसके पीछे का अर्थ।

  • पुस्तक समीक्षा -अपने भी हैं अजनबी"

    रचना - राजाराम सिंह समीक्षक -लालबहादुर चौरसिया लाल, कवि एवं साहित्यकार, आजमगढ़ जनपद के प्रतिष्ठित साहित्यकार, साहित्य भूषण से सम्मानित कविवर राजाराम सिंह द्वारा रचित पुस्तक "अपने भी है अजनवी" दोहा संग्रह पढ़ने का सुखद अवसर प्राप्त हुआ। दोहा हिंदी छंद विधान का बहुत ही सशक्त और बहुचर्चित छंद है। दोहे को प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक अनेकों कवियों ने अपने भाव प्रकट करने का माध्यम बनाया तथा इसी छंद विधान में अपनी बातें कहीं। जिसमें कबीरदास, तुलसीदास, रहीम दास व बिहारी लाल जी का नाम बहुत ही श्रद्धा व सम्मान के साथ लिया जाता है। पुस्तक की अंतिम नौ अतुकांत रचनाओं को छोड़कर सभी रचनाएं दोहा छंद पर आधारित हैं। श्री राजाराम सिंह जी ने कोरोना वायरस के व्यापक दंश को जैसा देखा, सुना वैसा अपनी लेखनी में उतारा। पुस्तक का शीर्षक एक विरोधाभास लिए खड़ा है "अपने भी हैं अजनबी" प्रश्न उठता है, जो 'अपना' है वह कैसे 'अजनबी' हो सकता है। क्योंकि जो अपना है वह कभी अजनबी नहीं होता। किंतु काल के प्रभाव व कोरोना जैसी घातक छुआछूत की बीमारी ने अपनों को भी अजनबी जैसा व्यवहार करने पर मजबूर कर दिया। इसके पीछे मूल कारण है मृत्यु के भय का। जिसको स्पष्ट करते हुए कविवर राजाराम सिंह जी लिखते हैं- अपने भी हैं अजनबी, मिलने से मजबूर। एक साथ ही जी रहे फिर भी कितने दूर।। सच्चा कवि ही समाज का आईना होता है। वह समाज में जीता है। समाज के हर्षोल्लास उसे आह्लादित करते रहते हैं। किंतु समाज की विसंगतियां तथा समाज की पीड़ा उसे पीड़ित भी करती है। उसी विसंगतियों ने कवि व साहित्यकार श्री राजाराम सिंह जी के मन को आहत किया। क्योंकि कोरोना वायरस महामारी से पूरा देश त्राहिमाम बोल पड़ा था। तब राजाराम सिंह जी का आहत मन लिखने पर मजबूर हो गया- बला कहां से आ गई, जीना हुआ मुहाल। मस्त मुग्ध संसार पर पड़ा काल का जाल।। कोरोना जैसी छूत की बीमारी से बचने के लिए टीवी में, अखबारों में, सोशल मीडिया के माध्यम से जो भी बातें चिल्ला चिल्ला कर रात दिन बताई गई थी, उसे कवि ने बड़ी शालीनता से एक दोहे के माध्यम से बताने का सफल प्रयास किया है- हाथ मिलाना छोड़कर जोड़ो हाथ हुजूर। करो नमस्ते दूर से, रहे करोना दूर।। कोरोना का विनाशकारी तांडव देख कवि मन व्यथित था। उससे भी ज्यादा व्यथित तब हुआ जब सरकार की गलत नीतियां सारे समाज को और भी तोड़ने का काम कीं। कोरोना काल में जब चुनावी घोषणा होती है और सरकार संपूर्ण समाज को चुनाव की आग में झोंकने का प्रयास करती है।ऐसे में कवि राजाराम सिंह जी लिखते हैं - देश करोना से जले, तुम साधते चुनाव। साहिल पर है डूबती,देख ठहर कर नाव।। कोरोना का भयावह संकट किससे अछूता है। सबसे बड़ी दुर्दशा तो उन कामकाजी लोगों को हुई जो अपना घर बार छोड़ परदेस को गए थे। कल कारखाने बंद, यातायात के साधन बंद,ऐसे में उन मजदूरों की दुर्दशा किस से अछूती है। भोजन के लाले पड़ गए। जब कामकाजी लोग शहर में अपने को असुरक्षित मान चुके थे। ऐसे में शहर छोड़कर अपने गांव की तरफ पलायन करने लगे। वह भी पैदल बच्चों को पीठ पर लादकर पश्चाताप वह दुख के आंसुओं को पीते हुए। मजदूर सचमुच मजबूर हो गए। जिसे देख कवि मन मर्माहत हो गया और चिल्ला पड़ा- धरती तपे पांव जले, बरस रही है आग। विवस मजूरा घर चला,सारे सपने त्याग।। पुस्तक "अपने भी हैं अजनबी" में डॉ राजाराम सिंह जी ने चाइना की कुटिल चाल का भी जिक्र बखूबी किया है चीन को ललकार ते हुए श्री सिंह जी कहते हैं- हिंद भूमि गलवान है,मत अपने से जोड़। सतर्क सैनिक देश के, गर्दन देंगे तोड़।। चाइना के प्रति नेपाल के उमड़े प्रेम को बड़े चुटकुले अंदाज में बयां करते हुए कविवर राजाराम जी कहते हैं - रहे हमारे साथ तब,बने रहे गुलफाम। अब गैरों के साथ हैं,जैसे गिरे गुलाम।। डॉ राजाराम सिंह जी ने अपनी पुस्तक "अपने भी हैं अजनबी" में समुद्री तूफान अम्फान, बाढ़ का महाकाल, बाढ़ से पस्त मुंबई, पावन अवधपुरी, भयंकर ठंड जैसे शीर्षक से आंदोलित करती हुई समाज को सशक्त रचनाएं दी हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने विविध रंग ढंग के दोहे को भी उकेरा जो पाठकों को समाज से रूबरू होने का सफल प्रयास करते हैं। समाज में व्याप्त समस्याओं को गिनाते हुए बताते तथा समस्याओं से निजात पाने का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। कविवर राजाराम जी के मन में लोकमंगल व लोक रक्षण की भावना पूर्ण रूप से समाहित है।वे सदैव विलुप्त होती मानवीय संवेदनाओं पर जोरदार प्रहार करते हैं जो किसी कविता का मूल धर्म भी है। दोहो की रचना में यदा-कदा मात्राओं का दोष है जो नगण्य के बराबर है। कविवर राजाराम जी ने भाव के साथ समझौता नहीं किया है। भावों के उद्गार को कलम बंद करने का जो माध्यम बनाया गया है वह नमन योग्य है। मैं कविवर श्रद्धेय राजाराम सिंह जी के दिर्घायु होने की कामना करता हूं तथा उनसे साहित्य व समाज को मजबूती प्रदान करती ऐसी ही अनेको पुस्तकों के प्रकाशित होने की अपेक्षा करता हूं। अस्तु। समीक्षक -लालबहादुर चौरसिया लाल गोपालगंज, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश

  • भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बड़ी अपडेट, पियूष गोयल बोले—समझौता लगभग तैयार

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 25 सितंबर 2026 भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर शुक्रवार को महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल ने कहा है कि समझौते की रूपरेखा लगभग पूरी हो चुकी है और इसके क्रियान्वयन के लिए भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलना जरूरी है। भारत और अमेरिका ने इसी वर्ष फरवरी में व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। इसके बाद अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था में हुए बदलावों के कारण दोनों देशों के बीच बातचीत आगे भी जारी रही। अब चर्चा का प्रमुख विषय भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर व्यापारिक स्थिति उपलब्ध कराना है। भारतीय निर्यातकों के हित पर जोर पियूष गोयल के अनुसार भारत चाहता है कि समझौते के लागू होने पर उसके निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए उचित परिस्थितियां मिलें। भारत के कई उत्पादों का मुकाबला अमेरिका में दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के विभिन्न देशों के निर्यातकों से होता है। ऐसे में शुल्क व्यवस्था व्यापार समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों के लिए यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका भारत के प्रमुख निर्यात बाजारों में शामिल है और दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार भी बड़े स्तर पर होता है। आगे बढ़ेगी उच्चस्तरीय बातचीत पियूष गोयल आगामी G20 व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका जाएंगे। इस दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति पर चर्चा होगी। भारत इस समय कई देशों के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत आगे बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय कंपनियों और निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर पहुंच तैयार करना और वैश्विक व्यापार में भारत की भागीदारी को विस्तार देना है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अंतिम स्वरूप और शुल्क संबंधी प्रावधानों पर आने वाले दौर की बातचीत महत्वपूर्ण होगी। समझौते के लागू होने की स्थिति दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों और भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसरों को प्रभावित कर सकती है। भारतार्थ खबर — खबर नहीं, उसके पीछे का अर्थ।

  • रेलवे का बड़ा फैसला: 2 नई ट्रेन सेवाओं को मंजूरी, 9 ट्रेनों के स्टॉपेज बढ़े

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह नई दिल्ली, 24 सितंबर 2026। रेल यात्रियों के लिए आज बड़ी खबर सामने आई है। रेलवे बोर्ड ने दो नई दैनिक ट्रेन सेवाओं को मंजूरी दी है और नौ मौजूदा ट्रेनों के अतिरिक्त स्टॉपेज को भी स्वीकृति दी है। नई सेवाओं और नए ठहराव से कई शहरों के बीच रेल कनेक्टिविटी बढ़ने की उम्मीद है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी के अनुसार पुणे–बीड एक्सप्रेस को दैनिक सेवा के रूप में शुरू किया जाएगा। ट्रेन संख्या 11433 पुणे से रात 10:45 बजे रवाना होकर सुबह 6 बजे बीड पहुंचेगी, जबकि वापसी में 11434 बीड–पुणे एक्सप्रेस रात 9:30 बजे रवाना होकर सुबह 5:20 बजे पुणे पहुंचेगी। इसके मार्ग में उरुली, दौंड कॉर्ड लाइन, श्रीगोंडा रोड, अहिल्यानगर, नारायणदोहो, न्यू आष्टी और अमलनेर भंड्याचे जैसे स्टेशन शामिल हैं। दूसरी नई सेवा प्रतापनगर–टांडा रोड MEMU होगी। इसे भी दैनिक सेवा के तौर पर मंजूरी मिली है। यह ट्रेन प्रतापनगर, दभोई, छूछपुरा, बोडेली, छोटा उदेपुर, अलीराजपुर, जोबट सहित कई स्टेशनों को जोड़ते हुए चलेगी। इसके अलावा रेलवे बोर्ड ने नौ ट्रेनों के नए ठहराव को भी मंजूरी दी है। इनमें दानापुर–आनंद विहार जनसाधारण एक्सप्रेस का मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़, बाड़मेर–जम्मू तवी एक्सप्रेस का सांभर लेक, मुंबई–हावड़ा गीतांजलि एक्सप्रेस और पुणे–हावड़ा आजाद हिंद एक्सप्रेस का घाटशिला में ठहराव शामिल है। रेलवे के अनुसार संबंधित जोन नई ट्रेन सेवाओं और अतिरिक्त स्टॉपेज को लागू करने के लिए अलग-अलग अधिसूचना जारी करेंगे। इसलिए यात्रियों को यात्रा से पहले संबंधित रेलवे की आधिकारिक समय-सारणी और सूचना जरूर जांचनी चाहिए।

  • भजनों से गूंजा गोसेवा आश्रम, संत पुष्करदास ने संस्कारों से जुड़ने का दिया संदेश

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलूरु, 25 सितंबर 2026। श्री मातेश्वरी भक्त मंडल ट्रस्ट, दोडगुब्बी के तत्वावधान में श्रीकृष्ण गो सेवा आश्रम गोशाला में संत रामाज्ञादास एवं संत पुष्करदास के सान्निध्य में तीन दिवसीय धार्मिक महोत्सव आयोजित किया गया। महोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें कलाकारों की मधुर प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को देर रात तक भक्तिरस में सराबोर रखा। कार्यक्रम का शुभारंभ शाम 6 बजे माता की तस्वीर के समक्ष ज्योत प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद पाठ स्थापना, अखंड ज्योत एवं तस्वीर स्थापना सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए। भजन संध्या में महादेव भजन मंडली के गायक श्रवण माली, राजूराम चोयल, चुन्नाराम भायल, हनुमानराम, कालूराम सहित अन्य कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी। भक्तिमय वातावरण में श्रद्धालु भजनों पर झूमते नजर आए और देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे। गोसेवा सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी धर्मसभा को संबोधित करते हुए संत पुष्करदास ने कहा कि गोमाता सनातन संस्कृति और परंपराओं का अभिन्न हिस्सा रही हैं। उन्होंने कहा कि गोसेवा को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी के रूप में भी समझना चाहिए। उन्होंने समाज के लोगों से अपनी सामर्थ्य के अनुसार गोसेवा से जुड़ने और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। संत ने कहा कि संस्कृति और संस्कार समाज की पहचान हैं। आधुनिक जीवनशैली में बदलाव के बावजूद प्राचीन परंपराओं, रीति-रिवाजों और संस्कारों को संरक्षित रखना आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कारों और गोसेवा के महत्व से परिचित कराया जा सकता है। सहयोगकर्ताओं का किया आभार संत पुष्करदास ने धार्मिक महोत्सव के आयोजन में सहयोग देने वाले भामाशाहों, चढ़ावे के लाभार्थियों, नवयुवक मंडल, महिला मंडल, कार्यकर्ताओं एवं समाजबंधुओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक सहयोग और सहभागिता से ही धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन सफल होते हैं।इस अवसर पर चढ़ावे के लाभार्थी परिवारों का सम्मान किया गया। गोशाला में पूर्व में निर्मित शेड के पुनर्निर्माण के लिए भामाशाहों ने आगे बढ़कर बोलियां लेकर सहयोग की घोषणा भी की। कार्यक्रम में गोभक्त प्रकाश चौहान सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। गोशाला ट्रस्ट की ओर से लाभार्थियों, नवयुवक मंडलों, महिला मंडलों, अतिथियों एवं भजन गायकों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन मोहन सीरवी ने किया

  • लोककला को बचाने में उत्सवों की भूमिका अहम: चालुवरायस्वामी

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नागमंगला/बेल्लूर क्रॉस, 25 सितंबर 2026। श्री आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ में आयोजित 47वें राज्यस्तरीय श्री कालभैरवेश्वर लोकगीत उत्सव का समापन हुआ। समापन समारोह में मांड्या जिला प्रभारी एवं जल संसाधन मंत्री एन. चालुवरायस्वामी ने कहा कि लोककलाओं और पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों में नियमित रूप से ऐसे सांस्कृतिक उत्सव आयोजित किए जाने चाहिए। मंत्री ने कहा कि लोकगीत और लोककलाएं समाज की पारंपरिक सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने और कलाकारों को उचित मंच देने के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता है। लोककलाओं के संरक्षण पर जोर चालुवरायस्वामी ने कहा कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी विशिष्ट लोक परंपराएं हैं। इन परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए कलाकारों को प्रोत्साहन और सम्मान मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोकगीत उत्सव जैसे आयोजन कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर सामने लाने का अवसर देते हैं। उन्होंने आदिचुंचनगिरी मठ की ओर से कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उनके अनुसार, मठ लोक कलाकारों को मंच देने, उनका सम्मान करने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है। आध्यात्मिक वातावरण और सांस्कृतिक आयोजन का संगम समारोह में मंत्री ने धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों के महत्व पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और प्रार्थना से मिलने वाली मानसिक शांति का अनुभव अलग होता है। उनके अनुसार, मठ और मंदिर केवल धार्मिक गतिविधियों के केंद्र नहीं हैं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने वाले स्थान भी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे वातावरण में आयोजित लोककला उत्सव सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपरा के बीच संवाद का माध्यम बनते हैं। आदिचुंचनगिरी मठ के कार्यों की सराहना चालुवरायस्वामी ने कहा कि आदिचुंचनगिरी मठ शिक्षा, कला-संस्कृति, अन्नदान और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से सेवा कार्यों को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने मठ की गतिविधियों की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि समाजसेवा और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े ये प्रयास आगे भी जारी रहेंगे। मंत्री ने समारोह के दौरान लोक कलाकारों को बधाई दी और उनकी प्रस्तुतियों तथा सांस्कृतिक योगदान की सराहना की। कई संत और अधिकारी रहे मौजूद समापन समारोह में आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ के अध्यक्ष डॉ. निर्मलानंदनाथ महास्वामीजी, महासचिव प्रसन्ननाथ स्वामीजी, शाखा मठ के श्री शेखर स्वामीजी, कन्नड़ एवं संस्कृति विभाग की सचिव मंजुश्री सहित विभिन्न संस्थानों के संत-महास्वामीजी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के माध्यम से कर्नाटक की पारंपरिक लोक संस्कृति और कला की विविधता को सामने रखा गया। आयोजकों की ओर से कलाकारों के सम्मान और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

  • जिनदत्त कुशल मंडल ने परमात्म भक्ति के गीत-पुष्पों से सजाई पुस्तक

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 25 सितंबर 2026। श्री जिनदत्त कुशल सूरी जैन सेवा एवं संगीत मंडल द्वारा परमात्मा की आराधना और भक्ति भावना को समर्पित सुमधुर भक्ति गीतों से संकलित पुस्तक का समर्पण किया गया। श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता के भाव से तैयार इस पुस्तक में विभिन्न भक्ति गीतों के माध्यम से परमात्मा के चरणों में श्रद्धा-सुमन एवं गीत-पुष्प अर्पित किए गए हैं। मंडल के अध्यक्ष ललित डाकलिया ने बताया कि पुस्तक का संकलन अनेक सहयोगियों के योगदान से किया गया है। इसमें परमात्मा के प्रति भक्तिभाव, समर्पण और आध्यात्मिक अनुभूति को गीतों के माध्यम से अभिव्यक्ति दी गई है। पुस्तक की एक-एक प्रति पूज्य गुरुदेव मलयप्रभ सागर जी म. सा. एवं पूज्य साध्वी श्री प्रियश्रद्धांजना श्री जी म. सा. के करकमलों में अर्पित की गई। पुस्तक प्रकाशन के अवसर पर गुरुदेव एवं गुरुवर्या के साथ ट्रस्ट के अध्यक्ष तेजराज मालानी, महामंत्री कुशलराज गुलेच्छा, प्रकाश भन्साली, राजेन्द्र गुलेच्छा तथा मंडल के पूर्व अध्यक्ष अरविन्द कोठारी ने शुभकामनाएं दीं। मंडल के मंत्री धर्मेन्द्र संकलेचा ने कहा कि सदस्यों ने परमात्मा के प्रति अपनी श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता को गीतों के माध्यम से पुस्तक में अभिव्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि सामूहिक भक्ति के माध्यम से आध्यात्मिक भावनाओं को मजबूत करने और समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने का प्रयास किया गया है। पुस्तक निर्माण के संयोजक अर्चित पारख ने कहा कि परमात्म भक्ति आत्मा को निर्मल बनाने, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने और प्रभु के प्रति समर्पण भाव को दृढ़ करने का माध्यम है। सामूहिक भक्ति से वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है तथा मन को शांति और आनंद की अनुभूति होती है। पुस्तक निर्माण में संगीत मंडल के सनी रांका, नितेश बोहरा, बहादुर कांकरिया, रविन्द्र रतनपुरा, हितेन्द्र चौपड़ा, अभिषेक पारख और कुनाल मरलेचा सहित अनेक सदस्यों का सहयोग रहा। यह पुस्तक दादावाड़ी पेढ़ी पर निशुल्क उपलब्ध कराई गई है। कार्यक्रम में मंडल के उपाध्यक्ष पृथ्वीराज श्रीश्रीमाल, कोषाध्यक्ष भरत कोठारी सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे। समाचार प्रेषक: ललित डाकलिया, बेंगलुरु।

  • ₹2,500 सूखा राहत पर आर. अशोक का हमला, बोले—किसानों को चाहिए प्रति एकड़ मुआवजा

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 25 सितंबर 2026। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं भाजपा नेता आर. अशोक ने राज्य सरकार द्वारा सूखा राहत के रूप में प्रत्येक परिवार को ₹2,500 देने की घोषणा पर सवाल उठाए हैं। 25 सितंबर को बेंगलुरु स्थित विधान सौधा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि सूखे और फसल नुकसान से प्रभावित किसानों को परिवार के आधार पर एकमुश्त राशि देने के बजाय प्रति एकड़ नुकसान के आधार पर राहत मिलनी चाहिए। आर. अशोक ने सरकार की राहत राशि को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि किसानों की वास्तविक स्थिति को देखते हुए सहायता का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, मौजूदा राहत राशि कृषि लागत और फसल नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने किसानों के कर्जमाफी की भी मांग उठाई। विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि राज्य के कई हिस्सों में किसान सूखे, फसल नुकसान और बढ़ते कर्ज के दबाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि राहत पैकेज तैयार करते समय किसानों को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए और उसी के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल परिवार के आधार पर तय की गई एक समान राशि से नहीं हो सकता। विपक्ष की ओर से प्रति एकड़ मुआवजा, कर्ज राहत और फसल नुकसान के अनुरूप सहायता जैसे उपायों पर जोर दिया गया है। गौरतलब है कि आर. अशोक इससे पहले भी राज्य की वित्तीय स्थिति और सरकार की घोषणाओं को लेकर कांग्रेस सरकार पर सवाल उठा चुके हैं। 23 सितंबर को उन्होंने सरकार की वित्तीय व्यवस्था पर भी आरोप लगाए थे। हालांकि, सूखा राहत को लेकर आर. अशोक द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोपों को उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। राहत राशि और सरकारी नीतियों का अंतिम मूल्यांकन आधिकारिक आंकड़ों, प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान के आकलन और सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई विस्तृत जानकारी के आधार पर किया जाना आवश्यक है।

  • सेवा यात्रा से जुड़े प्रतिभागियों से PM मोदी का संवाद, बोले—सेवा को जीवन का मार्गदर्शक सिद्धांत बनाएं

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह नई दिल्ली, 24 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वडनगर से वाराणसी तक चल रही सेवा यात्रा के प्रतिभागियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने सेवा यात्रियों के अनुभव सुने और जनसेवा, युवाओं की भागीदारी तथा जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ने की गतिविधियों पर चर्चा की। सेवा यात्रा के तहत दस समूह मोटरसाइकिल के माध्यम से वडनगर और वाराणसी के बीच यात्रा कर रहे हैं। यह अभियान 17 सितंबर को शुरू हुआ था और 7 अक्टूबर तक जारी रहने वाला है। यात्रा के दौरान प्रतिभागी विभिन्न शहरों, जिलों, तहसीलों और गांवों में पहुंचकर लोगों से संवाद कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने संवाद के दौरान कहा कि सेवा जीवन का मुख्य उद्देश्य और मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए। उन्होंने सेवा को सर्वोच्च कर्तव्य बताते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में भी सेवा की भावना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यात्रा के दौरान स्वच्छता अभियान, पौधारोपण, ग्राम सभा संवाद, स्थानीय लोगों और लाभार्थियों से बातचीत तथा स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सामुदायिक स्थानों पर सेवा गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। अभियान में युवाओं की भागीदारी और सामुदायिक जुड़ाव पर भी जोर दिया जा रहा है। सेवा यात्रियों ने प्रधानमंत्री के साथ अपने यात्रा अनुभव साझा किए। प्रधानमंत्री ने युवाओं की भागीदारी और जमीनी स्तर पर लोगों से संवाद को महत्वपूर्ण बताया।

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