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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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लोककला को बचाने में उत्सवों की भूमिका अहम: चालुवरायस्वामी

लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
धन्ना राम चौधरी
25 सित॰
2 मिनट पठन
आदिचुंचनगिरी में लोकगीत उत्सव के समापन समारोह में मंत्री एन. चालुवरायस्वामी

भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नागमंगला/बेल्लूर क्रॉस, 25 सितंबर 2026। श्री आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ में आयोजित 47वें राज्यस्तरीय श्री कालभैरवेश्वर लोकगीत उत्सव का समापन हुआ। समापन समारोह में मांड्या जिला प्रभारी एवं जल संसाधन मंत्री एन. चालुवरायस्वामी ने कहा कि लोककलाओं और पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों में नियमित रूप से ऐसे सांस्कृतिक उत्सव आयोजित किए जाने चाहिए। मंत्री ने कहा कि लोकगीत और लोककलाएं समाज की पारंपरिक सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने और कलाकारों को उचित मंच देने के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता है।


लोककलाओं के संरक्षण पर जोर

चालुवरायस्वामी ने कहा कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी विशिष्ट लोक परंपराएं हैं। इन परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए कलाकारों को प्रोत्साहन और सम्मान मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोकगीत उत्सव जैसे आयोजन कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर सामने लाने का अवसर देते हैं। उन्होंने आदिचुंचनगिरी मठ की ओर से कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उनके अनुसार, मठ लोक कलाकारों को मंच देने, उनका सम्मान करने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है।


आध्यात्मिक वातावरण और सांस्कृतिक आयोजन का संगम

समारोह में मंत्री ने धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों के महत्व पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और प्रार्थना से मिलने वाली मानसिक शांति का अनुभव अलग होता है। उनके अनुसार, मठ और मंदिर केवल धार्मिक गतिविधियों के केंद्र नहीं हैं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने वाले स्थान भी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे वातावरण में आयोजित लोककला उत्सव सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपरा के बीच संवाद का माध्यम बनते हैं।


आदिचुंचनगिरी मठ के कार्यों की सराहना

चालुवरायस्वामी ने कहा कि आदिचुंचनगिरी मठ शिक्षा, कला-संस्कृति, अन्नदान और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से सेवा कार्यों को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने मठ की गतिविधियों की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि समाजसेवा और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े ये प्रयास आगे भी जारी रहेंगे। मंत्री ने समारोह के दौरान लोक कलाकारों को बधाई दी और उनकी प्रस्तुतियों तथा सांस्कृतिक योगदान की सराहना की।


कई संत और अधिकारी रहे मौजूद

समापन समारोह में आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ के अध्यक्ष डॉ. निर्मलानंदनाथ महास्वामीजी, महासचिव प्रसन्ननाथ स्वामीजी, शाखा मठ के श्री शेखर स्वामीजी, कन्नड़ एवं संस्कृति विभाग की सचिव मंजुश्री सहित विभिन्न संस्थानों के संत-महास्वामीजी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के माध्यम से कर्नाटक की पारंपरिक लोक संस्कृति और कला की विविधता को सामने रखा गया। आयोजकों की ओर से कलाकारों के सम्मान और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।





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