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स्वच्छता और आरोग्य का संदेश देता है शीतला माता का पावन पर्व

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 10
  • 2 min read

Updated: Mar 20


भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलूरु। सनातन परंपरा में प्रत्येक पर्व और पूजा-पद्धति के पीछे गहरा वैज्ञानिक और सामाजिक संदेश निहित होता है। इसी कड़ी में शीतला माता का पावन पर्व स्वच्छता, स्वास्थ्य और आरोग्य का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु माता की पूजा-अर्चना कर परिवार और समाज की सुख-समृद्धि तथा उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता को आरोग्य की देवी माना जाता है, जो विशेष रूप से चेचक और अन्य मौसमी बीमारियों से रक्षा करने वाली शक्ति के रूप में पूजी जाती हैं। परंपरागत रूप से इस दिन माता की आराधना के साथ घरों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है और ठंडा भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। यह परंपरा बदलते मौसम, विशेषकर गर्मी की शुरुआत में स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का संदेश देती है।


शास्त्रों में शीतला माता के स्वरूप का भी विशेष महत्व बताया गया है। माता के हाथ में झाड़ू और कलश स्वच्छता और शुद्धता के प्रतीक माने जाते हैं। यह संदेश देते हैं कि यदि व्यक्ति अपने घर और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखे, तो अनेक बीमारियों से बचाव संभव है।


इसी प्रकार शीतला माता की पूजा में नीम की पत्तियों का उपयोग भी विशेष रूप से किया जाता है। आयुर्वेद में नीम को रोगनाशक और संक्रमण से बचाने वाला औषधीय वृक्ष माना गया है। यही कारण है कि प्राचीन परंपराओं में नीम की पत्तियों का प्रयोग स्वास्थ्य संरक्षण के प्रतीक के रूप में आज भी प्रचलित है।


धार्मिक मान्यता के अनुसार माता का वाहन गधा (गर्दभ) है, जो सहनशीलता, धैर्य और परिश्रम का प्रतीक माना जाता है। यह प्रतीकात्मक संदेश देता है कि जीवन में संयम और धैर्य से ही सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।


धार्मिक विद्वानों के अनुसार शीतला माता का पर्व केवल आस्था का विषय ही नहीं, बल्कि समाज को स्वच्छता, संतुलित आहार और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का एक सांस्कृतिक माध्यम भी है। इस अवसर पर श्रद्धालु माता की आराधना कर समाज में प्रेम, सद्भाव और स्वास्थ्यपूर्ण जीवन की कामना करते हैं।


इस पावन अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए माता से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की तथा स्वच्छता और स्वास्थ्य के महत्व को अपनाने का संकल्प भी लिया।

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