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स्टालिन का आरोप: परिसीमन ने “मित्रों और गद्दारों” की पहचान कर दी

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 18
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एवं डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ने परिसीमन और संसद में महिला आरक्षण विधेयक से जुड़े हालिया घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखे राजनीतिक हमले किए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस पूरी प्रक्रिया ने राजनीतिक दलों के भीतर “मित्रों और गद्दारों” की पहचान स्पष्ट कर दी है। सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर जारी एक वीडियो संदेश में स्टालिन ने कहा कि परिसीमन को लेकर चल रही बहस ने राजनीतिक ध्रुवीकरण को और स्पष्ट किया है तथा विपक्षी दलों की एकजुटता को मजबूती दी है। उन्होंने इसे डीएमके के लिए “राजनीतिक स्पष्टता” का क्षण बताया।


स्टालिन ने कहा कि हाल ही में लोकसभा में संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित न हो पाने के बाद विपक्ष का परिसीमन के कथित “कड़े प्रावधानों” के खिलाफ आंदोलन सफल रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के नाम पर सरकार द्वारा लाए गए प्रस्ताव के पीछे अन्य नीतिगत उद्देश्य छिपे हुए थे, जिनका विपक्ष ने मिलकर विरोध किया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों के बीच लंबे समय से समन्वय स्थापित था और लगभग एक वर्ष पूर्व से ही रणनीतिक तैयारी की जा रही थी। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्षी नेताओं के बीच हुई बैठकों के बाद संयुक्त विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा बनी। स्टालिन ने यह भी कहा कि तमिलनाडु की जनता, विशेषकर महिलाओं ने इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाई और कथित “भ्रमपूर्ण प्रयासों” का विरोध किया। उन्होंने विपक्षी गठबंधन के सांसदों की एकजुटता को इस राजनीतिक परिणाम का मुख्य कारण बताया।


उन्होंने लोकसभा में हालिया मतदान का हवाला देते हुए कहा कि यह स्थिति पिछले कई वर्षों में पहली बार देखने को मिली है जब सरकार का कोई महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयक आवश्यक बहुमत प्राप्त नहीं कर सका। इस दौरान 298 सांसदों ने समर्थन और 230 ने विरोध में मतदान किया। स्टालिन ने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी सहित विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं के साथ-साथ दक्षिण भारत के कई मुख्यमंत्रियों के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। हालांकि उन्होंने इसे “आंशिक विजय” बताते हुए केंद्र सरकार से मांग की कि परिसीमन प्रक्रिया को वर्ष 2051 तक स्थगित करने के लिए संवैधानिक संशोधन लाया जाए तथा महिला आरक्षण कानून को तत्काल और बिना शर्त लागू किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा घटनाक्रम यह दर्शाता है कि तमिलनाडु के हितों की रक्षा कौन कर रहा है और कौन नहीं। साथ ही उन्होंने राज्य की राजनीति में आगामी 2026 विधानसभा चुनावों को लेकर भी तीखे राजनीतिक संकेत दिए, और भाजपा तथा उसके सहयोगियों पर निशाना साधते हुए उन्हें जनता के बीच अस्वीकार किए जाने का दावा किया। यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार का एक महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा, जिसके बाद देश की राजनीति में नई बहस तेज हो गई है।

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