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सूरत में Lenskart के ड्रेस कोड पर बवाल, विरोध प्रदर्शन तेज

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 21 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

सूरत, 21 अप्रैल। गुजरात के Surat में आईवियर कंपनी Lenskart के कथित ड्रेस कोड को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सोमवार को सरथाणा जकातनाका क्षेत्र स्थित कंपनी के एक स्टोर पर Bajrang Dal के कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिससे मामला सड़कों तक पहुंच गया।

प्रदर्शनकारियों ने कंपनी की कथित ‘एम्प्लॉयी ग्रूमिंग पॉलिसी’ को हिंदू धार्मिक आस्था के खिलाफ बताते हुए नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने स्टोर के शीशों पर स्वस्तिक चिन्ह बनाया और वहां मौजूद कर्मचारियों के माथे पर तिलक लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी भी निजी कंपनी को कर्मचारियों की धार्मिक पहचान और आस्था में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।

सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद

विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब कंपनी की एक कथित आंतरिक गाइडलाइन सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इस दस्तावेज में कर्मचारियों को बिंदी, तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों के उपयोग से रोकने की बात सामने आई। इसके बाद लोगों में आक्रोश फैल गया और सोशल मीडिया पर कंपनी की जमकर आलोचना होने लगी। हालांकि बढ़ते विवाद के बीच कंपनी ने सफाई देते हुए माफी मांगी और नई गाइडलाइन जारी करने का आश्वासन दिया, लेकिन विरोध प्रदर्शन थमता नजर नहीं आ रहा है।

युवक के आरोपों ने बढ़ाई गंभीरता

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब सूरत निवासी युवक झील वघासिया ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि उन्हें केवल तिलक और शिखा रखने की वजह से नौकरी से वंचित कर दिया गया। झील के अनुसार, उन्हें सूरत के वेसु क्षेत्र में इंटरव्यू के बाद मुंबई के ट्रेनिंग सेंटर बुलाया गया, जहां उनसे तिलक हटाने और शिखा कटवाने की शर्त रखी गई। उन्होंने इसे अपनी धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए इनकार कर दिया। आरोप है कि कंपनी ने उनके धार्मिक टैटू तक हटाने की बात कही और अंततः उन्हें ट्रेनिंग से बाहर कर दिया गया।

विरोध तेज, मांगें सख्त

इन आरोपों के बाद Bajrang Dal के कार्यकर्ता सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने कंपनी से सार्वजनिक माफी और भविष्य में ऐसी गाइडलाइन लागू न करने का स्पष्ट आश्वासन देने की मांग की है।

व्यापक बहस का मुद्दा

यह विवाद अब धार्मिक स्वतंत्रता और कॉर्पोरेट ड्रेस कोड के बीच संतुलन को लेकर एक बड़े विमर्श का रूप लेता जा रहा है। एक ओर कंपनियां पेशेवर छवि और एकरूपता की बात करती हैं, वहीं दूसरी ओर धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल, मामला लगातार तूल पकड़ रहा है और प्रशासन व कंपनी दोनों की अगली प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


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