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श्रीराम के वनवास ने भावुक किए श्रद्धालु.

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 24 अग॰
  • 1 मिनट पठन
हॉल में फूलमालाओं से सजे संत और पुरुष पूजा में, एक व्यक्ति थाली लिए; पीछे हिंदी बैनर और वीश्वकर्मा बेंगलोर साइन

भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलूरु, संवाददाता धन्नाराम चौधरी 23 अगस्त 2026। श्री मातेश्वरी भक्त मंडल की ओर से होसूर भण्डे स्थित श्री कृष्णा गौशाला परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन रविवार को प्रभु श्रीराम के वनवास प्रस्थान का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया। कथा वाचक संत किशोरचन्द रामायणी ने संगीतमय शैली में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वन गमन का भावपूर्ण वर्णन किया। प्रसंग के दौरान पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।


संत किशोरचन्द रामायणी ने कहा कि श्रीराम का वनवास त्याग, कर्तव्य, आज्ञापालन और मर्यादा का आदर्श प्रस्तुत करता है। प्रभु श्रीराम ने पिता राजा दशरथ के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए राजपाट का त्याग कर वनवास स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन आज भी माता-पिता के सम्मान, परिवार के प्रति दायित्व और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देता है।


रंग-बिरंगे परिधानों में महिलाएं और बच्चे लाल कालीन पर बैठे हैं, कुछ ताली बजा रहे हैं, हॉल में सभा का माहौल है

कथा में श्रीराम और केवट संवाद तथा माता शबरी द्वारा भगवान को प्रेमपूर्वक बेर अर्पित करने का प्रसंग भी सुनाया गया। संत ने कहा कि भगवान बाहरी आडंबर के बजाय भक्त के सच्चे प्रेम और निष्कपट भाव को स्वीकार करते हैं। शबरी की भक्ति के माध्यम से प्रभु श्रीराम ने समाज को प्रेम, समानता और समर्पण का संदेश दिया।


कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों से वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। कार्यक्रम के अंत में आरती हुई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। आरती एवं प्रसाद वितरण के लाभार्थी चेलाराम, दानाराम, धनाराम, राजुराम एवं राकेश चोयल परिवार, कोयम्बटूर रहे।


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