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2029 में ‘एक देश, एक चुनाव’ की तैयारी तेज?

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 23 अग॰
  • 2 मिनट पठन
लकड़ी की मेज पर बैठक, बीच में पीएम मोदी; दोनों ओर नेता चर्चा करते, गंभीर माहौल, सफेद दीवारें और तस्वीरें।

भारतार्थ खबर संवाददाता धन्नाराम चौधरी Bhaarataarth.com नई दिल्ली 19 अगस्त 2026 देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की प्रस्तावित व्यवस्था यानी ‘एक देश, एक चुनाव’ को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक स्तर पर कवायद तेज होने की चर्चा है। सामने आई जानकारी के अनुसार, इस व्यवस्था को लागू करने के लिए गठित संसद की संयुक्त समिति विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से विचार-विमर्श की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।


इस बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या ‘एक देश, एक चुनाव’ को वर्ष 2034 के बजाय 2029 में ही लागू करने का लक्ष्य रखा जा रहा है? यदि ऐसा होता है तो आगामी लोकसभा चुनावों के साथ कई राज्यों में विधानसभा चुनावों को भी एक साथ कराने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, 2029 की समय-सीमा को लेकर अंतिम निर्णय और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होना अभी बाकी है।


सभी विधानसभाओं के कार्यकाल को लेकर चुनौती


एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था लागू करने के लिए अलग-अलग राज्यों की विधानसभाओं के कार्यकाल को एक निश्चित चुनावी चक्र के साथ समायोजित करना होगा। मौजूदा व्यवस्था में राज्यों के विधानसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं, जबकि कुछ राज्यों में लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव भी होते हैं।

आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम में वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव भी हुए थे। ऐसे में सभी राज्यों को एक साझा चुनावी चक्र में लाना संवैधानिक और प्रशासनिक दृष्टि से बड़ी चुनौती होगी।


संयुक्त समिति कर रही कानूनी पहलुओं की समीक्षा


‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़े प्रस्ताव पर संसद की संयुक्त समिति संवैधानिक, कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर रही है। समिति संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 सहित इससे जुड़े प्रावधानों की समीक्षा कर रही है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साझा चुनावी चक्र में लाने की परिकल्पना की गई है। इसके लिए संविधान में कई महत्वपूर्ण बदलाव आवश्यक होंगे।


मुख्यमंत्रियों से मांगे जा रहे सुझाव


इस मुद्दे पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विभिन्न राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुछ भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के विचार का समर्थन किया है। हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करने के लिए केवल राजनीतिक सहमति ही पर्याप्त नहीं होगी। संविधान संशोधन, राज्यों की सहमति, विधानसभाओं के कार्यकाल में संभावित बदलाव और चुनावी व्यवस्था से जुड़े अनेक कानूनी प्रश्नों का समाधान भी आवश्यक होगा।


शीतकालीन सत्र में रिपोर्ट पर नजर


संसदीय समिति की रिपोर्ट संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की संभावना को लेकर चर्चा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि समिति ने ‘एक देश, एक चुनाव’ को लागू करने के लिए किस समय-सीमा और किस संवैधानिक व्यवस्था की सिफारिश की है।

फिलहाल 2029 में एक साथ चुनाव कराने की चर्चा को अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। सरकार और संसद की ओर से औपचारिक निर्णय तथा आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसकी वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।


यदि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है तो देश की चुनावी प्रक्रिया, राजनीतिक दलों की रणनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए 2029 की संभावित समय-सीमा पर अब राजनीतिक और संवैधानिक दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है।

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