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दक्षिण के मुख्यमंत्रियों ने भरी हामी, परिसीमन पर नहीं बनी बात

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 22 अग॰
  • 3 मिनट पठन
पीले बैकड्रॉप के सामने मंच पर बैठे‑खड़े कई लोग, औपचारिक बैठक/समारोह में आईडी कार्ड पहने, गंभीर माहौल।

भारतार्थ खबर। Bhaarataarth.com

चेन्नई | 21 अगस्त 2026।अंतरराज्यीय जल विवादों को बातचीत और आपसी सहमति से जल्द सुलझाने के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सुझाव को दक्षिण भारत के राज्यों ने समर्थन दिया है। गुरुवार को दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में जल विवादों के साथ लोकसभा सीटों के परिसीमन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। हालांकि, परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंताएं बरकरार हैं और इस पर कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी।


‘राज्य हित जरूरी, लेकिन विवाद लंबे न खिंचें


बैठक की अध्यक्षता करते हुए अमित शाह ने कहा कि राज्यों का अपने हितों की रक्षा करना स्वाभाविक है, लेकिन यदि किसी विवाद के कारण वर्षों तक किसी राज्य को पानी से वंचित रहना पड़े और पानी समुद्र में बह जाए तो इससे किसी का हित पूरा नहीं होता।

उन्होंने ब्रह्मपुत्र से कावेरी और गोदावरी तक प्रमुख नदियों को जोड़ने की दिशा में काम करने की जरूरत बताई। शाह के अनुसार, इससे भारत को आने वाले लंबे समय तक जल संकट से बचाने में मदद मिल सकती है और साथ ही नए जलमार्गों के विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।


परिसीमन पर दक्षिणी राज्यों की चिंता कायम


बैठक में परिसीमन का मुद्दा दक्षिणी राज्यों के लिए सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक चिंता के रूप में सामने आया। राज्यों का कहना है कि यदि लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण मुख्य रूप से जनसंख्या के आधार पर किया गया तो जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में नुकसान हो सकता है।

कर्नाटक और तमिलनाडु ने मौजूदा 543 लोकसभा सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखने की मांग की। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दक्षिण क्षेत्रीय परिषद से प्रस्ताव पारित कर केंद्र से 1971 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाए रखने की मांग रखी। उन्होंने महिलाओं के लिए आरक्षण को मौजूदा सीटों के भीतर लागू करने का भी सुझाव दिया।


मेकेदातु पर तमिलनाडु को भरोसा


बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर तमिलनाडु को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि परियोजना बनने की स्थिति में तमिलनाडु और पुडुचेरी के हितों की रक्षा की जाएगी।

हालांकि, तमिलनाडु के प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि बैठक में कर्नाटक के साथ चल रहे कावेरी जल बंटवारे के विवाद या कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण से जुड़े मामलों पर चर्चा नहीं हुई।


आंध्र प्रदेश ने रखा बुलेट ट्रेन का प्रस्ताव


आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु को जोड़ने वाले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कुप्पम के रास्ते अमरावती, बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ने वाले ट्रांजिट नेटवर्क की भी पैरवी की।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने परिसंपत्तियों एवं देनदारियों के बंटवारे से जुड़े लंबित मामलों को केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ बातचीत के जरिए सुलझाने पर सहमति जताई।


केरल ने उठाया मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा


केरल की ओर से मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा उठाया गया। राज्य ने स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर सहकारी संघवाद को मजबूत करने की जरूरत बताई।

वहीं तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमरका ने कृष्णा नदी के पानी पर राज्य के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की और सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र से सहयोग मांगा। पुडुचेरी ने भी सालभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और पड़ोसी राज्यों, विशेषकर तमिलनाडु, के सहयोग की आवश्यकता जताई। दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक से अंतरराज्यीय जल विवादों को बातचीत से सुलझाने की दिशा में सकारात्मक संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन परिसीमन का मुद्दा अभी भी दक्षिणी राज्यों और केंद्र के बीच महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती बना हुआ है।


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