श्री गुरुपुरम आश्रम में ‘जनजाति गुरुकुलम’ की स्थापना, पाँच सौ आदिवासी बच्चों को मिलेगा आवासीय शिक्षा व संस्कारों का संगम
- धन्ना राम चौधरी

- 3 मार्च
- 2 मिनट पठन
अपडेट करने की तारीख: 20 मार्च
भारतार्थ संवाददाता, धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
रानीवाड़ा/तखतगढ़। जनजातीय समाज के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक उत्थान की दिशा में तखतगढ़ से एक ऐतिहासिक पहल सामने आई है। श्री भारत माता प्रतिमा स्थल परिसर स्थित श्री गुरुपुरम आश्रम में ‘जनजाति गुरुकुलम’ की स्थापना की जा रही है। यह महत्वपूर्ण कार्य सद्गुरु त्रिकमदासजी धाम में अभय दासजी महाराज के सानिध्य में प्रारंभ हो रहा है।
आश्रम प्रबंधन के अनुसार इस आवासीय गुरुकुलम में लगभग पाँच सौ आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ रहने एवं भोजन की समुचित सुविधा प्रदान की जाएगी। यह संस्थान आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों से सुसज्जित होगा, जहां विद्यार्थियों को औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, अनुशासन और चरित्र निर्माण का भी समन्वित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
शिक्षा के साथ संस्कारों का समन्वय
गुरुकुलम की स्थापना का मुख्य उद्देश्य दूरदराज़ एवं वंचित क्षेत्रों के जनजातीय बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है। आयोजकों का मानना है कि शिक्षा केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न रहकर जीवन निर्माण का माध्यम बननी चाहिए। इसी दृष्टिकोण के तहत यहां आधुनिक पाठ्यक्रम के साथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक शिक्षा पर विशेष बल दिया जाएगा।
आवासीय व्यवस्था के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित छात्रावास, पौष्टिक भोजन, पुस्तकालय, अध्ययन कक्ष एवं खेलकूद की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे जनजातीय क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को समान अवसर मिल सकेगा और उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा।
रानीवाड़ा में आमंत्रण कार्यक्रम
गुरुकुलम के भव्य उद्घाटन की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। उद्घाटन समारोह के निमंत्रण हेतु युवाचार्य श्री अभय दासजी महाराज 2 मार्च 2026 को सायं 5 बजे रानीवाड़ा स्थित हिंगलाज माताजी मंदिर में आयोजित आमंत्रण कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर धर्मप्रेमियों एवं समाजजनों को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया जाएगा।
आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से इस पुनीत अवसर पर अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने का आग्रह किया है।
समाज के सहयोग से साकार होगा सपना
निवेदक एडवोकेट रमेश आंजणा ने बताया कि यह परियोजना समाज के सहयोग, सहभागिता और समर्पण से ही सफल होगी। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के बच्चों को शिक्षित एवं संस्कारित बनाकर आत्मनिर्भर बनाना समय की आवश्यकता है।
उल्लेखनीय है कि एडवोकेट रमेश आंजणा की शिक्षा भी सद्गुरु त्रिकमदासजी धाम, तखतगढ़ से हुई है। धाम की परंपरा, संस्कार और सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए वे इस गुरुकुलम परियोजना में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
‘जनजाति गुरुकुलम’ की स्थापना निश्चित रूप से शिक्षा, सेवा और संस्कार के समन्वित प्रयासों का एक प्रेरक उदाहरण बनेगी तथा जनजातीय समाज के उज्ज्वल भविष्य की सुदृढ़ आधारशिला सिद्ध होगी।
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