शिवमोग्गा में पुलिस इंस्पेक्टर रवि पाटिल ने किया आयंबिल ओली तप, जैन समाज ने किया अभिनंदन- डाँ. लूनावत
- धन्ना राम चौधरी

- 30 मार्च
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
शिवमोग्गा (कर्नाटक)- प्रवासी राजस्थानी कर्नाटका संघ के महामंत्री व श्री मरुधरा जैन संघ के अध्यक्ष डाँ. जवरीलाल लूनावत ने बताया कि जैन धर्म में तपस्या का विशेष महत्व माना जाता है, जिसमें आयंबिल ओली तप को अत्यंत कठिन और पवित्र साधना के रूप में देखा जाता है। इसी कड़ी में शिवमोग्गा के जयनगर पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर रवि पाटिल द्वारा इस तपस्या को अपनाना जैन समाज के लिए गौरव का विषय बन गया है।
डाँ. लूनावत से मिली जानकारी के अनुसार आयंबिल ओली तप वर्ष में एक बार प्रायः मार्च माह के अंतिम दिनों में देशभर के जैन मंदिरों और स्थानकों में नौ दिनों तक आयोजित किया जाता है। इस तपस्या में साधक केवल एक समय भोजन ग्रहण करता है, वह भी बिना नमक, शक्कर, घी और तेल के, अर्थात अत्यंत सादगीपूर्ण आहार के साथ आत्मसंयम का पालन किया जाता है।
बताया गया कि पुलिस इंस्पेक्टर रवि पाटिल जैन संतों के सानिध्य में आए, जहां उन्होंने आयंबिल ओली तप की महिमा को समझा और संतों की प्रेरणा से इस कठिन तपस्या का संकल्प लिया. आज उनका पांचवां आयंबिल पूर्ण हो चुका है। एक अजैन होते हुए तथा व्यस्त प्रशासनिक दायित्वों के बावजूद इस प्रकार की कठोर साधना करना समाज में विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है।
शिवमोग्गा जैन संघ के प्रबुद्ध सदस्यों ने पाटिल साहब के इस आध्यात्मिक प्रयास की सराहना करते हुए उन्हें स्थानक में पारणा यानि तप को आगे जारी रखने के लिए आमंत्रित किया। इस अवसर पर समाजजनों ने उनके तप की अनुमोदना करते हुए अभिनंदन किया और उनके द्वारा जिनशासन की गरिमा बढ़ाने पर आभार व्यक्त किया।
समाज के सदस्यों ने इसे सामाजिक समरसता और धार्मिक प्रेरणा का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से न केवल जैन धर्म की महिमा का प्रचार-प्रसार होता है, बल्कि अन्य समाजों के लोगों को भी आध्यात्मिक मार्ग अपनाने की प्रेरणा मिलती है। शिवमोग्गा जैन संघ ने सभी समाजबंधुओं से अपील की है कि वे पाटिल साहब के इस तप की अनुमोदना करें तथा अधिक से अधिक लोगों को इस प्रकार की तपस्या और संयमपूर्ण जीवनशैली के प्रति प्रेरित करें।
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