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शहरी निकायों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दो दिवसीय कार्यशाला शुरू

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 16 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

भोपाल, 16 अप्रैल। मध्य प्रदेश के शहरी निकायों को वित्तीय रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का गुरुवार को शुभारंभ होगा। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय राजधानी भोपाल के भौरी स्थित सुंदरलाल पटवा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन मैनेजमेंट में इस कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे।


इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शहरी निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना, राजस्व स्रोतों में वृद्धि करना तथा आधुनिक और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे विभागीय सुधारों और नीति-आधारित व्यवस्थाओं पर मार्गदर्शन देंगे। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि 16 और 17 अप्रैल 2026 को आयोजित इस कार्यशाला में प्रदेश सहित देशभर के शहरी विकास विशेषज्ञ, वरिष्ठ अधिकारी और नीति निर्माता भाग लेंगे। यह मंच अनुभवों के आदान-प्रदान और नवाचारों को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा, जिससे निकायों को भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में शहरी विकास से जुड़े अहम विषयों पर गहन चर्चा होगी। इनमें निकायों की खाली भूमि के आर्थिक उपयोग (लैंड मोनेटाइजेशन), शोधित जल के पुनः उपयोग, संपत्ति कर संग्रहण में सुधार और लीज रेंट जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। इसके साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों—यूसीएफ, एईबीएएस और स्पैरो—के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेषज्ञ विस्तृत जानकारी देंगे, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता लाई जा सके।


कार्यशाला की खास बात विभिन्न नगर निकायों द्वारा अपनाई गई सफल कार्यप्रणालियों का प्रस्तुतीकरण होगा। इससे अन्य निकायों को व्यावहारिक मॉडल समझने और उन्हें अपने क्षेत्र में लागू करने का अवसर मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा। इस आयोजन में प्रदेश के एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले सभी नगरीय निकायों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। साथ ही, नवनियुक्त मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को भी इसमें भागीदारी का अवसर दिया गया है, ताकि वे अपने कार्यकाल के शुरुआती दौर में ही आधुनिक शहरी प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन की समझ विकसित कर सकें।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की पहलें ‘आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और शहरी विकास को नई दिशा प्रदान करेंगी।

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