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राजे के बयान से सियासी घमासान, राठौड़ का मारवाड़ी जवाब

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 23 hours ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी ने हलचल मचा दी है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के एक भावुक बयान ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है, जिस पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने ठेठ राजस्थानी अंदाज में जवाब देकर चर्चा को और तेज कर दिया।

दरअसल, 6 अप्रैल 2026 को भाजपा स्थापना दिवस के अवसर पर झालावाड़ में आयोजित जनसभा में वसुंधरा राजे ने मुस्कुराते हुए कहा, “लोग मुझसे कहते हैं कि उनका काम नहीं हुआ, लेकिन भैया मैं अब नहीं लड़ सकती। जब मेरा ही चला गया और मैं खुद को नहीं बचा पाई, तो तुम्हारे लिए क्या कर सकती हूं।” उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में उनके भीतर के असंतोष और मुख्यमंत्री पद न मिलने की टीस के रूप में देखा गया। राजे ने अपने वक्तव्य में धौलपुर का उदाहरण देते हुए बताया कि सड़क निर्माण के दौरान उनकी अपनी जमीन भी चली गई, जिसे वे बचा नहीं सकीं। हालांकि, बयान के वायरल होने के बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके कथन को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। उनका उद्देश्य पद या राजनीति पर टिप्पणी करना नहीं, बल्कि आमजन को नियमों की सीमाओं को समझाना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि “लोगों का प्यार ही सबसे बड़ा पद है” और कुछ लोग उनके बयान को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दे रहे हैं।


इधर, इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बीकानेर दौरे के दौरान मारवाड़ी कहावत का सहारा लिया। उन्होंने कहा, “चिट्ठी चूर-चूर करे, मांगे डाल और घी, मोदी सूं कुण झगड़ो करे, चिट्ठी खाणी नाल।” इस कहावत के माध्यम से राठौड़ ने संकेत दिया कि जो परिस्थितियाँ उपलब्ध हैं, उनमें संतोष रखते हुए काम करना चाहिए और अनावश्यक विवादों से बचना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राठौड़ का यह बयान न केवल एक जवाब था, बल्कि पार्टी अनुशासन और सामूहिक नेतृत्व का संदेश भी देता है। उन्होंने यह भी कहा कि वसुंधरा राजे आज भी पार्टी की वरिष्ठ और महत्वपूर्ण नेता हैं तथा उनके कार्यों को पूरा किया जा रहा है। साथ ही यह संकेत भी दिया कि हर बार मुख्यमंत्री पद मिलना आवश्यक नहीं होता।

गौरतलब है कि वसुंधरा राजे लंबे समय से पार्टी में अपनी भूमिका को लेकर चर्चा में रही हैं। हाल ही में उनके पुत्र और सांसद दुष्यंत सिंह की जनसंवाद यात्रा के दौरान दिया गया यह बयान राजनीतिक रूप से अधिक संवेदनशील माना जा रहा है।

राजस्थान में भाजपा आगामी 2028 विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी है। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं के बीच इस तरह की बयानबाज़ी पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर सकती है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व फिलहाल इसे सामान्य राजनीतिक प्रतिक्रिया मानते हुए स्थिति को संतुलित करने की कोशिश में जुटा है।

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