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राजे पर अखिलेश की टिप्पणी से सियासी हलचल

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 12
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में शनिवार को उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को लेकर अप्रत्याशित टिप्पणी कर दी। उनके बयान ने न केवल भाजपा के भीतर की चर्चाओं को हवा दी, बल्कि सियासी गलियारों में नए कयासों का दौर भी शुरू कर दिया।


अखिलेश यादव ने कहा कि “अगर वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री होतीं, तो वर्तमान में हो रहे कार्यों की गुणवत्ता कहीं बेहतर होती।” उनके इस बयान को राज्य के मौजूदा भाजपा नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए मौजूदा व्यवस्था को “पर्ची वाला सीएम” करार दिया, जिससे यह संकेत मिला कि शासन में स्वतंत्र निर्णय लेने की कमी है। उन्होंने भाजपा के चर्चित ‘डबल इंजन सरकार’ मॉडल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों इंजन मिलकर विकास को गति देने के बजाय “आपस में टकराते” नजर आ रहे हैं। उनके इस बयान को सत्ताधारी दल के भीतर संभावित अंतर्विरोधों की ओर इशारा माना जा रहा है। यादव का दावा है कि इस कथित अंदरूनी खींचतान का असर सीधे तौर पर प्रशासन और विकास कार्यों पर पड़ रहा है।


दिलचस्प बात यह है कि यह टिप्पणी उस समय आई है, जब एक दिन पहले ही वसुंधरा राजे का बयान चर्चा में रहा था। एक सभा में उन्होंने कहा था, “मैं आपके लिए कैसे लड़ सकती हूं, जब मैं अपनी ही कुर्सी नहीं बचा पाई?” इस बयान को पार्टी के भीतर उनकी नाराजगी के संकेत के रूप में देखा गया था। हालांकि, शनिवार को राजे ने इन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश करते हुए स्पष्ट किया कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी पद को लेकर बात नहीं की, बल्कि केवल स्थानीय मुद्दों को उदाहरण के जरिए समझाने का प्रयास किया था।


राजे ने झालावाड़ क्षेत्र का जिक्र करते हुए बताया कि चार-लेन सड़क परियोजना के दौरान कुछ लोगों ने बाईपास को लेकर चिंता जताई थी। इसी संदर्भ में उन्होंने धौलपुर स्थित अपने घर के सामने बने नेशनल हाईवे का उदाहरण दिया, जहां उन्हें भी अपनी बाउंड्री वॉल पीछे हटानी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि यदि वह अपने ही हित की रक्षा नहीं कर पाईं, तो आमजन के लिए नियमों से परे जाकर कैसे लड़ सकती थीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि झालावाड़ उनके लिए केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि परिवार जैसा है और वहां के लोगों के साथ उनकी बातचीत हमेशा सहज और पारिवारिक रही है। राजे ने यह भी आरोप लगाया कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। बयानों और पलटवारों के इस दौर ने राजस्थान की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम ने भाजपा के अंदरूनी समीकरणों और विपक्ष की रणनीति—दोनों को नया आयाम दे दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, जिससे राज्य की सियासत में नई दिशा देखने को मिल सकती है।

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