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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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यूपीआई पेमेंट में बड़ा बदलाव: 1 अप्रैल से ‘डबल सुरक्षा’ के बाद ही होगा ट्रांजैक्शन

लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
धन्ना राम चौधरी
1 अप्रैल
2 मिनट पठन

अपडेट करने की तारीख: 18 अप्रैल

आरबीआई के नए नियम लागू, अब पिन के साथ ओटीपी या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य



भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। भारतीय रिज़र्व बैंक ने डिजिटल भुगतान को अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से 1 अप्रैल 2026 से यूपीआई पेमेंट सिस्टम में महत्वपूर्ण बदलाव लागू कर दिए हैं। नए नियमों के तहत अब पेटीएम, गूगलपे, फोनपे सहित किसी भी यूपीआईI आधारित ऐप से भुगतान करने के लिए उपयोगकर्ताओं को “डबल ऑथेंटिकेशन” प्रक्रिया से गुजरना होगा।

क्या है नया नियम?

आरबीआई द्वारा लागू किए गए नए दिशानिर्देशों के अनुसार अब केवल यूपीआई पिन डालकर पेमेंट पूरा नहीं होगा। उपयोगकर्ता को दो स्तरों पर अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी, जिसे टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) कहा जाता है।

कैसे होगा अब पेमेंट?

नई प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन पेमेंट निम्न चरणों में पूरा होगा—

पहला चरण: उपयोगकर्ता को अपना यूपीआई पिन या पासवर्ड दर्ज करना होगा।

दूसरा चरण: इसके बाद ओटीपी, फिंगरप्रिंट या फेस स्कैन के जरिए अतिरिक्त सत्यापन करना होगा।

डिवाइस ऑथेंटिकेशन: कुछ मामलों में जिस मोबाइल डिवाइस से पेमेंट किया जा रहा है, उसका भी सत्यापन किया जा सकता है। इस प्रकार, अब हर ट्रांजैक्शन के लिए “डबल सिक्योरिटी लेयर” अनिवार्य हो गई है।

क्यों किया गया बदलाव?

आरबीआई के इस कदम का मुख्य उद्देश्य बढ़ते साइबर फ्रॉड और डिजिटल स्कैम पर लगाम लगाना है। हाल के समय में यूपीआई के माध्यम से धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि देखी गई थी, जिसके चलते सुरक्षा को और मजबूत करना आवश्यक हो गया था।

क्या होंगे फायदे?

ऑनलाइन फ्रॉड और हैकिंग के मामलों में कमी आएगी

केवल पिन जानने से कोई भी व्यक्ति पेमेंट नहीं कर सकेगा

बायोमेट्रिक और ओटीपी जैसी अतिरिक्त सुरक्षा परत से यूजर की पहचान सुनिश्चित होगी

डिजिटल ट्रांजैक्शन में विश्वास और सुरक्षा दोनों बढ़ेंगे

विशेषज्ञों की राय

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव डिजिटल पेमेंट सिस्टम को अधिक भरोसेमंद बनाएगा। हालांकि, इससे ट्रांजैक्शन प्रक्रिया में कुछ सेकंड का अतिरिक्त समय लग सकता है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है। आरबीआई का यह नया नियम डिजिटल इंडिया की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। अब यूजर्स को थोड़ी अतिरिक्त सावधानी और समय देकर अपने ट्रांजैक्शन को अधिक सुरक्षित बनाना होगा।

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