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भोजशाला पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: हिंदुओं को सालभर पूजा की अनुमति, ASI ने हटाई एंट्री की रोक

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 17
  • 4 min read
“धार स्थित भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु, हाईकोर्ट फैसले के बाद बढ़ी सुरक्षा व्यवस्था”
“धार स्थित भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु, हाईकोर्ट फैसले के बाद बढ़ी सुरक्षा व्यवस्था”

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

डेटलाइन: धार/इंदौर, 17 मई। मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में बड़ा मोड़ आ गया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने नया आदेश जारी करते हुए हिंदू समुदाय को परिसर में पूजा-अर्चना के लिए बिना रोक-टोक प्रवेश की अनुमति दे दी है। अदालत ने वर्ष 2003 में जारी उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार की नमाज की अनुमति दी गई थी। फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति, धार्मिक संगठनों और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद ASI का बड़ा कदम

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक, स्थापत्य और पुरातात्विक साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि भोजशाला राजा भोज के समय का संस्कृत अध्ययन केंद्र और देवी सरस्वती को समर्पित स्थल रहा है। कोर्ट के निर्देश के बाद ASI ने शनिवार को नई अधिसूचना जारी की।

ASI के आदेश में स्पष्ट कहा गया कि अब हिंदू श्रद्धालु साल के सभी दिन भोजशाला परिसर में प्रवेश कर पूजा-अर्चना कर सकेंगे। नई प्रेस रिलीज में “कमाल मौला मस्जिद” शब्द का उल्लेख हटाकर केवल “भोजशाला” नाम दर्ज किया गया है। इससे पहले आधिकारिक दस्तावेजों में इसे “भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर” कहा जाता था।

क्या कहा ASI ने?

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों के अनुसार, भोजशाला केवल एक संरक्षित स्मारक नहीं, बल्कि संस्कृत भाषा, व्याकरण और साहित्य के अध्ययन का ऐतिहासिक केंद्र रही है। अधिकारियों ने कहा कि यह स्थल देवी वाग्देवी अर्थात माता सरस्वती को समर्पित मंदिर के रूप में भी जाना जाता रहा है। इसी आधार पर हिंदू समुदाय को प्राचीन परंपराओं के तहत पूजा और अध्ययन की अनुमति दी गई है।

हालांकि ASI ने यह भी स्पष्ट किया कि परिसर “प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम 1958” (AMASR Act) के तहत संरक्षित स्मारक बना रहेगा। श्रद्धालुओं के प्रवेश और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन तथा अधीक्षण पुरातत्वविद् संयुक्त रूप से समय-निर्धारण करेंगे।

मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाएगा

हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने असहमति जताई है। संबंधित पक्षकारों ने कहा कि वे फैसले की विस्तृत प्रति का अध्ययन करने के बाद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह मामला केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ा है।

फैसले के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। भोजशाला परिसर और आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

हिंदू संगठनों में उत्साह

हाईकोर्ट और ASI के आदेश के बाद हिंदू संगठनों तथा श्रद्धालुओं में खुशी का माहौल देखा गया। कई संगठनों ने इसे “ऐतिहासिक निर्णय” बताया और कहा कि वर्षों से चली आ रही मांग अब पूरी हुई है। धार सहित आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं ने फैसले का स्वागत किया।

भोजशाला विवाद क्या है?

धार की भोजशाला लंबे समय से विवाद का केंद्र रही है। हिंदू पक्ष इसे माता सरस्वती का मंदिर और प्राचीन संस्कृत विद्यालय मानता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता आया है। वर्ष 2003 में ASI ने एक व्यवस्था लागू की थी, जिसके तहत मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज की अनुमति दी गई थी। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद उस व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है।

आपके मन में उठ रहे सवाल (Q&A)

Q1. क्या अब भोजशाला में रोज पूजा होगी?

हाँ, ASI के नए आदेश के अनुसार हिंदू समुदाय को सालभर बिना रोक-टोक पूजा-अर्चना की अनुमति दी गई है।

Q2. क्या मुस्लिम समुदाय की नमाज पूरी तरह बंद हो गई?

हाईकोर्ट ने 2003 की उस व्यवस्था को निरस्त कर दिया है जिसमें शुक्रवार की नमाज की अनुमति थी। हालांकि मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है।

Q3. भोजशाला को लेकर कोर्ट ने क्या माना?

कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक और स्थापत्य साक्ष्य इसे राजा भोज कालीन संस्कृत अध्ययन केंद्र और देवी सरस्वती से जुड़ा स्थल दर्शाते हैं।

Q4. क्या यह फैसला अंतिम है?

फिलहाल यह हाईकोर्ट का आदेश है। मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है, इसलिए आगे कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है।

Q5. प्रशासन ने क्या तैयारी की है?

फैसले के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है और परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

निष्कर्ष: भोजशाला विवाद पर आया यह फैसला केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि इतिहास, पुरातत्व और कानून के जटिल संतुलन का भी उदाहरण बन गया है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट में संभावित सुनवाई और प्रशासनिक व्यवस्थाएं इस मुद्दे की दिशा तय करेंगी। फिलहाल धार की भोजशाला एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ चुकी है।

Source: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट आदेश, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति, प्रशासनिक सूत्र।

Keywords: भोजशाला विवाद, ASI आदेश, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, सरस्वती मंदिर, धार भोजशाला

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