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“कृषि कर्मयोगी बनें, किसानों की समृद्धि बढ़ाएं” – सीएम मोहन यादव

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 1
  • 3 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

भोपाल। मध्य प्रदेश में किसानों के हितों को केंद्र में रखकर सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब केवल योजनाएं बनाना ही नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करना ही असली “कृषि कर्मयोग” है। नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” घोषित कर राज्य सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में मिशन मोड में काम शुरू कर दिया है।

कृषि कर्मयोगियों को मिला नया मंत्र

भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित उन्मुखीकरण कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को “कृषि कर्मयोगी” के रूप में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसानों के प्रति संवेदनशीलता, तकनीकी समझ और नवाचार ही इस अभियान की सफलता की कुंजी है। सरकार ने 16 विभागों को एक मंच पर लाकर कृषि, पशुपालन, मत्स्य, उद्यानिकी और सहकारिता को एकीकृत मॉडल में जोड़ा है, जिससे किसानों को समग्र लाभ मिल सके।

डिजिटल क्रांति से बदलेगा कृषि परिदृश्य

कार्यक्रम में “मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड”, “पैक्स सदस्यता महाअभियान” और “सीएम किसान हेल्पलाइन (155253)” जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए गए। ये पहल किसानों को त्वरित जानकारी, समाधान और पारदर्शिता प्रदान करेंगी। मुख्यमंत्री ने स्वयं हेल्पलाइन का परीक्षण कर इसकी उपयोगिता को सराहा।

किसानों की आय में बढ़ोतरी के ठोस संकेत

सरकार के प्रयासों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि:

  • दूध उत्पादन में वृद्धि के कारण किसानों को प्रति लीटर 7–8 रुपये अधिक मिल रहे हैं

  • गेहूं की खरीद 2625 रुपये प्रति क्विंटल पर हो रही है

  • उड़द जैसी फसलों पर भी समर्थन मूल्य लागू किया गया है

नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से पशुपालन क्षेत्र में आई तेजी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।

खेती में तकनीक और नवाचार का बढ़ता प्रभाव

अब खेती केवल पारंपरिक नहीं रही। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसान साल में 2 की जगह 3 फसलें लेने लगे हैं। एग्री वेस्ट मैनेजमेंट जैसे मॉडल से किसान अतिरिक्त आय भी कमा रहे हैं। मक्के के डंठल, गेहूं-धान की नरवाई से भूसा बनाकर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कमाई भी बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने इजरायल का उदाहरण देते हुए कहा कि सीमित संसाधनों में भी तकनीक के दम पर खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।

नदी जोड़ो परियोजनाओं से मिलेगा बड़ा लाभ

राज्य को केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का लाभ मिलने जा रहा है। इन परियोजनाओं से मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई जिलों में सिंचाई क्षमता बढ़ेगी। केंद्र सरकार द्वारा 90% लागत वहन किए जाने से इन योजनाओं को गति मिली है।

आपके मन में उठ रहे सवाल

  • क्या “कृषक कल्याण वर्ष” वास्तव में किसानों की आय में बड़ा बदलाव ला पाएगा?

  • क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म गांव स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंच पाएंगे?

  • क्या युवा खेती को करियर के रूप में अपनाएंगे?

  • क्या एग्री वेस्ट मैनेजमेंट पूरे देश में लागू हो सकता है?

Q1. सीएम किसान हेल्पलाइन का नंबर क्या है?

Q2. कृषक कल्याण वर्ष 2026 का उद्देश्य क्या है?

Q3. एग्री वेस्ट मैनेजमेंट क्या है?

Q4. पीकेसी परियोजना से क्या फायदा होगा?

अब आपकी बारी!

इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

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