सरकारी जमीन पर बड़ा मास्टरस्ट्रोक: CM मोहन यादव का गेमचेंजर फैसला, उद्योगों को मिलेगा सीधा फायदा
- धन्ना राम चौधरी

- 26 अप्रैल
- 3 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
भोपाल। मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक बड़ा और रणनीतिक फैसला लिया है। अब वर्षों से खाली पड़ी अनुपयोगी सरकारी जमीन को बेचने के बजाय उद्योगों के लिए आवंटित किया जाएगा। इस फैसले से न केवल निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। राज्य सरकार का यह कदम ‘इंडस्ट्रियल ग्रोथ’, ‘MSME प्रमोशन’ और ‘लैंड यूज ऑप्टिमाइजेशन’ जैसे अहम क्षेत्रों में बड़ा बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है।
सरकार ने लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग को ऐसी जमीनों की पहचान करने का निर्देश दिया है, जिनका उपयोग उद्योगों, खासकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) के लिए किया जा सके। यह फैसला प्रदेश में औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने और निवेशकों को आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
198 एकड़ भूमि पर नए उद्योगों की तैयारी
प्रदेश में चार प्रमुख स्थानों पर कुल 198 एकड़ भूमि पर बंद पड़े तेल उत्पादन प्लांट अब नए उद्योगों के लिए खोले जाएंगे। इनमें शामिल हैं:
सीहोर (पचामा) – 70 एकड़
नर्मदापुरम (बनापुरा) – 45 एकड़
मुरैना (जड़ेरूआ) – 40 एकड़
सीधी (चुरहट) – 43 एकड़
इन जमीनों को MSME और MPIDC के माध्यम से उद्योगों को आवंटित करने की योजना है। खास बात यह है कि शहरों के बीच स्थित भूमि पर बड़े उद्योगों के बजाय छोटे और मध्यम उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
PPP मॉडल से हाईटेक विकास की तैयारी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अब सरकार सीधे जमीन बेचने के बजाय सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल अपनाएगी। इसके तहत आईटी पार्क, डाटा सेंटर और हाईटेक टाउनशिप विकसित किए जाएंगे। इससे प्रदेश में टेक्नोलॉजी सेक्टर को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा।
हाईवे किनारे बनेंगे इंडस्ट्रियल क्लस्टर
राज्य सरकार की योजना है कि हाईवे के किनारे स्थित प्राइम लोकेशन पर इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित किए जाएं। ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत फूड प्रोसेसिंग यूनिट और टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाएंगे। इससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेगा।
पिछले 5 साल में 101 संपत्तियों की बिक्री
सरकार ने पिछले पांच वर्षों में 1,110 करोड़ रुपये में 101 सरकारी संपत्तियां बेची हैं। इनमें बस डिपो, सरकारी कार्यालय, बोर्ड की जमीन और अन्य परिसंपत्तियां शामिल हैं। हालांकि अब सरकार ने अपनी रणनीति बदलते हुए संपत्तियों को बेचने के बजाय उनका बेहतर उपयोग करने पर जोर दिया है।
जिलों से मांगी गई जमीन की जानकारी
MSME विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिखकर खाली पड़ी सरकारी जमीन की जानकारी मांगी है। इसका उद्देश्य तेजी से भूमि आवंटन कर उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देना है।
क्या है इस फैसले का असर?
निवेश में तेजी आएगी
रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
MSME सेक्टर को मजबूती मिलेगी
जमीन का बेहतर उपयोग होगा
राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी
Q1. सरकार जमीन बेचने के बजाय क्यों दे रही है?
Q2. किन उद्योगों को प्राथमिकता मिलेगी?
Q3. क्या इससे निवेश बढ़ेगा?
Q4. PPP मॉडल क्या है?
Q5. क्या इससे रोजगार मिलेगा?
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आपके मन में उठ रहे सवाल क्या हैं?
हाल ही में हुए इस फैसले ने प्रदेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था में नई हलचल पैदा कर दी है। हर नागरिक के मन में कई अहम सवाल उठ रहे हैं।
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