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रावी–सतलुज में अवैध खनन पर हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन, 3 हफ्तों में सख्त कार्रवाई के आदेश

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 26 अप्रैल
  • 3 मिनट पठन
हाई कोर्ट के आदेश के बाद रावी-सतलुज क्षेत्र में अवैध खनन पर सख्ती
हाई कोर्ट के आदेश के बाद रावी-सतलुज क्षेत्र में अवैध खनन पर सख्ती

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

चंडीगढ़। रावी और सतलुज नदियों में बढ़ते अवैध खनन पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अवैध खनन में शामिल अधिकारियों पर तीन हफ्तों के भीतर कार्रवाई की जाए। ड्रोन सर्वे रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले खुलासों के बाद अदालत ने यह सख्त आदेश जारी किया। पंजाब अवैध खनन, रावी-सतलुज बेल्ट, ड्रोन सर्वे रिपोर्ट और सरकारी कार्रवाई जैसे मुद्दे अब राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के केंद्र में आ गए हैं।

अवैध खनन पर कोर्ट की सख्ती

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने रावी और सतलुज नदियों के किनारों पर जारी अवैध खनन को गंभीर पर्यावरणीय और आर्थिक संकट बताते हुए पंजाब सरकार को जवाबदेह ठहराया है। अदालत ने कहा कि यदि निर्धारित खनन क्षेत्र से बाहर खुदाई पाई जाती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई अनिवार्य होगी। यह आदेश चंडीगढ़ निवासी याचिकाकर्ता गुरबीर सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें दावा किया गया कि अवैध खनन से राज्य को हर साल करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

ड्रोन सर्वे में सामने आई सच्चाई

सुनवाई के दौरान Survey of India द्वारा प्रस्तुत ड्रोन आधारित सर्वे रिपोर्ट को अदालत ने अहम साक्ष्य माना। रिपोर्ट में हाई-रिजोल्यूशन इमेजरी और डिजिटल टेरेन मॉडल के जरिए यह स्पष्ट हुआ कि कई जगहों पर खनन तय सीमाओं से बाहर किया गया। हालांकि, अदालत ने इस रिपोर्ट को अधूरा मानते हुए कड़ी टिप्पणी की और कहा कि केवल कुछ गांवों के आधार पर पूरी स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता।

तीन हफ्तों में पूरी रिपोर्ट और कार्रवाई

कोर्ट ने Survey of India को निर्देश दिया है कि रावी-सतलुज बेल्ट के बाकी हिस्सों का व्यापक ड्रोन सर्वे तीन सप्ताह के भीतर पूरा कर राज्य सरकार को सौंपा जाए। साथ ही पंजाब सरकार को भी निर्देश दिया गया कि अंतिम रिपोर्ट मिलते ही अवैध खनन के मामलों में तुरंत और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सीमा क्षेत्र में खनन पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि Border Security Force (BSF), सेना और अन्य एजेंसियां सीमा क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। अदालत ने रक्षा मंत्रालय से यह स्पष्ट करने को कहा कि सीमा के पास वैध खनन की अनुमति किन शर्तों पर दी जा सकती है। पंजाब सरकार ने अपनी सफाई में कहा कि सीमा क्षेत्र में केवल रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही खनन की अनुमति दी जाती है और अवैध खनन पर रोक लगाई गई है।

पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि रावी और सतलुज जैसे नदियों में अवैध रेत खनन से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि नदी की धारा, जैव विविधता और भूजल स्तर पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा, सरकारी खजाने को होने वाला नुकसान राज्य की आर्थिक स्थिति को भी कमजोर कर रहा है।

आगे क्या?

अब सभी की नजरें तीन सप्ताह बाद आने वाली विस्तृत ड्रोन रिपोर्ट और सरकार की कार्रवाई पर टिकी हैं। यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।

Q1. हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया है?

Q2. ड्रोन सर्वे में क्या सामने आया?

Q3. सरकार को कितना नुकसान हो रहा है?

Q4. सीमा क्षेत्र में खनन कैसे होता है?

Q5. आगे क्या कार्रवाई होगी?

आपके मन में उठ रहे सवाल क्या हैं?

हाल ही में हुए घटनाक्रम ने राजनीति और प्रशासन में हलचल मचा दी है। हर नागरिक के मन में कई अहम सवाल उठ रहे हैं—क्या अब अवैध खनन रुकेगा? क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?

अब आपकी बारी!

इन सवालों पर अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

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