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CET परीक्षा विवाद: बेंगलुरु कॉलेज में जनेऊ उतरवाने पर बवाल, 3 प्रोफेसर सस्पेंड

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 25
  • 3 min read

भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलुरु। बेंगलुरु में CET परीक्षा के दौरान जनेऊ उतरवाने का मामला तूल पकड़ गया है। कृपानिधि कॉलेज में 5 ब्राह्मण छात्रों से जबरन जनेऊ और कलावा उतरवाने के आरोप लगे हैं, जिसके बाद FIR दर्ज हुई और 3 प्रोफेसरों को सस्पेंड कर दिया गया। इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और परीक्षा नियमों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कर्नाटक सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं, जबकि विपक्ष ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। CET परीक्षा, जनेऊ विवाद, बेंगलुरु कॉलेज और धार्मिक भेदभाव जैसे मुद्दे अब चर्चा के केंद्र में हैं।

CET परीक्षा से पहले धार्मिक पहचान पर विवाद

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित कृपानिधि कॉलेज में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) के दौरान एक गंभीर विवाद सामने आया है। आरोप है कि परीक्षा देने पहुंचे 5 ब्राह्मण छात्रों को परीक्षा हॉल में प्रवेश से पहले अपना जनेऊ (पवित्र धागा) उतारने के लिए मजबूर किया गया। इतना ही नहीं, कुछ छात्रों के हाथों में बंधा कलावा (मौली) भी काट दिया गया। छात्रों के अनुसार, परीक्षा केंद्र पर मौजूद शिक्षकों ने सुरक्षा नियमों का हवाला देते हुए यह कदम उठाया। हालांकि, छात्रों का कहना है कि धातु की वस्तुएं हटाने का नियम तो है, लेकिन जनेऊ हटाने का कोई प्रावधान नहीं है।

छात्रों ने सुनाई आपबीती

पीड़ित छात्रों ने बताया कि वे मानसिक दबाव में आ गए थे, क्योंकि परीक्षा छोड़ना उनके भविष्य के लिए नुकसानदायक होता। एक छात्र ने कहा, “हमें कहा गया कि बिना जनेऊ उतारे अंदर नहीं जा सकते। हमारे पास कोई विकल्प नहीं था।” यह घटना सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली।

अभिभावकों का विरोध, कॉलेज में हंगामा

जैसे ही छात्रों ने घर जाकर यह बात बताई, उनके माता-पिता गुस्से में कॉलेज पहुंचे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। अभिभावकों ने यह भी बताया कि पिछले वर्ष भी इसी तरह की घटनाएं सामने आई थीं, जिसके बाद सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जनेऊ नहीं उतरवाया जाएगा।

प्रशासन और सरकार की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज की। कॉलेज प्रशासन ने भी कार्रवाई करते हुए 3 प्रोफेसरों को सस्पेंड कर दिया है। कर्नाटक के शिक्षा मंत्री ने इस घटना को “गलत और अस्वीकार्य” बताते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा नियमों में धार्मिक प्रतीकों को हटाने का कोई निर्देश नहीं है।

राजनीति भी गरमाई

इस विवाद ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए इसे हिंदू भावनाओं को आहत करने वाला कदम बताया है। वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि यह एक अलग-थलग घटना है और इसकी निष्पक्ष जांच की जा रही है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई नहीं जाएंगी।

क्या कहते हैं नियम?

CET परीक्षा के दिशा-निर्देशों के अनुसार:

• धातु की वस्तुएं (जैसे चेन, बाली) हटाना अनिवार्य है

• इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित हैं

• धार्मिक प्रतीकों को हटाने का कोई स्पष्ट नियम नहीं है

यही कारण है कि यह मामला और अधिक विवादास्पद बन गया है।

समाज और शिक्षा पर प्रभाव

यह घटना केवल एक कॉलेज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाती है कि क्या शिक्षा संस्थानों में धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान किया जा रहा है? विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

आपके मन में उठ रहे सवाल क्या हैं?

हाल ही में हुए घटनाक्रम ने cet exam में हलचल मचा दी है, और हर नागरिक के मन में कुछ अहम सवाल उठ रहे हैं

Q1. जनेऊ क्या होता है?

Q2. क्या परीक्षा में जनेऊ हटाना अनिवार्य है?

Q3. इस मामले में क्या कार्रवाई हुई?

Q4. सरकार का क्या रुख है?

Q5. क्या पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं?

निष्कर्ष : बेंगलुरु का यह CET विवाद केवल एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि संवेदनशील सामाजिक मुद्दा बन चुका है। अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या निष्कर्ष निकलता है और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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