top of page
भारतार्थ-logo

भारतीय राजपूताना सेवा संगठन की श्रीमद्भागवत कथा में हुआ श्रीकृष्ण–रुक्मिणी विवाह का दिव्य दर्शन

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 6 जुल॰
  • 2 मिनट पठन
Group of women in red sarees on a stage, one dressed as Krishna with flute, before a Hindi devotional banner.
रुक्मिणी विवाह महोत्सव की अलौकिक झांकी ने श्रद्धालुओं को किया मंत्रमुग्ध, भक्ति में डूबा पूरा कथा पंडाल

श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में भगवान श्रीकृष्ण–रुक्मिणी विवाह की भव्य झांकी का दिव्य दृश्य

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 06 जुलाई, 2026 भारतीय राजपूताना सेवा संगठन द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के छठे दिन बेंगलुरु में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीकृष्ण–रुक्मिणी विवाह महोत्सव की मनमोहक झांकी, मंगल गीतों और जयघोषों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा स्थल पर सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा परिसर “राधे-राधे” तथा “जय श्रीकृष्ण” के जयघोषों से भक्तिमय वातावरण में डूब गया।


भारतीय राजपूताना सेवा संगठन के बेंगलुरु अध्यक्ष सुनील सिंह, व्हाइटफ़ील्ड अध्यक्ष आशुतोष सिंह, आयोजन सचिव संजय सिंह एवं उनकी टीम के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य धार्मिक आयोजन में विख्यात राष्ट्रीय कथा वाचिका परम पूज्या देवी राजनंदनी जी ने भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने अपने प्रेरणादायी संदेश में कहा कि रुक्मिणी विवाह केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम, अटूट विश्वास और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का दिव्य प्रतीक है। जब भक्त निष्कपट भाव से प्रभु का स्मरण करता है, तब स्वयं भगवान उसकी रक्षा और कल्याण के लिए उपस्थित हो जाते हैं।


कथा के दौरान प्रस्तुत श्रीकृष्ण–रुक्मिणी विवाह की आकर्षक झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। भगवान श्रीकृष्ण की भव्य बारात, पुष्पवर्षा, मंगल गीतों और भक्तिमय संगीत के बीच संपन्न हुए विवाह दृश्य ने पूरे कथा पंडाल को द्वारका नगरी का स्वरूप प्रदान कर दिया। महिलाओं ने पारंपरिक मंगलगीत गाए, श्रद्धालुओं ने भक्ति-भाव से नृत्य किया और हर ओर आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण दिखाई दिया।


आयोजन स्थल पर अनुशासन और भक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिला। कथा के उपरांत सामूहिक महाआरती एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजन समिति ने आगामी पूर्णाहुति एवं समापन समारोह में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर पुण्य लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया।

टिप्पणियां

5 स्टार में से 0 रेटिंग दी गई।
अभी तक कोई रेटिंग नहीं

रेटिंग जोड़ें
bottom of page