गोरखपुर का जानलेवा नाला बना मौत का जाल
- धन्नाराम चौधरी

- 5 जुल॰
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बजट के अभाव में रुका निर्माण, दो साल में तीन मौतों के बाद भी प्रशासन बेपरवाह
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गोरखपुर | 05 जुलाई, 2026 गोरखपुर के खजांची फ्लाईओवर से फातिमा रोड तक फैला खुला और गहरा नाला अब स्थानीय लोगों के लिए मौत का कुआं बन चुका है। बीते दो वर्षों में इस नाले में डूबकर तीन लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य बजट के अभाव में अधूरा पड़ा हुआ है। सड़क से बिल्कुल सटे इस खतरनाक नाले ने प्रशासनिक लापरवाही और अधूरे विकास कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार खजांची फ्लाईओवर से फातिमा रोड स्थित गोड़धोइया नाला तक करीब 754 मीटर लंबाई में गहरा नाला बना हुआ है। सड़क निर्माण का जिम्मा लोक निर्माण विभाग (PWD) के निर्माण खंड-3 के पास है, जबकि नाला निर्माण की जिम्मेदारी जल निगम को दी गई है। जल निगम ने इस परियोजना के लिए करीब 12.50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया था।
लोक निर्माण विभाग ने पहली किस्त के रूप में छह करोड़ रुपये जारी किए, जिससे 360 मीटर हिस्से में निर्माण कार्य शुरू हुआ। इसके बाद शेष 394 मीटर निर्माण के लिए साढ़े छह करोड़ रुपये की आवश्यकता थी। हालांकि विभाग ने केवल चार करोड़ रुपये ही जारी किए। अब बाकी ढाई करोड़ रुपये न मिलने के कारण दूसरे हिस्से का टेंडर और निर्माण कार्य रुका हुआ है।
इस बीच, 9 जून को बिहार निवासी तेतरदास की इसी नाले में गिरकर मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार तेतरदास गहरे नाले में गिर गया और समय पर मदद न मिलने के कारण उसकी जान चली गई। दो युवकों ने जान जोखिम में डालकर उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पिछले दो वर्षों में यह तीसरी मौत बताई जा रही है।
घटना के बाद कुछ समय के लिए नगर निगम ने सुरक्षा के तहत नाले के किनारे हरे रंग का जाल लगवाया था, लेकिन कुछ दिनों बाद वह भी गायब हो गया। वर्तमान में केवल कुछ हिस्सों में ही सुरक्षा जाल दिखाई देता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह नाला सड़क से बिल्कुल सटा हुआ है और रात में यहां स्ट्रीट लाइट भी नहीं जलती। ऐसे में वाहन चालकों और राहगीरों के लिए यह बेहद खतरनाक बन चुका है। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार विभाग केवल आश्वासन दे रहे हैं, जबकि हर दिन हादसे का खतरा बना हुआ है।
जल निगम के अभियंताओं ने बताया कि शेष राशि मिलने का आश्वासन दिया गया है और इसी आधार पर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक पूरा निर्माण नहीं होता, तब तक किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता
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