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कंधमाल में हाथियों से बचाव के लिए सौर सायरन अलर्ट सिस्टम शुरू

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 5 जुल॰
  • 2 मिनट पठन
Forest ranger adjusts solar elephant alert siren while villagers watch near huts; elephant grazes in the background.
कंधमाल जिले के गांव में लगाया गया सौर ऊर्जा संचालित सायरन और जंगल क्षेत्र

ओडिशा के संवेदनशील गांवों में वन विभाग की नई पहल, हाथियों की एंट्री पर बजेगा चेतावनी सायरन

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) भुवनेश्वर | 05 जुलाई, 2026 ओडिशा के कंधमाल जिले में लगातार बढ़ रहे मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए वन विभाग ने हाईटेक और प्रभावी पहल शुरू की है। जी. उदयगिरि वन क्षेत्र के संवेदनशील गांवों में अब सौर ऊर्जा संचालित सायरन सिस्टम लगाया गया है, जो हाथियों की गतिविधियों की तुरंत चेतावनी देगा। इस नई तकनीक से ग्रामीणों को समय रहते अलर्ट मिलने की उम्मीद है, जिससे जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।


वन विभाग द्वारा जी. उदयगिरि रेंज के लिंगा, मलानासुगा, पुकुलिंगिया, गामुली, रेतुड़ी और पिड़िकिमाहा गांवों में कुल छह सौर सायरन स्थापित किए गए हैं। ये इलाके लंबे समय से हाथियों की आवाजाही और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के लिए संवेदनशील माने जाते रहे हैं।


वन परिक्षेत्र अधिकारी मणिकेश्वरी पटनायक ने बताया कि प्रत्येक सायरन को पांच अधिकृत मोबाइल नंबरों से जोड़ा गया है। जैसे ही वनकर्मी या ग्रामीण हाथियों को आबादी की ओर बढ़ते देखते हैं, वे कॉल के माध्यम से सायरन सक्रिय कर सकते हैं। सायरन बजते ही गांवों में रहने वाले लोग सतर्क होकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा सकेंगे।


वन विभाग का मानना है कि यह प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली हाथियों और इंसानों के बीच सीधे टकराव की घटनाओं को कम करने में अहम भूमिका निभाएगी। इसके साथ ही फसलों, घरों और पालतू पशुओं को होने वाले नुकसान में भी कमी आने की उम्मीद है।


हालांकि ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने इसे समस्या का स्थायी समाधान नहीं माना। स्थानीय लोगों ने राज्य सरकार से विशेष रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) गठित करने और मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना बनाने की मांग की है।


ज्ञापन के अनुसार हाल के दिनों में हाथियों के हमलों में पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 13 पालतू पशु भी मारे गए हैं। इसके अलावा सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हुई है और कई घरों को नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई महीनों से दो दंतैल हाथी लगातार इलाके में घूम रहे हैं। वहीं 21 हाथियों का झुंड रेतुड़ी जंगल से सुजेली और कुरुमिंगिया क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है, जिससे केले, मक्का और अन्य फसलों को भारी नुकसान हो रहा है।


विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित यह सायरन सिस्टम भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन का प्रभावी मॉडल बन सकता है। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो राज्य के अन्य संवेदनशील जिलों में भी इसे लागू किया जा सकता है।

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