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भवानीपुर में साधुओं से दुर्व्यवहार, सियासत गरमाई

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 7 hours ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच राजधानी कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से साधु-संतों के साथ कथित दुर्व्यवहार और हमले की घटना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। वार्ड संख्या 70 के पद्मपुकुर इलाके स्थित एक आश्रम में रह रहे साधुओं ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की, जबरन आश्रम से बाहर निकाल दिया और बिजली-पानी की आपूर्ति तक काट दी।


साधुओं के अनुसार, वे कालीघाट एवं आसपास के क्षेत्रों में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का कार्य कर रहे थे। शुक्रवार को कुछ लोग आश्रम पहुंचे और उन्हें डराने-धमकाने लगे। विरोध करने पर उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए और उन्हें आश्रम से खींचकर बाहर निकाल दिया गया। घटना के बाद साधुओं का सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है और दैनिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न हो रही है। इस घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय पार्षद असीम बसु के नेतृत्व में समर्थकों ने साधुओं पर हमला किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भवानीपुर में सनातन धर्म का प्रचार करना अपराध है? साथ ही सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया।


वहीं, तृणमूल कांग्रेस की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है। पार्षद असीम बसु का कहना है कि इलाके के लोगों, विशेषकर महिलाओं, ने शिकायत की थी कि कुछ साधु घर-घर जाकर तस्वीरें ले रहे थे, जिससे असुरक्षा की भावना पैदा हो रही थी। उन्होंने बताया कि इसी शिकायत के आधार पर वे मौके पर पहुंचे और आपत्ति जताई, लेकिन किसी प्रकार की हिंसा या जबरदस्ती से इनकार किया। गौरतलब है कि भवानीपुर विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं चुनाव मैदान में हैं, ऐसे में इस घटना ने राजनीतिक महत्व और भी बढ़ा दिया है। चुनावी माहौल में इस तरह की घटनाएं न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं, बल्कि प्रदेश की सियासत को भी नई दिशा दे रही हैं। फिलहाल मामले की सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन इस घटनाक्रम ने भवानीपुर समेत पूरे राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।

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