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टीएमसी में ‘पुराने बनाम नए’ की जंग तेज, शुभेंदु का बड़ा दावा

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 1 day ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर कथित अंदरूनी खींचतान को लेकर बयानबाज़ी तेज हो गई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को दावा किया कि पार्टी में अब पुराने और वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है, जबकि नए चेहरों को तरजीह दी जा रही है।

अधिकारी ने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने पार्टी के शुरुआती दौर में संघर्ष किया, आज वही उपेक्षा और अपमान का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2000 के दशक की शुरुआत में जब टीएमसी अपना जनाधार मजबूत कर रही थी, तब कई कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। “आज उन्हीं लोगों को उनकी ही पार्टी में सम्मान नहीं मिल रहा,” उन्होंने कहा।


राजनीतिक संकेतों के बीच ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी में संगठनात्मक बदलावों की चर्चा भी तेज है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की बढ़ती भूमिका को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। अधिकारी का दावा है कि अब अहम बैठकों और निर्णयों में अभिषेक बनर्जी को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे पुराने नेताओं में असंतोष बढ़ रहा है।

इसी क्रम में शुभेंदु अधिकारी ने नाराज वरिष्ठ नेताओं को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का खुला न्योता भी दिया। उन्होंने पूर्व बर्धवान जिले के मंगलकोट से जुड़े वरिष्ठ नेता विकास नारायण चौधरी को भाजपा की सदस्यता दिलाते हुए कहा कि “सम्मानित और संघर्षशील नेताओं के लिए भाजपा ही सही मंच है।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे दल-बदल की रणनीति भी साफ झलकती है। दरअसल, विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा टीएमसी के असंतुष्ट नेताओं को अपने पाले में लाकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।


हालांकि, टीएमसी की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी के भीतर बदलावों को लेकर समर्थक इसे “स्वाभाविक संगठनात्मक विस्तार” बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे “नेतृत्व में केंद्रीकरण” करार दे रहा है। आगामी चुनावों के मद्देनज़र यह मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में और गरमाने की संभावना है, जहां ‘पुराने बनाम नए’ की बहस सियासी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

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