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बंगाल चुनाव से पहले ईडी का शिकंजा, पार्थ चटर्जी के घर छापा

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 1 day ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। शनिवार को ईडी की टीम ने दक्षिण कोलकाता के नकटला स्थित उनके आवास पर छापेमारी की, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। यह कार्रवाई चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है।


सूत्रों के अनुसार, ईडी चटर्जी से दोबारा पूछताछ करना चाहती है, लेकिन वह कई बार जारी समन के बावजूद पेश नहीं हुए। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर पूछताछ से बचने की कोशिश की। ऐसे में जांच अधिकारियों ने सीधे उनके आवास पर पहुंचकर कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान केंद्रीय बलों की भारी तैनाती भी देखी गई, जिससे इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई। इस मामले में ईडी की एक अन्य टीम ने न्यू टाउन स्थित कारोबारी प्रसन्ना रॉय के कार्यालय पर भी छापा मारा। एजेंसी का मानना है कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और इसमें कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है। जांच अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। गौरतलब है कि यह मामला जुलाई 2022 में तब सुर्खियों में आया था, जब ईडी ने पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया था। उसी दौरान उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के आवास से करीब 20 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। इस बरामदगी ने पूरे देश को चौंका दिया था और घोटाले की गंभीरता उजागर हुई थी।


बाद में अदालत ने अर्पिता मुखर्जी को जमानत दे दी, जबकि पार्थ चटर्जी को भी सितंबर में कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत मिली। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के चलते उनकी रिहाई में देरी हुई और अंततः नवंबर में उन्हें न्यायिक हिरासत से बाहर आने की अनुमति मिली। ईडी की इस ताजा कार्रवाई ने चुनावी माहौल में सियासी तापमान बढ़ा दिया है। विपक्ष जहां इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल इसे चुनाव से पहले की राजनीतिक साजिश करार दे रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती घोटाले में अभी और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला बंगाल की राजनीति में और अधिक गरमाने के संकेत दे रहा है।

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