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बेवटा में आध्यात्म और समाज एकता का महासंगम, गुरुदेव दयारामजी महाराज के संदेश ने छोड़ी गहरी छाप

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 8
  • 3 min read
बेवटा (थराद) में आयोजित गंगा प्रसादी कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित करते गुरुदेव दयारामजी महाराज। gurudev-dayaramji-maharaj-bewta-tharad-ganga-prasadi-2026.jpg
बेवटा (थराद) में आयोजित गंगा प्रसादी कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित करते गुरुदेव दयारामजी महाराज। gurudev-dayaramji-maharaj-bewta-tharad-ganga-prasadi-2026.jpg

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

थराद/बेवटा, गुजरात । 8 मई 2026 ग्राम बेवटा (थराद) में आयोजित पावन गंगा प्रसादी कार्यक्रम गुरुवार को श्रद्धा, आध्यात्म और सामाजिक समरसता का केंद्र बन गया। हेमाराम / लुम्भाराम चौधरी भूरिया परिवार की ओर से आयोजित इस धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में बदल दिया। कार्यक्रम की सबसे विशेष बात रही पावन तीर्थ शिकारपुरा आश्रम के गादीपति, राजऋषि, योगीराज, बाल ब्रह्मचारी एवं समाज सुधारक परम पूज्य महंत गुरुदेव श्री श्री 108 श्री दयारामजी महाराज की गरिमामयी मौजूदगी।

गुरुदेव दयारामजी महाराज ने अपने प्रेरणादायी आशीर्वचनों में समाज को नशामुक्ति, शिक्षा, संस्कार और सामाजिक एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी को संस्कारित और शिक्षित बनाना समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, सेवा भाव और आध्यात्मिक जीवनशैली को अपनाने पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम में गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी सहित समाज के कई अग्रणी व्यक्तित्व, सामाजिक कार्यकर्ता, श्रद्धालु एवं बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और संस्कारमयी भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला।

गुरुदेव के संदेश ने समाज को दिया नया दिशा संकेत

अपने संबोधन में गुरुदेव दयारामजी महाराज ने कहा कि समाज तभी मजबूत बनेगा जब युवा वर्ग नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर शिक्षा और संस्कार को अपनाएगा। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज में एकता बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल धार्मिक आयोजन ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इन आयोजनों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संदेश पहुंचना चाहिए। गुरुदेव ने समाज के लोगों से पर्यावरण संरक्षण, जल बचाओ और सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी ने की आयोजन की सराहना

गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी ने आयोजन को समाज को जोड़ने वाला प्रेरणादायी प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम सामाजिक भाईचारे और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं। उन्होंने आयोजक परिवार की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।

भक्तिमय बना पूरा वातावरण

पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिला। गंगा प्रसादी में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया। आयोजन स्थल पर अनुशासन, सेवा और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला।

समाज के वरिष्ठजनों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन सामाजिक एकता को मजबूत करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम से जुड़े अहम तथ्य

  • आयोजन स्थल: ग्राम बेवटा, थराद (गुजरात)

  • अवसर: पावन गंगा प्रसादी कार्यक्रम

  • आयोजक: हेमाराम / लुम्भाराम चौधरी भूरिया परिवार

  • मुख्य संत उपस्थित: परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री 108 श्री दयारामजी महाराज

  • मुख्य अतिथि: गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी

  • प्रमुख संदेश: नशामुक्ति, शिक्षा, संस्कार, समाज एकता और पर्यावरण संरक्षण

आपके मन में उठ रहे सवाल (Q&A)

Q1. गंगा प्रसादी कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?

इस आयोजन का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना, संस्कार और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना था।

Q2. गुरुदेव दयारामजी महाराज ने क्या संदेश दिया?

उन्होंने नशामुक्त समाज, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी।

Q3. कार्यक्रम में कौन-कौन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे?

गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी सहित समाज के कई गणमान्य लोग और श्रद्धालु मौजूद रहे।

Q4. ऐसे धार्मिक आयोजनों का समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है?

इस प्रकार के आयोजन समाज में भाईचारा, संस्कार और सकारात्मक सोच को मजबूत करते हैं।

Q5. क्या युवाओं की भागीदारी देखने को मिली?

हाँ, आयोजन में बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लेकर सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में रुचि दिखाई।

निष्कर्ष : बेवटा में आयोजित यह गंगा प्रसादी कार्यक्रम केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि समाज को संस्कार, शिक्षा, सेवा और एकता का संदेश देने वाला प्रेरणादायी मंच बनकर उभरा। गुरुदेव दयारामजी महाराज के संदेशों ने जहां लोगों को आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ा, वहीं सामाजिक जागरूकता और नशामुक्ति जैसे विषयों को भी केंद्र में लाकर नई दिशा देने का कार्य किया।

Source: आयोजन समिति एवं उपस्थित समाजबंधुओं से प्राप्त जानकारी।

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