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बेंगलूरु में ओवरलोडिंग का कहर, रोज़ 180 उल्लंघन दर्ज

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 17
  • 3 min read

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)।

बेंगलूरु। शहर में यातायात नियमों की अनदेखी और ओवरलोडिंग के बढ़ते मामलों ने सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। हाल ही में सामने आए यातायात प्रवर्तन आंकड़ों के अनुसार, बेंगलूरु में ओवरलोडिंग से जुड़े उल्लंघनों की संख्या लगातार ऊंची बनी हुई है, जो नियमों के अनुपालन पर सवाल खड़े करती है। आंकड़ों के मुताबिक, तीन अलग-अलग श्रेणियों में कुल 16,205 ओवरलोडिंग उल्लंघन दर्ज किए गए हैं। इसका मतलब है कि शहर में प्रतिदिन औसतन करीब 180 मामले सामने आ रहे हैं। इनमें सबसे अधिक 7,952 मामले अतिरिक्त यात्रियों को बैठाने के हैं, जो यातायात सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।


यातायात अधिकारियों के अनुसार, प्रतिदिन औसतन 88 मामले ऐसे दर्ज किए जा रहे हैं, जिनमें वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्री सवार पाए जाते हैं। संयुक्त यातायात आयुक्त कार्तिक रेड्डी ने बताया कि इस तरह के उल्लंघन विशेष रूप से स्कूली बच्चों के परिवहन और निर्माण स्थलों के आसपास अधिक देखने को मिलते हैं। उन्होंने कहा, “अक्सर अभिभावक बच्चों के लिए ऑटो या टैक्सी किराए पर लेते हैं, जहां क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जाता है। वहीं, निर्माण स्थलों पर मजदूरों को मालवाहक वाहनों में ढोना आम हो गया है, जो बेहद खतरनाक है।”

तीन पहिया वाहनों में सबसे ज्यादा उल्लंघन

डीसीपी (ट्रैफिक ईस्ट) साहिल बागला के अनुसार, ओवरलोडिंग के मामले सबसे ज्यादा तीन पहिया वाहनों यानी ऑटो-रिक्शा में पाए जाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षमता से अधिक यात्री बैठाने से वाहन का संतुलन बिगड़ता है और दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

नियमों की खुली अवहेलना, किराए की लालच बड़ी वजह

बनासवाड़ी यातायात पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि नियम के अनुसार ऑटो-रिक्शा में चालक के अलावा अधिकतम तीन यात्री ही बैठ सकते हैं, लेकिन हकीकत में इसका खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। विशेषकर स्कूल समय, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर ऑटो चालकों द्वारा यात्रियों को ठूंस-ठूंसकर बैठाना आम बात हो गई है। कई चालक मीटर या ऐप आधारित किराए को ठुकराकर प्रति व्यक्ति किराया वसूलते हैं। उदाहरण के तौर पर, ₹150-₹160 की सामान्य सवारी को चार-पांच यात्रियों में बांटकर चालक ₹200-₹250 तक वसूल लेते हैं। लालच में वे यात्रियों को गोद में बैठाने तक से नहीं हिचकते, जिससे सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ती हैं।

मालवाहक वाहनों का दुरुपयोग बढ़ा

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के पहले तीन महीनों में ही मालवाहक वाहनों में अवैध रूप से यात्रियों को ढोने के 3,812 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 2025 में यह संख्या 6,076 थी। अधिकारियों का कहना है कि मालवाहक वाहन केवल सामान ढोने के लिए होते हैं, इनमें यात्रियों को ले जाना कानूनन गलत और अत्यंत जोखिम भरा है। ऐसे वाहनों में बैठने की अनुमति सामान्यतः एक या दो व्यक्तियों तक ही सीमित होती है। निर्माण स्थलों, विवाह समारोहों और स्थानांतरण के दौरान इन वाहनों का दोहरे उपयोग—सामान और लोगों दोनों के लिए—किया जा रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

लंबे सामान का परिवहन भी बना खतरा

एक अन्य चिंताजनक प्रवृत्ति दोपहिया वाहनों पर लंबी वस्तुओं जैसे लोहे की छड़, पाइप और सीढ़ियों को ले जाना है। हाल के समय में ऐसे 4,441 मामले दर्ज किए गए हैं। घनी आबादी वाले बाजार क्षेत्रों में यह प्रवृत्ति आम हो गई है, जो अन्य वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है।

सख्ती और जागरूकता दोनों पर जोर

यातायात विभाग ने स्पष्ट किया है कि ओवरलोडिंग को लेकर अब सख्त रुख अपनाया जा रहा है। प्रमुख चौराहों, स्कूल परिवहन और वाणिज्यिक वाहनों पर विशेष जांच अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही, लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी तेज किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नियमों की अनदेखी न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह सीधे-सीधे मानव जीवन को खतरे में डालता है। ऐसे में नागरिकों की जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है कि वे सुविधा या जल्दबाजी के बजाय सुरक्षा को प्राथमिकता दें।

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