बेंगलुरु में गौ सम्मान आह्वान अभियान की प्रांतीय कार्यशाला सम्पन्न, संतों ने दिया गौ संरक्षण का संदेश
- धन्नाराम चौधरी

- 16 जुल॰
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बेंगलुरु में आयोजित गौ सम्मान आह्वान अभियान की प्रांतीय कार्यशाला का समूह चित्र / मंच पर संत-महात्माओं का प्रतिनिधि फोटो
भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 15 जुलाई, 2026 गौ सम्मान आह्वान अभियान के अंतर्गत बेंगलुरु में आयोजित प्रांतीय स्तरीय कार्यशाला उत्साह, आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक जागरूकता के वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। श्री चंद्रशेखर भारती कल्याण मंडप, शंकरपुरम में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उत्तराखंड, हरियाणा, गुजरात और राजस्थान से पधारे संत-महात्माओं ने गौ संरक्षण, गौ संवर्धन और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का प्रेरक संदेश दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गौ भक्तों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और धर्मप्रेमियों ने भाग लेकर गौ सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यशाला का उद्देश्य केवल गौ संरक्षण का संदेश देना नहीं था, बल्कि समाज में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, सेवा भावना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरण उत्पन्न करना भी था। संत-महात्माओं ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि गौ सेवा भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा है और यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैव विविधता तथा प्राकृतिक संतुलन से भी गहराई से जुड़ी हुई है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने गौ आधारित जीवनशैली, जैविक खेती, ग्रामीण आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने समाज के सभी वर्गों, विशेषकर युवाओं से गौ सेवा को सामाजिक अभियान के रूप में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यशाला में विभिन्न राज्यों से आए संतों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुभवों का आदान-प्रदान भी हुआ। प्रतिभागियों ने गौ संरक्षण के क्षेत्र में चल रहे सफल प्रयासों की जानकारी साझा की और भविष्य में अधिक समन्वित रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।
आयोजकों ने कहा कि गौ सम्मान आह्वान अभियान का उद्देश्य केवल धार्मिक जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि गौ आधारित अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करना भी है। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी संत-महात्माओं, स्वयंसेवकों, सामाजिक संगठनों और उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त किया गया।
धार्मिक एवं सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस कार्यशाला ने गौ संरक्षण के प्रति समाज में नई चेतना का संचार किया और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
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