कर्नाटक हाई कोर्ट: बच्चों का खेलने का अधिकार मौलिक, फुटबॉल बैन पर पुनर्विचार के आदेश
- धन्नाराम चौधरी

- 15 जुल॰
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बेंगलुरु के अपार्टमेंट परिसर में खेलते बच्चे / कर्नाटक हाई कोर्ट का प्रतिनिधि चित्र
भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 15 जुलाई, 2026 कर्नाटक हाई कोर्ट ने बच्चों के अधिकारों और अपार्टमेंट परिसरों में साझा सुविधाओं के उपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि "बच्चों का खेल खेलना एक मौलिक अधिकार है।" अदालत ने बेंगलुरु स्थित एक अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन को परिसर के खेल मैदान में फुटबॉल खेलने पर लगाए गए प्रतिबंध पर लोकतांत्रिक तरीके से पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। साथ ही साझा सीढ़ियों और सार्वजनिक क्षेत्रों में रखे गए फूलों के गमले स्थायी रूप से हटाने का भी आदेश दिया है।
यह फैसला बेंगलुरु के एस्टीम गार्डेनिया अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के निवासी संगीता अग्रवाल और हेमंत अग्रवाल द्वारा दायर अपील पर आया। दंपति ने एसोसिएशन के फुटबॉल प्रतिबंध और सीढ़ियों पर रखे गमलों को अदालत में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि गमलों से टपके पानी के कारण संगीता अग्रवाल फिसल गईं, जिससे उनके पैर में गंभीर फ्रैक्चर हुआ और उन्हें दो बार सर्जरी करानी पड़ी।
अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का हवाला देते हुए माना कि सीढ़ियों पर रखे गमले निवासियों के स्वतंत्र आवागमन में बाधा उत्पन्न करते हैं। न्यायालय ने कहा कि साझा क्षेत्रों में ऐसी बाधाएं नागरिक अधिकारों का उल्लंघन हैं। अदालत ने यह भी माना कि गमलों में पानी डालने से फर्श फिसलनभरा हुआ, जिससे दुर्घटना हुई।
फुटबॉल प्रतिबंध पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खेल आवश्यक हैं। केवल किसी विशेष खेल को नियंत्रित करने के लिए नियम बनाए जा सकते हैं, लेकिन बच्चों को खेलने के अधिकार से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता।
हालांकि अदालत ने फुटबॉल प्रतिबंध को तत्काल समाप्त नहीं किया, बल्कि एसोसिएशन को तीन महीने के भीतर आम सभा (General Body Meeting) बुलाकर बहुमत के आधार पर यह तय करने का निर्देश दिया कि सार्वजनिक खेल मैदान में कौन-कौन से खेल खेले जा सकते हैं।
उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अपार्टमेंट एसोसिएशन के निर्णय कानून और नागरिक अधिकारों के अनुरूप होने चाहिए। साझा सुविधाओं का उपयोग सभी निवासियों के हितों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। न्यायालय ने भविष्य में भी सार्वजनिक सीढ़ियों और कॉमन एरिया में गमले या अन्य बाधाएं रखने पर रोक लगाने का निर्देश दिया।
यह फैसला न केवल अपार्टमेंट परिसरों के लिए बल्कि बच्चों के खेल, सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के संतुलन को लेकर भी एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।
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