बेंगलुरु डेकेयर विवाद: फर्जी वीडियो बनाकर वसूली की साजिश का दावा
- धन्नाराम चौधरी

- 15 जुल॰
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लिटिल स्कॉलर्स डेकेयर सेंटर/प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्रतिनिधि चित्र
भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 15 जुलाई, 2026 बेंगलुरु डेकेयर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। कैपजेमिनी परिसर में संचालित लिटिल स्कॉलर्स डेकेयर सेंटर ने मंगलवार को गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार के वायरल वीडियो वास्तविक घटना नहीं, बल्कि दो बर्खास्त कर्मचारियों द्वारा जबरन वसूली के उद्देश्य से रची गई साजिश का हिस्सा थे। हालांकि, इन आरोपों की पुलिस जांच अभी जारी है और मामले में अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
डेकेयर सेंटर की संचालिका रमनदीप कौर ने प्रेस वार्ता में बताया कि सुजाता और विजयलक्ष्मी आर नामक कर्मचारियों को 25 जून को कथित अनुशासनहीनता और आपसी विवाद के बाद नौकरी से हटाया गया था। उनके अनुसार, अगले ही दिन दोनों कर्मचारी नौकरी बचाने के लिए वापस आईं, लेकिन प्रबंधन ने निर्णय बरकरार रखते हुए बकाया वेतन और 15 दिनों का अतिरिक्त मुआवजा देकर सेवा समाप्त कर दी।
कौर का आरोप है कि भुगतान मिलने के बावजूद एक कर्मचारी ने दावा किया कि उसे वेतन नहीं मिला और इसके बाद बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार के वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसे की मांग शुरू कर दी। डेकेयर प्रबंधन के अनुसार, दोनों महिलाओं ने पूर्व सेंटर मैनेजर मंजुला के साथ मिलकर बच्चों को सीसीटीवी की निगरानी से दूर ले जाकर कथित रूप से ऐसे दृश्य रिकॉर्ड किए, जिनमें बच्चों को बाथरूम में बंद करना, उनके मुंह पर पानी डालना और एक बच्चे को वॉशिंग मशीन के ड्रम में बैठाना शामिल था। प्रबंधन का दावा है कि इन वीडियो का उद्देश्य संस्था को बदनाम कर आर्थिक दबाव बनाना था।
संचालिका ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व मैनेजर ने "महेंद्र" नामक व्यक्ति को पुलिस अधिकारी बताकर प्रबंधन से पहले ₹20,000 और बाद में ₹2.5 लाख देने की मांग की। उन्होंने कहा कि संस्था ने कोई भुगतान नहीं किया। बाद में एचएएल पुलिस स्टेशन पहुंचने पर अधिकारियों ने कथित रूप से बताया कि संबंधित व्यक्ति पुलिस अधिकारी नहीं है।
डेकेयर प्रबंधन का कहना है कि संस्था में मोबाइल फोन ले जाना प्रतिबंधित है और आरोपित कर्मचारियों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए चोरी-छिपे मोबाइल अंदर लाकर वीडियो रिकॉर्ड किए। संस्था के कानूनी सलाहकार आदित्य कृष्ण पांडे ने इसे "पूर्व नियोजित साजिश" बताया और कहा कि 17 वर्षों के संचालन में पहली बार इस तरह की घटना सामने आई है।
दूसरी ओर, इस मामले में पुलिस पहले ही पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर चुकी है तथा दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
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