बेंगलुरु नगर निगम चुनाव टले, नागरिक समूहों का फूटा गुस्सा
- धन्नाराम चौधरी

- 12 जुल॰
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भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 12 जुलाई, 2026 बेंगलुरु नगर निगम (बीबीएमपी/ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी क्षेत्र) के चुनावों को एक बार फिर टालने की राज्य सरकार की पहल पर शहर के नागरिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस कदम को "लोकतंत्र का मजाक" और स्थानीय स्वशासन की भावना के खिलाफ बताया है। नागरिक समूहों का कहना है कि वर्षों से निर्वाचित नगर परिषद नहीं होने के कारण शहर में जवाबदेही कमजोर हुई है, नागरिकों की आवाज दब गई है और कई बड़ी परियोजनाएं बिना पर्याप्त जनभागीदारी के आगे बढ़ाई जा रही हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता वी. रामप्रसाद ने कहा कि नगर निगम चुनावों में लगातार देरी स्थानीय स्वशासन और सहभागी लोकतंत्र के संवैधानिक अधिकार को कमजोर कर रही है। उनका कहना है कि लोकतंत्र की असली ताकत स्थानीय निकायों में होती है, लेकिन चुनाव टलने से नागरिकों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
आई चेंज इंदिरानगर की स्नेहा नंदीहाल ने कहा कि निर्वाचित परिषद के अभाव में नागरिक केवल नौकरशाही प्रशासन पर निर्भर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि शहर की शासन व्यवस्था में जनता की भागीदारी लगातार घट रही है और लोगों के पास अपनी समस्याओं को प्रभावी ढंग से रखने का मंच नहीं बचा है।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि निर्वाचित निकाय नहीं होने से कई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं—जैसे एलिवेटेड कॉरिडोर, टनल रोड और अन्य सड़क परियोजनाएं—जनता की आपत्तियों के बावजूद आगे बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि यदि निर्वाचित पार्षद मौजूद होते तो नागरिकों की राय और स्थानीय जरूरतों को अधिक महत्व मिलता।
दक्षिण बेंगलुरु के निवासी अक्षय ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में आम नागरिकों की बात सुनने की प्रवृत्ति कमजोर हुई है। उन्होंने दावा किया कि टनल रोड परियोजना पर पुनर्विचार की मांग करने वाले युवाओं को अधिकारियों द्वारा अदालत जाने की सलाह दी गई, जिससे संवाद की कमी स्पष्ट होती है।
महादेवपुरा टास्क फोर्स के क्लेमेंट जयकुमार ने कहा कि पार्षद प्रशासन और नागरिकों के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। उनके अनुसार, बेंगलुरु में छह वर्षों से अधिक समय से निर्वाचित पार्षद नहीं होने का सीधा असर नागरिक समस्याओं के समाधान पर पड़ा है। लोगों को यह भी स्पष्ट नहीं होता कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए किस विभाग से संपर्क किया जाए।
व्हाइटफील्ड राइजिंग के स्वयंसेवकों ने भी चुनाव टालने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि यदि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अधिक समय लग रहा है तो उसे अलग प्रक्रिया के रूप में पूरा किया जाना चाहिए, न कि नगर निगम चुनावों को टालने का आधार बनाया जाए।
नागरिक संगठनों का कहना है कि बेंगलुरु जैसे तेजी से विकसित हो रहे महानगर में लोकतांत्रिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द नगर निगम चुनाव कराना आवश्यक है।
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