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बेंगलुरु की सड़कों पर अब डिजिटल निगरानी! 'रोड हिस्ट्री' टूल फिर चर्चा में

  • Writer: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • Jul 13
  • 2 min read
Gridlocked city highway packed with cars, buses and yellow taxis under a Ford sign, with trees and flowers dividing lanes.
₹5,000 करोड़ की सड़क परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की तैयारी, हर सड़क का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 13 जुलाई, 2026। बेंगलुरु की सड़क परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वर्षों पहले शुरू की गई 'रोड हिस्ट्री' (Road History) डिजिटल परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। शहर में सड़क निर्माण और मरम्मत पर ₹5,000 करोड़ से अधिक खर्च, बार-बार एक ही सड़क की खुदाई, विभागों के बीच समन्वय की कमी और सार्वजनिक धन के उपयोग पर उठते सवालों के बीच इस डिजिटल टूल को प्रभावी समाधान के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस परियोजना को पूरी तरह लागू किया जाए तो प्रत्येक सड़क का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध होगा और निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी।


रोड हिस्ट्री परियोजना की अवधारणा वर्ष 2014-15 के बीबीएमपी बजट में सामने आई थी। इसका उद्देश्य शहर की प्रत्येक सड़क को एक स्थायी डिजिटल पहचान संख्या (Unique Road ID) देना था, ताकि सड़क निर्माण, मरम्मत, खुदाई, बजट, ठेकेदार, विभाग और कार्यों का पूरा इतिहास एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सके।


बीबीएमपी की कराधान एवं वित्त समिति के पूर्व अध्यक्ष मंजुनाथ राजू, जिन्होंने इस परियोजना की अवधारणा तैयार की थी, ने कहा कि इसका उद्देश्य नागरिक प्रशासन को डेटा आधारित और अधिक पारदर्शी बनाना था। उनके अनुसार, 13,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों का डिजिटल दस्तावेजीकरण किया गया था। इसके तहत सड़कों, नालों, भूमिगत केबलों और अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे का GIS आधारित डिजिटल मानचित्र तैयार किया गया।


हाल ही में बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा द्वारा सड़कों के गड्ढों की मरम्मत और बार-बार होने वाले निर्माण कार्यों को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाए जाने के बाद इस परियोजना को फिर से महत्व मिला है। उन्होंने कथित तौर पर एक ही सड़क पर बार-बार बिल बनाए जाने जैसी प्रथाओं पर चिंता व्यक्त की थी।


मंजुनाथ राजू का कहना है कि यदि सड़क इतिहास प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग किया जाए तो BBMP, BWSSB, BESCOM तथा अन्य एजेंसियों द्वारा सड़क खुदाई और मरम्मत कार्यों की वास्तविक समय में निगरानी संभव होगी। इससे बिना अनुमति सड़क काटने, बार-बार खुदाई और अनावश्यक खर्च जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।


बेंगलुरु प्रजा वेदिका के संस्थापक सदस्य एन.एस. मुकुंदा ने भी इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यदि रोड हिस्ट्री प्लेटफॉर्म को पूरी तरह लागू किया जाए तो सड़क पर कब डामर बिछाया गया, कितनी राशि खर्च हुई, किस एजेंसी ने कार्य किया और कब मरम्मत हुई—इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी।


हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह परियोजना अभी तक अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप पूर्ण रूप से लागू नहीं हो सकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे तकनीकी रूप से अद्यतन कर सभी विभागों के साथ एकीकृत किया जाए तो बेंगलुरु की सड़क परियोजनाओं में बेहतर समन्वय और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है।

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