Krishna Janmabhoomi News: श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर 9 अगस्त को कारसेवा का ऐलान, संतों ने कहा— 'अब मथुरा की बारी'
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- 13 जुल॰
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भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मथुरा/हरिद्वार | 13 जुलाई, 2026 देश की धार्मिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में एक बार फिर Krishna Janmabhoomi News है। हरिद्वार में आयोजित संतों की बैठक के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर बड़ा ऐलान किया गया है। काली सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी आनंद स्वरूप सहित कई संतों ने 9 अगस्त को मथुरा में प्रस्तावित कारसेवा का समर्थन करते हुए देशभर के संतों और श्रद्धालुओं से इसमें शामिल होने की अपील की है। संत समाज का कहना है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि करोड़ों सनातनियों की आस्था का केंद्र है और इस विषय पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी भावनाएं व्यक्त की जाएंगी।
हरिद्वार में हुई बैठक में मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी, श्री चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु डॉ. स्वामी सच्चिदानंद, आनंद अखाड़ा के संत एवं अन्य प्रमुख धार्मिक प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के बाद संतों ने कहा कि अयोध्या के बाद अब मथुरा की ओर ध्यान देने का समय आ गया है। उन्होंने भक्तों से "चलो मथुरा चलें" का आह्वान भी किया।
जगद्गुरु स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि 9 अगस्त को ब्रज क्षेत्र में कारसेवा का आयोजन करने का संकल्प लिया गया है। उनके अनुसार, यह कार्यक्रम श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ी धार्मिक भावनाओं को शांतिपूर्ण ढंग से व्यक्त करने के उद्देश्य से प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर संत समाज व्यापक जनसमर्थन चाहता है।
काली सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि यदि सरकार 9 अगस्त से पहले श्रीकृष्ण मंदिर निर्माण को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा करती है, तो प्रस्तावित कारसेवा की आवश्यकता नहीं रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त करना है।
अयोध्या के कुछ संतों ने भी इस प्रस्तावित कारसेवा का समर्थन किया है। वहीं संत समाज का दावा है कि हरिद्वार से लगभग 600 से 700 संत इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए तैयार हैं। आयोजन को लेकर धार्मिक संगठनों के बीच लगातार बैठकें और रणनीति बनाई जा रही है।
हालांकि, श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामले न्यायालय में भी विभिन्न स्तरों पर विचाराधीन हैं। ऐसे में इस विषय को लेकर प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं पर भी सभी की नजर बनी हुई है। राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
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