बंगाल में ‘लेफ्ट मॉडल’ की वापसी? मोदी का टीएमसी पर बड़ा हमला
- धन्ना राम चौधरी

- 11 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
मुर्शिदाबाद। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुर्शिदाबाद की जनसभा में सत्तारूढ़ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर तीखा प्रहार करते हुए उसे वामपंथी शासन का “नया अवतार” करार दिया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम बंगाल का राजनीतिक इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि समय-समय पर सत्ता में आई ताकतों का अंत जनता ने ही किया है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों से लेकर कांग्रेस और फिर वामपंथी दलों तक—हर सत्ता का अहंकार जनता ने चकनाचूर किया है और अब वही स्थिति टीएमसी के साथ बनने जा रही है। मोदी ने आरोप लगाया कि “मां, माटी, मानुष” के नारे के साथ सत्ता में आई टीएमसी ने जनता की उम्मीदों को पूरा नहीं किया। इसके उलट, उसने उसी शासन प्रणाली को अपनाया, जिसके खिलाफ कभी संघर्ष किया था। उनके मुताबिक, टीएमसी आज वामपंथी दलों की कार्यशैली की “हूबाहू नकल” बन चुकी है। सभा में प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और तस्करी जैसे मुद्दों को भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने दावा किया कि वामपंथी शासनकाल से जुड़े असामाजिक तत्व अब टीएमसी के साथ मिलकर सक्रिय हैं और राज्य में सिंडिकेट तथा कमीशन आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हथियारों, नशीले पदार्थों और मवेशियों की तस्करी जैसे अवैध नेटवर्क पर सत्तारूढ़ दल का नियंत्रण है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और शासन के मुद्दे पर भाजपा की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मोदी ने कहा कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए संकल्पित है। उन्होंने “तुष्टीकरण की राजनीति” को समाप्त करने का भी आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने भाजपा के चुनावी अभियान को “बदलाव का मिशन” बताते हुए कहा कि पार्टी का लक्ष्य राज्य में कथित “जंगल राज” और “सिंडिकेट राज” को खत्म करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि बंगाल की जनता इस बार निर्णायक बदलाव के लिए मतदान करेगी। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के तीखे हमलों से चुनावी मुकाबला और अधिक ध्रुवीकृत हो सकता है। आगामी चरणों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसके दावों पर मुहर लगाती है और क्या बंगाल की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव आता है।
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