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बंगाल में BJP का बड़ा दांव: योगी मॉडल वाला उम्मीदवार!

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 22 मार्च
  • 3 मिनट पठन

अपडेट करने की तारीख: 23 मार्च

फाइल फोटो

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता/उत्तर दिनाजपुर। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने रणनीति में बदलाव करते हुए स्थानीय और प्रभावशाली चेहरों पर दांव खेला है। इसी कड़ी में पार्टी ने उत्तर दिनाजपुर जिले की कालियागंज विधानसभा सीट से संत पृष्ठभूमि वाले उत्पल महाराज (स्वामी ज्योतिर्मयानंद) को उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।


हालांकि, चुनावी मैदान में उतरते ही उत्पल महाराज को बड़ा झटका लगा है। जिस भारत सेवाश्रम संघ से वे जुड़े रहे, उसी ने उन्हें संगठन से निष्कासित कर दिया है। संघ ने साफ कहा है कि वह एक गैर-राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक संस्था है, और उससे जुड़े किसी भी संन्यासी को राजनीति में प्रवेश की अनुमति नहीं है।


संघ से निष्कासन, सियासत में प्रवेश

संघ के महासचिव स्वामी विश्वात्मानंद द्वारा जारी पत्र में कहा गया कि उत्पल महाराज “राजनीति के जाल में फंस गए हैं” और संगठन की परंपराओं के विरुद्ध काम किया है। आपात बैठक के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया गया।


वहीं, उत्पल महाराज ने निष्कासन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही संगठन को चुनाव लड़ने की इच्छा से अवगत करा दिया था। अनुमति न मिलने पर उन्होंने 17 मार्च को इस्तीफा दे दिया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वे संन्यास जीवन से आगे बढ़कर सक्रिय राजनीति में जनता की सेवा करना चाहते हैं।


कौन हैं उत्पल महाराज?

उत्पल महाराज, पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले के बलुरघाट के रहने वाले हैं। वर्ष 2000 में वे भारत सेवाश्रम संघ से जुड़े और 2004 में इतिहास विषय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। बचपन से ही संन्यास जीवन की ओर झुकाव रखने वाले उत्पल महाराज लंबे समय तक सामाजिक और धार्मिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं।


‘योगी मॉडल’ की झलक?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्पल महाराज की छवि और बयानबाजी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मेल खाती है। वे हिंदू अस्मिता, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं।


उत्पल महाराज का कहना है कि “सिर्फ आध्यात्मिक संगठनों के माध्यम से हिंदुओं की समस्याओं का समाधान संभव नहीं है, इसके लिए राजनीतिक ताकत जरूरी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में हिंदू त्योहारों के आयोजन में बाधाएं आती हैं और कई बार प्रशासनिक अनुमति पर निर्भर रहना पड़ता है।


बीजेपी ने क्यों खेला यह दांव?

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, बीजेपी का यह कदम पश्चिम बंगाल में हिंदुत्व आधारित राजनीति को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी पहले भी अभिनेताओं, खेल हस्तियों और धार्मिक चेहरों को चुनावी मैदान में उतारती रही है। उत्पल महाराज की लोकप्रियता और धार्मिक पृष्ठभूमि को देखते हुए पार्टी को उनसे चुनावी लाभ की उम्मीद है।


क्या है भारत सेवाश्रम संघ?

भारत सेवाश्रम संघ की स्थापना वर्ष 1917 में स्वामी प्रणवानंद ने की थी। इसका मुख्यालय कोलकाता में स्थित है। यह संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और आदिवासी कल्याण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है।


संघ का मानना है कि “सेवा ही ईश्वर की आराधना है” और उसके अनुसार संन्यासियों को सामाजिक सेवा तक सीमित रहना चाहिए, राजनीति से दूर रहना चाहिए।


चुनावी असर और आगे की राह

उत्पल महाराज का चुनावी मैदान में उतरना और उसके बाद संघ से निष्कासन, पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी का यह ‘योगी मॉडल’ दांव कितना कारगर साबित होता है और क्या उत्पल महाराज मतदाताओं को प्रभावित कर पाते हैं या नहीं।


फिलहाल, बंगाल की सियासत में धर्म, संगठन और राजनीति के इस टकराव ने चुनावी माहौल को और अधिक गरमा दिया।

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