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“घोषणापत्र पर सियासी घमासान: ‘दीदी की 10 प्रतिज्ञा’ पर विपक्ष का हमला, चुनावी वादों पर उठे सवाल”

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 22
  • 2 min read

Updated: Mar 23


भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही राज्य की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। सत्तारूढ़ ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने शुक्रवार को अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया, जिसे ‘दीदी की 10 प्रतिज्ञा’ नाम दिया गया है। घोषणापत्र में महिलाओं, युवाओं, किसानों और गरीब वर्ग के लिए कई बड़े वादे किए गए हैं, लेकिन इसके जारी होते ही विपक्ष ने इसे लेकर तीखा हमला शुरू कर दिया है।


घोषणापत्र पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया मैथिली ठाकुर की ओर से आई। उन्होंने टीएमसी के वादों को “अवास्तविक” बताते हुए सवाल उठाया कि चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद ही ऐसे वादे क्यों किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार गंभीर होती तो इन योजनाओं को पहले ही लागू किया जा सकता था।


इसी कड़ी में बीजेपी विधायक शंकर घोष ने भी टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य की जनता अब बदलाव चाहती है और इस बार मतदाता टीएमसी को नकारने का मन बना चुके हैं। उन्होंने ममता सरकार पर बंगाल की विरासत और विकास को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।


वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी घोषणापत्र को लेकर टीएमसी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही बड़े-बड़े वादों की बाढ़ आ जाती है और जनता को गुमराह करने की कोशिश की जाती है।


घोषणापत्र में क्या हैं प्रमुख वादे?

टीएमसी के घोषणापत्र में महिलाओं के लिए चलाई जा रही ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना की राशि बढ़ाने का वादा किया गया है। इसके तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये और एससी/एसटी वर्ग की महिलाओं को 1,700 रुपये प्रतिमाह देने की बात कही गई है।


युवाओं के लिए ‘बांग्लार युवा-साथी’ योजना के तहत 1,500 रुपये मासिक भत्ता देने का प्रस्ताव रखा गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए ‘दुआरे चिकित्सा’ योजना के तहत हर बूथ स्तर पर चिकित्सा शिविर लगाने और घर-घर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने का दावा किया गया है।


ग्रामीण विकास के क्षेत्र में ‘बांग्लार बारी’ योजना के तहत 30 लाख नए घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों के लिए धान की खरीद 2,500 रुपये प्रति क्विंटल पर करने और छोटे किसानों को मुफ्त सिंचाई सुविधा देने का वादा भी किया गया है।


इसके अलावा घोषणापत्र में औद्योगिक विकास और एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया है।


केंद्र बनाम राज्य का मुद्दा भी गरमाया

घोषणापत्र जारी करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बंगाल के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।


चुनावी मुकाबला हुआ तेज

घोषणापत्र के साथ ही पश्चिम बंगाल में चुनावी मुकाबला और तेज हो गया है। एक ओर टीएमसी अपने वादों के दम पर जनता को साधने की कोशिश कर रही है, तो वहीं बीजेपी और कांग्रेस इन वादों को ‘चुनावी लालच’ बताकर जनता के बीच सवाल खड़े कर रही हैं। आने वाले दिनों में यह सियासी टकराव और तेज होने के संकेत।

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