बंगाल चुनाव सर्वेक्षण: मोदी बनाम ममता - आमने-सामने की टक्कर!
- धन्ना राम चौधरी

- 22 मार्च
- 2 मिनट पठन
अपडेट करने की तारीख: 23 मार्च
फाइल फोटो
भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनज़र राज्य की सियासत चरम पर पहुंच गई है। ताज़ा ओपिनियन पोल और सर्वेक्षणों ने चुनावी तस्वीर को और दिलचस्प बना दिया है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) “मोदी फैक्टर” के सहारे सत्ता परिवर्तन की उम्मीदों को पंख देने में जुटी है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस बार का चुनाव एकतरफा नहीं, बल्कि सीधा और कांटे का मुकाबला बनने की ओर बढ़ रहा है। पिछले चुनावों के मुकाबले भाजपा की स्थिति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, जिससे टीएमसी के सामने चुनौती पहले से कहीं अधिक कठिन हो गई है।
चुनावी कार्यक्रम और तैयारियां तेज
राज्य में मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। चुनाव आयोग की घोषणा के बाद से ही दोनों प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। जमीनी स्तर पर प्रचार अभियान तेज हो चुका है और बड़े नेताओं की रैलियों का दौर भी जारी है।
“मोदी फैक्टर” बना भाजपा का सबसे बड़ा हथियार
भाजपा इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में आक्रामक चुनावी रणनीति अपना रही है। पार्टी “डबल इंजन सरकार”, राष्ट्रीय सुरक्षा, घुसपैठ और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही है। भाजपा को उम्मीद है कि केंद्र की लोकप्रियता और नेतृत्व का प्रभाव राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।
ममता बनर्जी का ‘बंगाली अस्मिता’ कार्ड
वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी अपनी कल्याणकारी योजनाओं और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दे को प्रमुखता दे रही है। “बंगाली अस्मिता” और सामाजिक योजनाओं के जरिए पार्टी मतदाताओं को अपने पक्ष में बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, लंबे समय से सत्ता में रहने के कारण कुछ क्षेत्रों में एंटी-इंकम्बेंसी (विरोध) की चुनौती भी टीएमसी के सामने मौजूद है।
सर्वे में क्या दिख रही है तस्वीर?
ताज़ा ओपिनियन पोल के अनुसार टीएमसी फिलहाल बढ़त बनाए हुए है, लेकिन भाजपा भी तेजी से अंतर कम करती दिखाई दे रही है। कई सर्वे यह संकेत दे रहे हैं कि भाजपा सीटों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकती है, जिससे मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि “मोदी फैक्टर” इस चुनाव को पूरी तरह खुला बना रहा है और अंतिम परिणाम मतदान के दिन मतदाताओं के रुझान पर निर्भर करेगा।
निर्णायक होंगे ये मुद्दे
इस चुनाव में बेरोजगारी, विकास, कानून-व्यवस्था, केंद्र-राज्य संबंध और स्थानीय पहचान जैसे मुद्दे निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। ग्रामीण और शहरी मतदाताओं के रुझान में अंतर भी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।
पश्चिम बंगाल का यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन या वापसी का सवाल नहीं, बल्कि दो अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं और रणनीतियों की सीधी टक्कर बन चुका है। एक ओर “मोदी फैक्टर” का प्रभाव है, तो दूसरी ओर ममता बनर्जी की जमीनी पकड़। ऐसे में 4 मई को आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि बंगाल में सत्ता का संतुलन किस ओर झुकता है।
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