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बंगाल चुनाव: 8 हजार बूथ सुपर सेंसेटिव, 135 दबंग हिरासत में

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 21
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर कड़ी कर दी गई है। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल 2026 और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित है। इससे पहले भारत निर्वाचन आयोग ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर सख्ती बरतते हुए राज्य के करीब 8 हजार पोलिंग बूथों को ‘सुपर सेंसेटिव’ घोषित किया है।


आयोग के अनुसार ये वे मतदान केंद्र हैं, जहां पूर्व में हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और चुनावी गड़बड़ियों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। विशेष रूप से पहले चरण के अंतर्गत आने वाले इन बूथों पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है। संवेदनशील इलाकों में प्रशासन की निगरानी भी बढ़ा दी गई है। इसी कड़ी में पुलिस ने अब तक 135 ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में लिया है, जिन्हें दबंग और अराजक गतिविधियों में संलिप्त माना जाता रहा है। ये लोग मुख्य रूप से मुर्शिदाबाद, मालदा, बलूरघाट तथा उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों से संबंधित बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन व्यक्तियों को चुनाव प्रक्रिया पूर्ण होने तक निगरानी में रखा जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। पूर्व चुनावी अनुभवों के आधार पर लगभग 200 ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां पहले हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए संबंधित पोलिंग बूथों को सुपर सेंसेटिव श्रेणी में रखा गया है। जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को नियमित दौरे कर स्थिति का आकलन करने और आम मतदाताओं में विश्वास बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दोहराया है कि राज्य में भयमुक्त और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए हर स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं।

एआई तकनीक से निगरानी, तीन-स्तरीय कंट्रोल सिस्टम

चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है। बूथों के भीतर और बाहर किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर एआई आधारित सिस्टम तत्काल अलर्ट जारी करेगा। इसके लिए एक अत्याधुनिक कंट्रोल कमांड सेंटर स्थापित किया गया है, जो रियल-टाइम निगरानी करेगा। इसके अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारियों और राज्य निर्वाचन कार्यालयों में भी कंट्रोल सेंटर बनाए गए हैं। इस प्रकार निगरानी के लिए तीन-स्तरीय (थ्री-टियर) व्यवस्था लागू की गई है, जिससे हर स्तर पर सतर्कता सुनिश्चित हो सके।

खर्च के लिहाज से भी 55 सीटें संवेदनशील

आयोग ने राज्य की 55 विधानसभा सीटों को चुनावी खर्च के दृष्टिकोण से भी संवेदनशील श्रेणी में रखा है। इनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भबानीपुर सीट भी शामिल है, जहां उन्हें भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से कड़ी चुनौती मिल रही है। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। आयोग की सख्ती और तकनीकी निगरानी के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार मतदान प्रक्रिया कितनी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होती है।


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