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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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प्राइवेट स्कूलों पर सख्ती: अब कक्षा 8 तक सिर्फ NCERT किताबें

लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
धन्ना राम चौधरी
23 अप्रैल
2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। देशभर के प्राइवेट स्कूलों द्वारा महंगी किताबें थोपने की शिकायतों पर अब सख्त कार्रवाई की तैयारी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सभी राज्य सरकारों और शिक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी किया है और 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार का आर्थिक या अकादमिक भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।

आयोग की खंडपीठ, जिसकी अध्यक्षता सदस्य प्रियंक कानूनगो कर रहे हैं, ने देशभर से मिली शिकायतों के आधार पर यह कदम उठाया है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कई प्राइवेट स्कूल जानबूझकर निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लागू करते हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।

महंगी किताबों पर लगेगी लगाम

आयोग ने निर्देश दिया है कि कक्षा 8 तक सभी स्कूलों में केवल NCERT या SCERT की निर्धारित किताबें ही पढ़ाई जाएं। इससे अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि निजी प्रकाशकों की किताबें अक्सर NCERT की तुलना में कई गुना महंगी होती हैं। आयोग ने शिक्षा मंत्रालय से यह भी सवाल किया है कि जब सरकारी स्कूलों में एक समान पाठ्यक्रम लागू है, तो प्राइवेट स्कूल अलग किताबें क्यों चला रहे हैं।

स्कूल बैग का बोझ भी होगा कम

इस फैसले के साथ ही आयोग ने ‘नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी 2020’ को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य बच्चों के बैग का वजन कम करना और उन्हें अनावश्यक किताबों के बोझ से राहत दिलाना है। आयोग ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) की धारा 29 का हवाला देते हुए कहा कि निर्धारित मानकों से अधिक किताबें लादने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मनमानी बुकलिस्ट पर रोक

अब स्कूल अपनी मनमर्जी से बुकलिस्ट जारी नहीं कर पाएंगे। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि 30 दिनों के भीतर सभी स्कूलों का ऑडिट किया जाए। यदि किसी स्कूल में NCERT के अलावा अनावश्यक या महंगी किताबें पाई जाती हैं, तो संबंधित संस्थान को जवाब देना होगा और कार्रवाई भी हो सकती है।

राज्यों से मांगी गई अहम जानकारी

NHRC ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस भेजकर तीन प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी मांगी है-

क्या शिक्षा अधिकारियों ने स्कूलों को NCERT किताबें लागू करने का आदेश दिया है?

यदि नहीं, तो तुरंत आदेश जारी कर उसकी अनुपालना सुनिश्चित की जाए।

सत्र 2025-26 में सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में दाखिले और खरीदी गई किताबों का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराया जाए।

समान शिक्षा पर जोर

आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब सरकारी स्कूलों में NCERT पाठ्यक्रम लागू है, तो प्राइवेट स्कूलों में महंगी किताबें लागू करना शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन और एक प्रकार का भेदभाव है। सभी बच्चों को समान और सुलभ शिक्षा मिलनी चाहिए। अब नजरें राज्यों की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो अगले 30 दिनों में आयोग को सौंपी जाएंगी। इस फैसले से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने और अभिभावकों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


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