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फंसी सड़कों को मिलेगी रफ्तार, राजस्थान में लागू होगा नया मॉडल

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 22
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

जयपुर। शहरों में सड़क कनेक्टिविटी के इंतजार के सालों भर के दौर को खत्म करने की दिशा में राजस्थान सरकार ने बड़ी कार्ययोजना तैयार कर ली है। जमीन विवाद और न्यायालय के केस में पड़ी 500 से अधिक सेक्टर सड़कों को जल्द पूरा करने के लिए अब “सामूहिक पैरवी मॉडल” कायम किया जाएगा, जिससे अटके हुए निर्माण कार्यों को नई रफ्तार मिलेगी।

जमीन विवादों के फंदे में अटकी सड़कें

राजस्थान में अब तक जमीन विवाद और न्यायालय की लंबी प्रक्रिया के कारण 500 से अधिक सेक्टर सड़कें अधूरी पड़ी हैं, जिनमें से अकेले जयपुर में 226 सड़कें विवादों के चलते निर्माण चरण में अटक गई हैं। अलग‑अलग जमीन मुआवजा, अधिग्रहण और अधिकार‑विवाद से जुड़े मामले अलग‑अलग कोर्ट में चलते हैं, जिससे काम शुरू होने से पहले ही दशकों गुजर जाते हैं।

नया मॉडल: सामूहिक पैरवी और एक साथ निपटारा

नई व्यवस्था के तहत अब सभी विवादग्रस्त सड़कों से जुड़े मामलों को एक साथ “क्लब” कर कोर्ट में सामूहिक पैरवी की जाएगी।

इसके लिए जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने आयुक्त सिद्धार्थ महाजन की अगुवाई में राजस्थान सरकार को विस्तृत प्रस्ताव भेजा है, जिस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता को पैरवी करने के निर्देश दिए जाएंगे। सफल क्रियान्वयन के बाद यह मॉडल प्रदेश के अन्य शहरों में भी लागू किया जाएगा।

ट्रैफिक दबाव और कनेक्टिविटी पर नई प्राथमिकता

इससे पहले सेक्टर सड़कों को मास्टर प्लान के आधार पर ‘ए श्रेणी’ (178 सड़कें) और ‘बी श्रेणी’ (48 सड़कें) में बांटकर काम किया जाता था, जिससे केवल एक श्रेणी पर ही अधिक फोकस रहता था, चाहे वहां यातायात दबाव कम ही क्यों न हो। अब इस श्रेणी‑प्रणाली को खत्म कर दिया गया है और सड़क निर्माण की प्राथमिकता ट्रैफिक के दबाव और कनेक्टिविटी की वास्तविक जरूरत के आधार पर तय की जाएगी।

क्यों अटक रही थीं सड़कें?

सरकार ने अपने आंकलन में इन अड़चनों को स्पष्ट किया है:

मुआवजा राशि तय होने के बावजूद जमीन विवाद न्यायालय तक पहुंच जाते थे।

अधिग्रहण और समझाइश प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे।

विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी और आसान‑मामलों को प्राथमिकता न दिए जाने के कारण लंबी देरी होती थी।

जनहित: कम दूरी, बेहतर आवागमन

राजस्थान के नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने स्पष्ट किया कि नए मॉडल का मुख्य उद्देश्य लोगों की आवाजाही को आसान बनाना है, ताकि नागरिकों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत न पड़े। जयपुर विकास आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि सड़कों से जुड़े सभी विवादों को एक साथ क्लब कर सामूहिक पैरवी करने की योजना है, जिससे प्राथमिकता यातायात दबाव और कनेक्टिविटी की वास्तविक आवश्यकता पर रहेगी।

आगे की राह: जयपुर से शुरू, पूरे प्रदेश तक

जयपुर विकास प्राधिकरण इस नए मॉडल को पहले पायलट आधार पर लागू करेगा, जहां से मिलने वाले नतीजों के बाद इसे राजस्थान के अन्य बड़े शहरों में विस्तारित किया जाएगा। इससे निर्माण कार्यों की गति तेज होने के साथ‑साथ नागरिकों को लंबे समय तक गड्ढेदार और अधूरी सड़कों के चक्कर से मुक्ति मिलने की उम्मीद है।


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