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कर्नाटक में शराब टैक्स पर क्रांति: अब स्ट्रेंथ से तय होगा बोझ!

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 21
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलुरु, 21 अप्रैल 2026। कर्नाटक में शराब की बोतलें अब महंगी होने को तैयार हैं! राज्य सरकार ने शराब पर टैक्स सिस्टम में ऐतिहासिक बदलाव का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। 1968 के कर्नाटक एक्साइज रेगुलेशन में संशोधन प्रस्तावित करते हुए सरकार ने टैक्स को कीमत से हटाकर एल्कोहल की 'स्ट्रेंथ' यानी मात्रा पर आधारित करने का फैसला लिया है। इसका मतलब साफ है—जितनी ज्यादा ताकत वाली शराब, उतना भारी टैक्स! यह नई व्यवस्था व्हिस्की, रम, बीयर और वाइन समेत सभी श्रेणियों पर लागू होगी, जिससे टैक्सेशन में पारदर्शिता और एकरूपता आएगी।

एल्कोहल मात्रा बनेगी टैक्स का आधार

नई नीति में 'Alcohol-in-Beverage' को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है—प्रति लीटर शराब में शुद्ध अल्कोहल की मात्रा ही टैक्स तय करेगी। पहले जहां टैक्स सिर्फ एमआरपी (सुझाई गई खुदरा कीमत) पर निर्भर था, वहीं अब प्रोडक्ट कैटेगरी और स्ट्रेंथ प्रमुख भूमिका निभाएंगी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह बदलाव सरकार की आय बढ़ाने के साथ-साथ बाजार में अनियमितताओं को रोकेगा। उदाहरण के तौर पर, इंडियन मेड लिकर (IML) पर टैक्स स्लैब अब 50 रुपये प्रति लीटर से शुरू होकर प्रीमियम ब्रांड्स पर 3700 रुपये तक पहुंच सकता है। सस्ती शराब पर राहत मिलेगी, लेकिन महंगी और हाई-स्ट्रेंथ वाली बोतलों की कीमतों में उछाल तय है।

डिफेंस को छूट, आम उपभोक्ता पर बोझ

प्रस्तावित नियमों में एक दिलचस्प अंतर है—डिफेंस कैंटीन, पैरामिलिट्री सप्लाई, एक्सपोर्ट और अंतरराज्यीय ट्रांसफर पर कम टैक्स रहेगा। लेकिन आम बाजार के लिए टैक्स स्लैब कड़ी हैं। प्रीमियम सेगमेंट सबसे ज्यादा प्रभावित होगा, जहां हाई एल्कोहल कंटेंट वाली व्हिस्की-रम पर टैक्स आसमान छू लेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सस्ती शराब का चलन बढ़ सकता है, जबकि लग्जरी ब्रांड्स की बिक्री पर ब्रेक लगेगा।

बीयर पर भी नई स्लैब: हल्की सस्ती, स्ट्रॉन्ग महंगी

बीयर प्रेमियों के लिए भी अच्छे-बुरे समाचार हैं। 5% तक अल्कोहल वाली हल्की बीयर पर टैक्स कम रहेगा, लेकिन स्ट्रॉन्ग बीयर पर भारी मार पड़ेगी। इसके अलावा, अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी (AED) और अतिरिक्त काउंटरवेलिंग ड्यूटी (ACD) भी प्राइस स्लैब पर आधारित होंगी। सरकार का दावा है कि यह सिस्टम ज्यादा सटीक और राजस्व-अनुकूल साबित होगा, हालांकि उद्योग जगत इसे 'अप्रत्याशित चुनौती' बता रहा है।

ट्रेड एनालिस्ट राजेश कुमार कहते हैं, "यह बदलाव उपभोक्ता व्यवहार को बदल देगा। प्रीमियम सेगमेंट को झटका लगेगा, लेकिन सरकार की तिजोरी मजे में भर जाएगी।" स्टेकहोल्डर्स से ड्राफ्ट पर फीडबैक मांगा गया है, और अंतिम नोटिफिकेशन जल्द जारी हो सकता है। क्या यह कर्नाटक की शराब संस्कृति को नया आकार देगा? आने वाले दिन बताएंगे!


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