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राजकोट में 2500 करोड़ का साइबर घोटाला, बैंक अधिकारियों समेत 20 गिरफ्तार

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 21
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

राजकोट। गुजरात के राजकोट से एक चौंकाने वाला साइबर घोटाला सामने आया है, जिसने बैंकिंग सिस्टम की पारदर्शिता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 2500 करोड़ रुपये के इस बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े में पुलिस ने अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें तीन निजी बैंकों के अधिकारी भी शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, यह कोई साधारण साइबर अपराध नहीं बल्कि एक संगठित और सुनियोजित नेटवर्क था, जिसमें बैंकिंग सिस्टम के अंदरूनी लोगों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर अवैध लेन-देन को अंजाम दिया गया।

बैंक अधिकारियों की संलिप्तता उजागर

जांच में सामने आया है कि Yes Bank, Axis Bank और HDFC Bank के तीन अधिकारियों ने इस घोटाले में अहम भूमिका निभाई। आरोप है कि इन अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संदिग्ध बैंक खाते खुलवाए और उन्हें सक्रिय बनाए रखा, जिससे साइबर ठगों को लेन-देन करने में आसानी हुई।

85 फर्जी खातों का खुलासा

पुलिस जांच में अब तक 85 फर्जी बैंक खातों की पहचान की गई है। इन खातों के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया, जिसे बैंक की निगरानी प्रणाली से बचाने के लिए तकनीकी और प्रक्रियागत खामियों का फायदा उठाया गया।

हवाला नेटवर्क से जुड़ा मामला

जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि खातों से निकाली गई रकम को हवाला चैनलों के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा गया। कुछ बैंक अधिकारियों पर नकद निकासी में भी सहयोग करने का आरोप है, जिससे इस नेटवर्क को और मजबूती मिली।

535 शिकायतें दर्ज

इस बड़े घोटाले को लेकर Cyber Crime Portal पर अब तक 535 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। इससे स्पष्ट है कि इस नेटवर्क ने व्यापक स्तर पर लोगों को निशाना बनाया।

पुलिस की जांच जारी

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले की गहन जांच की जा रही है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह घोटाला न केवल साइबर अपराध की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि बैंकिंग तंत्र में आंतरिक निगरानी की कमजोरियों को भी उजागर करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों को रोकने के लिए बैंकों को अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं को और सख्त बनाना होगा तथा संदिग्ध लेन-देन पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।


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